इन्होने पढ़ा है मेरा जीवन...सो अब उसका हिस्सा हैं........

Saturday, July 21, 2012

मौत

भास्कर भूमि में प्रकशित २३/७/१२ http://bhaskarbhumi.com/epaper/index.php?d=2012-07-23&id=8&city=Rajnandgaon

मौत कितनी आसान होती
अगर हम जिस्म के साथ
दफ़न कर पाते
यादों को भी....
......................................................

मौत कुदरत का तोहफा है
ये मिटा देती है
सभी दर्द...
उसके, जो मरा है...
......................................................

मौत अकसर भ्रमित होती है.
आती है उनके पास
जो जीना चाहते हैं...
और उन्हें पहचानती नहीं
जो जी रहे हैं मुर्दों की तरह.
.................................................

मौत जब किसी
पाक रूह को ले जाती है...
तब ज़रूर उसे
जी कर देखती होगी....
...................................................

मौत से मुझे
डर नहीं लगता
उसे लगता है डर
मेरी मौत से...
...................................................

मौत  का दुःख
अकसर एक सा नहीं होता...
कौन मरा ?
कैसे मरा?
कब मरा?
पहले सब हिसाब किया जाता है....
.............................................................................
-अनु


73 comments:

  1. गहन विचार ...
    शुभकामनायें.

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  2. सोचने को मजबूर करती है आपकी यह रचना ! सादर !

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  3. भावपूर्ण, किंचित दार्शनिक!मगर ...
    मुगालता नहीं मुझे अपनी मौत का
    हम जिन्दा कहाँ हैं जो मर जायेगें? :-)

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  4. मौत ही हमें जीने की प्रेरणा देती है !

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  5. मौत कुदरत का तोहफा है...
    गहरी सच्चाई है इन शब्दों में.... शुभकामनायें

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  6. और उन्हें पहचानती नहीं
    जो जी रहे हैं मुर्दों की तरह

    कमाल है , बधाई एक संकलन लायक रचना के लिए अनु !

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  7. खूबसूरत रचना..गहन भाव...

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  8. गहन भाव..बहुत खूबसूरत रचना..

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  9. मौत जब किसी
    पाक रूह को ले जाती है...
    तब ज़रूर उसे
    जी कर देखती होगी....
    सशक्‍त भाव लिए उत्‍कृष्‍ट लेखन ... आभार

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  10. मौत आती है तभी नयी जिंदगी आती है..
    सभी बेहतरीन ,गहरे भाव लिए रचना
    :-)

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  11. मौत को बहुत दार्शनिक नज़रिये से देखा है .... मौत का दुख भी एक सा नहीं होता .... हिसाब लगाया जाता है .... वैसे भी लोग किसी के मरने पर कहाँ रोते हैं ....रोते हैं उसके न होने की स्थिति में आने वाले दुखों को सोच कर ...

    और एक बात दुख का अधिकार भी उनको ही होता है जिनको सारी सुविधाएं हैं दुख दिखाने की इस संदर्भ में मुझे हमेशा एक कहानी याद आती है जिसके लेखक राम चंद्र शुक्ल हैं ...दुख का अधिकार ....कभी अवसर मिले तो पढ़िएगा । वैसे शायद यह कहानी केन्द्रीय विद्यालय की छठी या सातवीं कक्षा में हिन्दी पाठ्य क्रम में पढ़ी भी होगी ।

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    1. संगीता दी को अपना केन्द्रीय विद्यालय याद आया .;)

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  12. वाह !
    आखिरी दो क्षणिकाओं में बेबाक सच्चाई बयाँ की है .

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  13. मौत से मुझे
    डर नहीं लगता
    उसे लगता है डर
    मेरी मौत से...

    ....................

    फकीर का चोला पहने शब्दों की बेहतरीन यात्रा ...

    कहीं कोई ग़ालिब... गुलज़ार और मीर...

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  14. मौत से मुझे
    डर नहीं लगता
    उसे लगता है डर
    मेरी मौत से...

    बहुत खूब ...
    मौत काफी खुबसूरत हो गयी है इन क्षणिकाओं में
    सही में मौत से क्या डरना .

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  15. Gostei muito..
    Obrigada sempre pela amavel visita...

    Com carinho...

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    1. and here is the english translation :-)

      "I really enjoyed ..
      Thank you always for the lovely visit ...
      With love ...

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  16. मौत को कई कोण से देख डाला आपने . किसी शायर ने ये भी तो कहा था की मौत महबूबा है और जिंदगी बेवफा है . भाई हम तो कहेंगे "मृत्युंमां अमृतं गमय ". .

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  17. कल 22/07/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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    Replies
    1. शुक्रिया यशवंत |

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  18. कवि की कल्पना ही तो है कि जिन्दगी ही नहीं जिन्दगी के बाद की भी सोचता है। आपकी इस कल्पना को सलाम !

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  19. मौत ... कई भाव , हर भाव में अर्थ ...

    मौत जब किसी
    पाक रूह को ले जाती है...
    तब ज़रूर उसे
    जी कर देखती होगी....

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  20. Uff Great !
    nice!
    heart touching words you had expressed "Expression".
    Really i like it ..

    Pls Visit My new post "Abla Kaoun"

    Shravan!

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  21. सुंदर बहुत सुंदर

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  22. मौत अकसर भ्रमित होती है.
    आती है उनके पास
    जो जीना चाहते हैं...
    और उन्हें पहचानती नहीं
    जो जी रहे हैं मुर्दों की तरह.
    बहुत सच्ची बात कही है ......

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  23. मौत के दुःख अलग अलग होते हैं ..सच है..बहुत गहराई से सोच डाला है मौत को :).
    मैडम जी अपना आई डी तो भेज दो कि कम से आपके शहर में आपसे संपर्क कर पायें :).

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  24. मौत तेरे रुप अनेक..बहुत भाव पूर्ण प्रस्तुति..

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  25. मौत जब किसी
    पाक रूह को ले जाती है...
    तब ज़रूर उसे
    जी कर देखती होगी

    I dont know what to say now... this is simply beautiful..
    cogratz :)

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  26. ~" 'मौत'....दो अक्षरों में समाई वो शय है...जो हमें पूरी ज़िंदगी का मतलब समझा जाती है...!"~
    बहुत सुंदर रचना अनु जी ! ख़ासकर 3rd stanza ! बहुत सही बात कही है !

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  27. मौत की आगोश में आकर भी जीवन से मुक्त नहीं हो पाता है मनुष्य...
    उसके कर्मों का लेखा जोखा दुनिया वाले जो रख रहे होते है...
    सुंदर रचना...
    सस्नेह

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  28. मौत से काहे का डरना
    मौत से पहले काहे का मरना ....
    बहुत खूब लिखा है मंजू जी ...
    शुभकामनाये आपकी लेखनी को !

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  29. जीवन का कटु सत्य है.... जिससे आपने अवगत कराया है....

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  30. मौत कुदरत का तोहफा है
    ये मिटा देती हैं
    सभी दर्द...
    उसके, जो मरा है...

    ये मिटा देती "है "/मिटा देती "हैं "है कर लें.
    बहुत बढ़िया विचार व्यंजना है .बधाई .

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    Replies
    1. done!!thanks for reading so precisely.

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  31. मौत तो एक दिन सबकी होनी ही है
    यह जानते हुए,मौत से क्यों डरना,,,,,

    बहुत सुंदर रचना,,,,,,

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  32. कोई मरता है , कोई नहीं रहता है , कोई अमर होता है |
    कोई रुला जाता है , कोई रोता छोड़ जाता है और कोई बस सिसकियाँ दे जाता है |
    सच कहा आपने , अलग अलग मौत और अलग अलग मातम |

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  33. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा आज रविवार के  चर्चा मंच  पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  34. मौत कुदरत का तोहफा है
    ये मिटा देती है
    सभी दर्द...
    उसके, जो मरा है...

    क्या बात कही है अनु जी. लेकिन यह तोहफा कबूल करने को लोग तैयार नहीं रहते बस.

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  35. मुखर व प्रखर अभिव्यक्ति ......काव्य की मर्म के साथ भवनिष्ठाता प्रशंसनीय है ....

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  36. मुखर व प्रखर अभिव्यक्ति ......काव्य की मर्म के साथ भवनिष्ठता प्रशंसनीय है ....

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  37. जिसकी किसी की याद नहीं आती
    उसे क्यों याद आप दिलाती हो
    हम जैसे डरपोक भी हैं यहाँ
    खाली में हमें क्यों डराती हो।
    वैसे अच्छी लिखी है बहुत "मौत"

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  38. बहुत प्रभावशाली पंक्तियाँ

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  39. बहुत सुन्दर..... मौत उन्हें पहचानती नहीं जो जी रहे हैं मुर्दों की तरह ....कहते हैं अच्छे इंसानों की उपर वाले को भी जरूरत होती है
    मौत ,मौत में फर्क करते हैं बहुत तीखा और अच्छा कटाक्ष किया है -----बहुत उम्दा प्रस्तुति

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  40. ये एक ऐसी हकीकत है जिसका किसी को भी इनकार नही है.आस्तिक और नास्तिक भी इस पर यकीन रखते हैं.
    ''मौत से किसकी यारी है ,आज इसकी तो कल उसकी बारी है...,,



    मोहब्बत नामा
    मास्टर्स टेक टिप्स

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  41. विषय तो है मौत... पर यह मौत अच्छी लगी ... उम्दा लिखा वाह

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  42. मौत पर काफी चिंतन किया गया है ..

    अच्‍छी अभिव्‍यक्ति भी !!

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  43. बहुत सुंदर ! मौत की सच्चाई से दो चार करवा दिया और वो सच जो शाश्वत है, जिससे कोई इनकार नहीं कर सकता है.

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  44. सुन्दर चिंतन.

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  45. सभी कशानिकाएं लाजवाब ...
    पर यादों को दफ़न करना आसान नहीं है .... जीते जी तो बिलकुल नहीं ...

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  46. मौत.....तेरी कहानी है निराली...

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  47. मौत जब किसी
    पाक रूह को ले जाती है...
    तब ज़रूर उसे
    जी कर देखती होगी....

    bauhat sunder....

    antim para mein bauhat hi teekhi sacchai likhi hai!!

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  48. अनु जी नमस्कार...
    आपके ब्लॉग 'my dreams & exprssions' से कविता भास्कर भूमि में प्रकाशित किए जा रहे है। आज 23 जुलाई 'मौत' शीर्षक के कविता को प्रकाशित किया गया है। इसे पढऩे के लिए bhaskarbhumi.com में जाकर ई पेपर में पेज नं. 8 ब्लॉगरी में देख सकते है।
    धन्यवाद
    फीचर प्रभारी
    नीति श्रीवास्तव

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  49. शुक्रिया नीति जी.
    आपकी और अतुल जी की आभारी हूँ.

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  50. Kya kamaal ka likha hai aapne!

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  51. मौत से तो वही डरते हैं जो जीना नहीं जानते।

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  52. मौत अकसर भ्रमित होती है.
    आती है उनके पास
    जो जीना चाहते हैं...
    और उन्हें पहचानती नहीं
    जो जी रहे हैं मुर्दों की तरह.

    ...लाज़वाब! सभी क्षणिकाएं अंतस को छू जाती हैं...बधाई

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  53. Time passes, and everyone's end does come sooner or later. We need to face it when it comes :)

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  54. अर्थपूर्ण क्षणिकाएं

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  55. मौत पर सभी क्षणिकाएँ बहुत भावपूर्ण है. ये बहुत ख़ास लगी...

    मौत जब किसी
    पाक रूह को ले जाती है...
    तब ज़रूर उसे
    जी कर देखती होगी....

    एक अलग सी आशा, मौत से भी... अति सुन्दर, बधाई.

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  56. Bahut sudnar rachna... jiwan ki bahut achi bethika...Sadhuwad.

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  57. मौत अकसर भ्रमित होती है.
    आती है उनके पास
    जो जीना चाहते हैं...
    और उन्हें पहचानती नहीं
    जो जी रहे हैं मुर्दों की तरह.
    bahut khubsurat panktiya hai anu ji....ek gehra baav or dard samete hue

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  58. मौत जब किसी
    पाक रूह को ले जाती है...
    तब ज़रूर उसे
    जी कर देखती होगी....
    बहुत सुन्दर

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  59. मौत अकसर भ्रमित होती है.
    आती है उनके पास
    जो जीना चाहते हैं...
    और उन्हें पहचानती नहीं
    जो जी रहे हैं मुर्दों की तरह.

    एक से बढ़कर एक....

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  60. "मौत अकसर भ्रमित होती है.
    आती है उनके पास
    जो जीना चाहते हैं...
    और उन्हें पहचानती नहीं
    जो जी रहे हैं मुर्दों की तरह."

    अच्छी क्षणिकाएँ हैं।

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  61. par mujhe maut se kyon lagta hai dar:)

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  62. निर्विकार भाव से यूँ मौत को देख पाना ..अद्भुत नजरिया है

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  63. निर्विकार भाव से यूँ मौत को देख पाना ..अद्भुत नजरिया है ..

    ReplyDelete

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