गुल्लक

बड़ा  ही असंतोषी और व्याकुल जीव है मानव...........ज़रा सा गतिरोध आया कहीं ,तो कहने लगेगा..."मेरी तो किस्मत खराब है"......"अरे मेरे साथ ही ऐसा क्यूँ होता है".......हे प्रभु! मुझसे क्या दुश्मनी है??....."मैंने किसी का क्या बिगाड़ा".....वगैरा वगैरा............बड़ी छोटी याददाश्त होती है हमारी...........एक तकलीफ सारे अच्छे दिनों का लेखा जोखा साफ़ कर देती है....सभी सुखद लम्हों को विस्मृत कर देती हैं...........क्यों ना हम याद रखें सिर्फ - मधुर  पल......मीठी बातें......चहकते दिन.......महकती रातें...... 

एक रोज मैं
खरीद लायी

मिटटी की वो गोल सी गुल्लक....
मेरे इस बचपने पर
घर में सब हंस पड़े.
मैंने उसे छुपा कर
रख दिया 
रसोई की दराज में..
और जब मन चाहे
उसमे डाल दिया करती हूँ
एक पर्ची...
जिसमे लिखा होता
"आज मै खुश हूँ.."

कभी जब मन उदास होगा
तब तोडूंगी
मधुर स्मृतियों से खनकते

इस गुल्लक को,
और फिर
करुँगी
अपनी खुशियों का हिसाब...
-अनु



Comments

  1. बहुत खूबसूरत भाव ......
    मन आंदोलित करता हुआ प्रभाव ...
    शुभकामनायें ...अनु जी ...

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  2. हमेशा खुश रहने की प्रेरणा देती हुई पोस्ट !
    बहुत खूबसूरत

    Learnings: भिखारी का धर्मसंकट

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  3. wow what an idea dear.....bahut sundar gahan bhaavabhivyakti....vaah

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  4. वाह .... गुल्लक का अभिनव प्रयोग

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  5. वाह!!!! अनुजी ....बहुत बड़ी बात कह गयीं ...बहुत बड़ा मंत्र दे दिया ......बहुत ही सुन्दर !!!!!

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  6. वाह! बहुत सुन्दर सन्देश अनु जी!
    बहुत शुभकामनाएं :)

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  7. क्‍या बात है ... इस विचार ने तो जाने कितनों को प्रेरित किया होगा ..

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  8. dua hai dher saari khushiyan samete Gullak ye aapki.. :)

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  9. Thank u for such a beautiful thought.

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  10. बड़ी सकारत्मक सोच !
    शुभकामनाएँ!

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  11. अरे वाह ये तो सही है ...

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  12. So innocent and lovely...
    यही तो करना चाहिए हमें!

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  13. बहुत खूबसूरत अंदाज़.. अच्छी लगी ..

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  14. इसी दर्शन में जीवन है। ऐसा जीवन ही दर्शन है।

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  15. यूँ ही भरता रहे आपकी खुशियों वाला गुल्लक . उसके आभामंडल से ही हम पाठक खुश हो लेंगे

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  16. ओह ! अद्भुत प्रयोग ..
    मैं भी ऐसा ही करूंगा

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  17. बहुत सार्थक सन्देश... गुल्लक रोज रोज भरे...शुभकामनाएँ.

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  18. कभी तोडूंगी
    इस गुल्लक को
    जब होगा दिल उदास
    और फिर
    करुँगी
    अपनी खुशियों का हिसाब...

    ये हुई न बात!:)


    सादर

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  19. खुशियों को समेटने के बजाय बांटते और खर्चते रहो...और मिलती जाएँगी !

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  20. खुश रहने के लिए सोच का सकात्मक होना ज़रूरी है ।
    बहुत अच्छा लिखा है । बधाई ।

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  21. गुल्‍लक के साथ यह प्रयोग भी खूब रहा। नई सोच है।

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  22. वाह! कया खूभ सुंदर बिम्ब का प्रयोग आपने किया है। गुल्लक तोड़ कर खुशियों का हिसाब ... !! बहुत पसंद आया।

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  23. मन खिल उठा पढ़कर...... यह हिसाब लगाना तो हमें भी सीखना है जी......

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  24. खुशियों के हिसाब का अच्छा तरीका सुझाया आपने...

    शुभकामनायें!

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  25. This totally made me smile :) We should always count our happiness and not sorrow. This was beautiful :)

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  26. bahut khub ! ek nayaab tarikaa sukh dukh ke hisaab kitaab ka .....dhanywaad

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  27. सकारात्मक सोच के साथ लिखी गयी सुंदर और आर्थ्पूर्ण प्रस्तुति.

    बधाई अनु...

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  28. सचमुच गुल्लक कठिन समय में बडा सम्बल देती है । ऐसी गुल्लक सबके पास होनी चाहिये

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  29. आपकी कविता पढकर स्पष्ट हुआ कि संत कबीर ने क्यों कहा होगा, कुछ लेना न देना, मगन रहना

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  30. प्रभावपूर्ण,बेहतरीन रचना !
    आभार !

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  31. प्रभावपूर्ण , बेहतरीन रचना !
    आभार !

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  32. ...what a great thought, Anu, and so beautifully expressed!
    (Your naughty remarks on my posts and these deep poems are two extreme ends of the same person...amazing!)

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  33. बिल्कुल ही अनूठी व सराहनीय कल्पना, वाह !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

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  34. oh! this is wonderful Anu! ye to kaamal kar diya.....it made my day. Congratulations!!

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  35. bahut acchhey se likha hai aapne....aksar log dukh k dino me apne khushi k palo ko bhul jatey hain... :)

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  36. कभी गुल्लक न तोड़ना पड़े और यूं ही बस गुल्लक भरता जाए |

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  37. खुशियों का हिसाब ही उदासी में काम आएगा !
    शानदार गुल्लक है आपकी !

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  38. बहुत खूबसूरत अहसास ....आपकी ,हमारी खुशियों की गुल्लक यूँ ही भतरी रहे :))))

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  39. बेहद ही सुंदर एहसासों से बढ़ गई मैं भी....खुशियों की गुल्लक सदा भारती रहे मेरी प्यारी अनु की :-) <3

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  40. wowwww.......mam aaj maine aapka sara blog padha..kuch posts baki rah gayi hai par unke liye bhi bahut jald waqt se samjhota kar hi lenge.....
    yupppp........kya bat hai aap bhi bilkul mere jaise kabhi-kabhar apne bachpan ko jee hi lete ho.......really m so happy....thank you anu mam...:-)))))))

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