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प्रेम- विवाह से पहले या बाद......

बदलते दौर में सब कुछ अलग सूरत अख्तियार करता जा रहा है.....यहाँ तक की भावनाएं भी बदल गयी हैं....सोच तो बदली ही है|
प्रेम जैसा स्थायी भाव भी कुछ बदला बदला लगने लगा है...

दैनिक भास्कर की पत्रिका अहा! ज़िन्दगी में प्रकाशित मेरी लिखी आवरण कथा आपके साथ साझा कर रही हूँ| उम्मीद है आपको पसंद आयेगी....
http://epaper.bhaskar.com/patna-city/patna-aha-zindagi/397/09012017/bihar/4/


अहा ! ज़िन्दगी

सितोलिया

बहुत दिनों से कविता या नज़्म लिखना जैसे बंद ही हो गया था.....कहानियाँ लिखते लिखते जैसे छंद रूठ गए हों मुझसे.....मन के सारे भाव गद्य बन कर ही निकलते....
मगर शायद मन को मनाना आता है......लिखी है एक कविता आज....
अच्छा लगा ब्लॉग पर आना भी.....


सितोलिया खेलने की उम्र थी
हाँ! तो?
खेल कर ही बिताई !!
पीले हाथों से रखती गयी
पत्थर के ऊपर पत्थर
अग्नि के हर फेरे का एक
जैसे सितोलिया के सात पत्थर|
खेल शुरू हुआ......
उम्मीद की एक गेंद पड़ी और बिखर गए सारे...
वो हाँफते दौड़ते भागते कोशिश करती उन्हें जमाने की...
जमा भी लेती.....
और जीत की घोषणा कर डालती
खुश होकर...
तभी एक और उम्मीद,कुछ और अपेक्षाएं.....
और एक और सीधी चोट
फिर से वही भागना दौड़ना और हांफना...
पत्थर पर पत्थर ज़माना....सितोलियाsss.....चिल्लाना.....
याने जीत की एक और घोषणा...
बस यूँही खेलते खेलते, तमगों को सहलाते उम्र गुज़रती है..........
और उसे लगता है वो जीत गयी !!

अनुलता

लड़कियाँ

+++++++++
हंसती हुई लड़कियों के भीतर
उगा होता है एक दरख़्त
उदासियों का,
जिनमें फलते हैं दर्द
बारों महीने...
और ठहरी हुई उदास आँखों वाली
लड़कियों के भीतर
बहता है एक चंचल झरना
मीठे पानी का...
आसमान की ओर तकती लड़कियों में
नहीं होती एक भी ख्वाहिश
एक भी उम्मीद ,
कि उसने नाप रखी है
अपने मन से
क्षितिज तक की दूरी....
और पलकें झुकाए
अंगूठे से ज़मीन कुरेदती लड़की
दरअसल
बुन रही होती है एक साथ
कई कई रूपहले सपने
मन ही मन में
गुपचुप गुपचुप|
सिले हुए होंठों वाली लड़कियां
गुनगुनाती हैं
नहीं सुनाई पड़ने वाले
एकाकी प्रेम गीत
जिन्हें वे खुद ही गुनती हैं, खुद ही सुनती है...
और सड़कों पर उतरीं
नारे लगाती,विरोध करती , चिल्लाती लड़कियां
होती हैं एकदम ख़ामोश !
इनके भीतर पसरा होता है एक निर्वात
कि उनकी आवाज़ कहीं तक पहुँचती नहीं !!
लड़कियां नायिकाएं नहीं होती....
कहानियों का सबसे झूठा किरदार होती हैं लड़कियां !!
~अनुलता ~

आप सभी के ब्लॉग पर अपनी अनुपस्थिति के लिए क्षमा चाहती हूँ....उम्मीद है अब इतने बड़े अंतराल न होंगे....

world book fair

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इस बार "विश्व पुस्तक मेला " देखने दिल्ली जाना हुआ.....
अपने पहले काव्य संग्रह "इश्क़ तुम्हें हो जाएगा "को प्रकाशक "हिन्दयुग्म" के स्टाल पर सजा हुआ देखने का अपना ही सुख था... कुछ प्रिय पाठकों  को हस्ताक्षरित प्रति देते समय जो अनुभूति हुई वो अविस्मर्णीय है!

काव्य संग्रह इन्फीबीम और अमेज़न में उपलब्ध है...

http://www.infibeam.com/Books/ishq-tumhen-ho-jayega-hindi-anulata-raj-nair/9789381394861.html

http://www.amazon.in/Ishq-Tumhen-Jayega-Anulata-Nair/dp/9381394865/ref=pd_rhf_pe_p_img_1

मेले में बहुत से ब्लॉगर और फेसबुक से जुड़े मित्रों से मिलना हुआ....साहित्यिक गतिविधियों का आनंद लिया |
अब अगले बरस के इंतज़ार में.....






"पेशावर"

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एक दर्द सा बहता आया है
कुछ चीखें उड़ती आयीं है
दहशत की सर्द हवाओं के संग
खून फिजां में छितराया है....

कुछ कोमल कोमल शाखें थीं
कुछ कलियाँ खिलती खुलती सीं
एक बाग़ को बंजर करने को
ये कौन दरिंदा आया है ?

हैरां हैं हम सुनने वाले
आसमान भी गुमसुम है,
कतरा कतरा है घायल
हर इक ज़र्रा घबराया है.....

टूटे दिल और सपने छलनी
इक खंजर पीठ पे भोंका है
घुट घुट बीतेंगी अब सदियाँ
ज़ख्म जो गहरा पाया है....

 11 जनवरी 2014 दैनिक भास्कर "रसरंग " में प्रकाशित
http://epaper.bhaskar.com/magazine/rasrang/211/11012015/mpcg/1/

मेरी कहानी - शिवकन्या 92.7 big fm पर

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सुनिये मेरी लिखी कहानी -" शिवकन्या " नीलेश मिश्रा की जादुई आवाज़ में........
:-)

just click the link.. आप मेरी लिखी सभी कहानियां you tube पर सुन सकते हैं ! मेरा नाम और यादों का इडियट बॉक्स सर्च करें बस :-)

यादों के इडियट बॉक्स में - मेरी लिखी कहानी "शिवकन्या "


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