हादसा...........


भागी जा रही थी मैं...

अपनी तेज रफ़्तार
जिंदगी के साथ,
पूरे जोर से,
जोशोखरोश से.
भागती चली जा रही थी
मैं और 
मेरी जिंदगी !
लापरवाह ,
बेख़ौफ़, 
बिना किसी रोक टोक के....
मगर 
हर तेज रफ़्तार
शायद
हादसे  का सबब
बनती ही है-
और बस.....
मैं भी
टकरा गयी
तुमसे-
अचानक !!!!
तब से
थम गयी हूँ मैं
और मेरी जिंदगी भी...
लहुलुहान सी
पड़ी हूँ तब से
अब तक 
वहीँ....
क्षत-विक्षत
बे-इन्तहा दर्द के साथ,
शायद किसी
चारागर की आस में...........
-अनु 

Comments

  1. चारागर ही टकराया था, हम को ये मालूम न था।

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  2. हादसे ही इंसान को समझदार बनाते हैं...हर मर्ज़ का इलाज चारागर के पास नहीं होता...

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  3. अगर टकराने के बजाय मिल जाते आहिस्ता-आहिस्ता
    तो न ये दर्द होता,न चारागर की तलाश होती !

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  4. चले चलते सफर में जो आहिस्ता-आहिस्ता,
    न टूटता दिल ,न तलाश होती चारागर की !

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  5. हर तेज रफ़्तार का हादसा से गहारा नाता होता है.. अच्छी लगी..

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  6. जो दवा के नाम पर जहर दे अब उसी चारगार की तलाश हो ..... :)

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  7. रफ़्तार तेज हो या कम - हादसे होते ही हैं , कारण कभी तेज कभी कम !

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  8. बढ़िया प्रस्तुति ।

    बधाई स्वीकारें ।।

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  9. kai bar hadase jivan ke liy sabak ban jate hai ...sundar prastuti..Anu.

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  10. वाह ...बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  11. हर टक्कर से हादसे नहीं होते .
    लेकिन हर हादसे में दर्द होता है .

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  12. यूँ ही कोई मिल गया था
    सरेराह चलते चलते!!

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  13. वहीँ....
    क्षत-विक्षत
    बे-इन्तहा दर्द के साथ,
    शायद किसी
    चारागर की आस में...........

    वाह!!!!बहुत सुंदर प्रस्तुति,..

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  14. ओह्ह...प्रभावशाली अभिव्यक्ति.

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  15. बहुत सुन्दर प्रस्तुति !!

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  16. खूबसूरत हादसा......!!

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  17. सुंदर ...गहन .....भावाभिव्यक्ती ..... ...
    शुभकामनायें ...!!

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  18. आपकी रचनाएं सदैव अच्छी लगती हैं परंतु अक्सर प्रतिक्रिया रह जाती है; अपना स्नेह और लेखन में गतिशीलता बनाए रखें!
    हार्दिक धन्यवाद!
    सादर/सप्रेम
    सारिका मुकेश

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  19. हर तेज रफ़्तार
    शायद
    हादसे का सबब
    बनती ही हैं...
    बड़ी प्यारी और यथार्थ को छूती पंक्ति है....पर आज भागते रहना आदमी की फितरत बन चुकी है...बड़ी प्यारी कविता है और यह दर्द कितना असह्यनीय है:

    थम गयी हूँ मैं
    और मेरी जिंदगी भी...
    लहुलुहान सी
    पड़ी हूँ तब से
    अब तक
    वहीँ....
    क्षत-विक्षत
    बे-इन्तहा दर्द के साथ,
    शायद किसी
    चारागर की आस में...

    सादर/सप्रेम शुभकामनाएं
    सारिका मुकेश

    ReplyDelete
  20. अभी तो और भी रातें सफ़र में आयेंगी ,

    चरागे शब मेरे महबूब संभाल के रख .

    हादसे न हों तो ज़िन्दगी ज़िन्दगी न लगे मज़ाक हो जाए .रफ्तार कुछ भी हो हादसे तो होने हैं .कृपया यहाँ भी पधारें -
    बांझपन के समाधान में प्रयुक्त दवाएं बढ़ातीं हैं कैं...


    veerubhai

    बांझपन के समाधान में प्रयुक्त दवाएं बढ़ातीं हैं कैं... http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/04/blog-post_3370.html
    नुस्खे सेहत के
    नुस्खे सेहत के नुस्खे सेहत के

    ReplyDelete
  21. jindagi hi haadson ka naam hai par jo apni himmat aur lagan se un haadson ko jeet le vahi asli jindagi hai bahut gahan abhivyakti.

    ReplyDelete
  22. हर तेज रफ़्तार
    शायद
    हादसे का सबब
    बनती ही हैं...

    और

    थम गयी हूँ मैं
    और मेरी जिंदगी भी...
    लहुलुहान सी
    पड़ी हूँ तब से
    अब तक
    वहीँ....
    क्षत-विक्षत
    बे-इन्तहा दर्द के साथ,
    शायद किसी
    चारागर की आस में...

    बहुत खूबसूरत प्रस्तुति!!

    ReplyDelete
  23. हर तेज रफ़्तार
    शायद
    हादसे का सबब
    बनती ही हैं.....sach kaha aapne

    Sach haadse bahut kuch sikhla dete hain...
    bahut badiya rachna

    ReplyDelete
  24. हर तेज रफ़्तार
    शायद
    हादसे का सबब
    बनती ही हैं...

    हादसों को शायद तेज रफ़्तार गंवारा नहीं है

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  25. gahen ....dard me bheegi prastuti..

    hamesha hadse bure nahi hote...lekin honi ko koi tal bhi nahi sakta. kash koi acchha sa charagar mil gaya hota.

    ( anu ji is bar lagta hai apne meri post par comment dil se nahi diya)

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  26. ना जाने ये हादसे किस रूप में आ जाएँ...

    गहन अभिव्यक्ति!!!

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  27. ये हादसा अकसर हो ही जाता है। क्या करें?

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  28. ahaa...mujhe aisi waali badi mast lagti hain..tumse takra ke tham gai..ye mast bhaav hai.

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  29. एक्सीडेंट हो गया रब्बा रब्बा ...

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  30. हाँ अनु जी तेज रफ़्तार ऐसा ही कुछ कर दिखाती है काश हम संयम से चलें और टकराने पर कुछ अद्भुत सुख मिल जाए ..सुन्दर रचना
    भ्रमर ५

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  31. अक्सर इन्ही हादसों को ढोना ही ज़िन्दगी हो जाती है .... सुन्दर अनुजी !

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  32. I'm stunned Anu! A poem so beautifully written and so painfully touching!!...gahraa dard ubhar kar aataa hai...

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  33. ज़िंदगी और हादसे कहाँ साथ छोडते हैं एक दूसरे का ....बहुत सुंदर रचना..

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  34. अंतिम पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगीं।

    सादर

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  35. आपकी पीड़ा भरी दास्तां पढ़कर याद आया कि किसी शायर ने ठीक ही कहा है;
    "मेरे अश्कों को गिनेगा तू कहाँ तक हमदम, चश्मे पुरआब को सीधे से समंदर लिख दे."

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  36. हादसे न हों तो ज़िंदगी वीरान हो जाये ..... सुंदर अभिव्यक्ति

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  37. नज़्म अपने शुद्ध स्वरुप मे...धन्यवाद हर बार दिल छु लेने के लिए..:)

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