इन्होने पढ़ा है मेरा जीवन...सो अब उसका हिस्सा हैं........

Sunday, July 15, 2012

~~~~~~~~~ टैटू ~~~~~~~~


कितना अच्छा  किया था जो उस दिन मैंने अपने हाथ में तुम्हारी जगह अपने  ही नाम का टैटू गुदवा लिया था.....तुम चाहते थे मैं तुम्हारा नाम लिखवाऊं....और कायदा  भी वही है न.......मगर मैं भी तो अजीब हूँ ही......तुमने कहा मुझे पता है तुम क्या लिखवाओगी..मैंने पूछा अच्छा बताओ तो???? तुमने प्यार भरी आवाज़ में मुस्कुरा कर कहा,नहीं बताऊंगा...वो  जो मेरे दिल में है......बस मैंने भी अपना ही नाम लिखवा लिया....कि मैं ही तो हूँ तुम्हारे दिल में :-) [तुम्हारी वो सूरत अब भी याद है मुझे,तुम्हारी उस सूरत का टैटू मेरे ज़हन में बन गया था उस रोज.. ]
अच्छा सोचो,उस रोज गर तुम्हारा नाम गुदवा लेती तो आज तुम्हारे न होने पर वो नाम मैं कहाँ छुपाती.......तुम्हारे दिए हज़ारों ज़ख्मों की तरह उसको हटाने को क्या एक और ज़ख्म बनाती.......??????
यूँ भी कितनी चीज़ें हैं जो तुम्हारे न होने का एहसास कराती हैं.....या तुम कभी थे इसकी याद दिलाती हैं.....जब मोहब्बत नहीं तो मोहब्बत की ये निशानियाँ किस काम की......
सच्ची , तुम तो बेवफाई में अव्वल निकले थे.....मुझे यूँ निकाला अपनी ज़िन्दगी से जैसे अपनी मूंछ के सफ़ेद बाल उखाड फेंकते थे.....वो बाल तो फिर उग आते थे न वहीँ....उतने ही सफ़ेद.....मगर  सुनो...मैं नहीं वापस आने वाली......सच कहूँ तो तुमसे दूर होकर लगा कि तुम बिन जीना इतना भी मुश्किल नहीं है......तुम्हारी शुक्रगुजार हूँ कि तुमने मुझे मजबूत बना दिया.....नहीं जानती कि क्या करूंगी अपनी इस बाकी ज़िन्दगी का........शायद तुम्हारी यादों को भुलाते भुलाते ही कट जाए....

आज मैंने
एक वादा किया है
अपनी आँखों से..
एक वादा,
जो निभाना है मुझे
जब तलक बंधन है मेरा
मेरी साँसों से...
एक वादा,
कि कभी तुझे
रोने ना दूँगी.....
गर चोट लगेगी भीतर ..
तुझ पे जाहिर ना होने दूँगी ..
लाख सिसकता रहे दिल मेरा
कंपकपाते रहें लब..
मगर ऐ आँख!
मैं तुझको कभी
नम न होने दूँगी...

-अनु 


54 comments:

  1. बहुत खूबसूरत रचना !!
    ़़़़़़़़़़़़़़़

    दिल में गुदा हो नाम
    अपने को पता होता है
    टैटू माना की हाथ में
    खुदा होता है
    लोगों से छुपाया जाता है
    पर दिल का टैटू तो
    रोज सामने आता है।

    ReplyDelete
  2. बेहतरीन अंदाज़..... सुन्दर
    अभिव्यक्ति........

    ReplyDelete
  3. Lovely poem Anu ! Hope you had a great Sunday !

    ReplyDelete
  4. लाख सिसकता रहे दिल मेरा
    कंपकपाते रहें लब..
    मगर ऐ आँख!
    मैं तुझको कभी
    नम न होने दूँगी...
    बहुत सुंदर! -
    दिनेश

    ReplyDelete
  5. सुंदर अहसास,
    सुंदर अभिव्यक्ति ....
    हाँ, वादा मत भूलियेगा :)

    ReplyDelete
  6. लाख सिसकता रहे दिल मेरा
    कंपकपाते रहें लब..
    मगर ऐ आँख!
    मैं तुझको कभी
    नम न होने दूँगी...
    मन को छूते भाव... सुदर प्रस्तुति... आभार

    ReplyDelete
  7. Nice poem indeed :)
    http://garimazlifeblog.blogspot.in/

    ReplyDelete
  8. Beh gaye main aapki rachna main..Ghar men akela tha to jor jor se padha aapko...aur antim panktiyon men hoth kapkapa gaye..:( thoda aur padhta to ro padta...Maaf kariyega par mai kehena chahta hun...Jindagi ko kisi ka mohotaaj mat banaiye.

    ReplyDelete
  9. सही किया आपने , ऐसे बेवफा लोगों के कारण ही तो टेम्परेरी टैटू का चलन हुआ होगा . और ऐसे के लिए रोना क्या , रोये आपके दुश्मन .

    ReplyDelete
  10. वाह:बहुत सुन्दर अंदाज में प्यारी सी अभिव्यक्ति..बहुत सुन्दर .अनु..

    ReplyDelete
  11. कितना दर्द है अनु आपकी रचना में ....पढ़ते पढ़ते ही मन उदास हो गया ...!!ऐसे भी लोग होते हैं ....सोच रही हूँ ...!!क्या कहूँ .......बस इतना.. की बहुत दर्द भारी रचना लिखी है आज आपने ...!!
    मन उदास कर गयी ...!!

    ReplyDelete
  12. Dil ko choo gaye. Bahut sahi likha hai aapne...

    ReplyDelete
  13. वाह!!टैटु से अपना ही नाम लिखवाने का आइडिया अच्छा है...with valid reason:)
    आँखें नम न करने की दृढ़ इच्छाशक्ति...बहुत खूब !!
    सस्नेह

    ReplyDelete
  14. उसे भुलाने का वादा करके दरअसल आप उसे ही याद कर रही हैं....फिर भी,शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  15. मगर ऐ आँख!
    मैं तुझको कभी
    नम न होने दूँगी...

    वाह!

    सादर

    ReplyDelete
  16. Once again it touched my heart...hope you get the courage to face all this...
    bless you :)

    ReplyDelete
  17. नामुमकिन सा वादा..वाह! उम्दा...

    ReplyDelete
  18. उस रोज गर तुम्हारा नाम गुदवा लेती तो आज तुम्हारे न होने पर वो नाम मैं कहाँ छुपाती.......तुम्हारे दिए हज़ारों ज़ख्मों की तरह उसको हटाने को क्या एक और ज़ख्म बनाती.......??????
    निःशब्द कर दिया

    ReplyDelete
  19. इतना साहस,धैर्य और विवेक हो भीतर,तो आंख नम होने की नौबत ही न आए।

    ReplyDelete
  20. पुरानी यादें , मुलाकातें , हसीं बातें --अक्सर सोने नहीं देती .
    सुन्दर रचना .

    ReplyDelete
  21. तुम्हारे दिए हज़ारों ज़ख्मों की तरह उसको हटाने को क्या एक और ज़ख्म बनाती.......??????
    मन को छूते भाव ... आभार इस उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति के लिए

    ReplyDelete
  22. भावविभोर करती रचना...

    ReplyDelete
  23. ये उसके नाम का टैटू तो वाकई बेकार की बात है :)
    पर कविता सुन्दर है आपकी .

    ReplyDelete
  24. बहुत सुंदर----anu ji

    ReplyDelete
  25. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार (17-07-2012) को चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    ReplyDelete
    Replies
    1. शुक्रिया शास्त्री जी

      Delete
  26. बहुत सुन्दर है अनु जी, अति उत्तम.

    ReplyDelete
  27. उन्हें भुलाने की कोशिश भी ...
    याद करने का इक बहाना है ???

    ReplyDelete
  28. नि:शब्द करती रचना .... <3

    ReplyDelete
  29. अनु जी,
    बहुत सुन्दर रचना।
    सच कहुँ दिल को छु गईं पंक्तियाँ।
    बहुत ही सरल भाव से दर्शाया है आपने।
    ढेर सारी शुभकामनायें।
    प्रतीक संचेती

    ReplyDelete
  30. क्या करें दिलचस्पी ख़त्म हो जाती है पर लगाव बचा रहता है.
    कभी हम भी तुम भी आशना तुम्हे याद हो के ना हो
    सच के करीब रचना निसंदेह

    ReplyDelete
  31. अनु.....टैटू गुदवाना सच में दर्द ही देता है..पहले गदवाते वक्त ..फिर बेवफाई के बाद....वैसे भी जो मन पर छपा होता है वो कभी न कभी तो आंखों को नम कर ही देता है....

    ReplyDelete
  32. मैं तुझको कभी
    नम न होने दूँगी...
    मन को छूते भाव... सुदर प्रस्तुति... आभार

    ReplyDelete
  33. इस तरह की प्रतिज्ञा जब दृढ़ हो जाती है, जीवन जीना सरल हो जाता है।

    ReplyDelete
  34. Request you to please add the follow by email widget so that people like me can follow you by email.
    This might add to the already big fan following of yours but this would also make the readers get regular updates from you !!!
    Thanks for sharing a wonderful poetic blog !

    ReplyDelete
  35. Vah bahut acche...Anu ji..

    be a great warrior in your life..
    God bless you ..

    ReplyDelete
  36. तुम्हें बहलाने की कोशिशें भी
    अब नाकाम हो गईं हैं .....

    अनु जी दुआएं हैं ....:))

    ReplyDelete
  37. बेहतरीन अभिव्यक्ति.....

    ReplyDelete
  38. मगर ऐ आँख!
    मैं तुझको कभी
    नम न होने दूँगी...

    अनु जी,
    बहुत सुन्दर, बहुत ही भावुक रचना सच में।

    ReplyDelete
  39. प्रेम और इतनी बेरुखी ...
    भावनान में बहना आसान है पर हकीकत में ऐसा वादा निभाना संभव है क्या ... खुद से पूछना फिर बताना ... चायद ये इ आसान न होगा ...

    ReplyDelete
  40. nice one ...
    there are things which has memories attached with them...

    ReplyDelete
  41. अच्छी रचना...
    शुभकामनाएं!!

    पढ़ते-पढ़ते

    ReplyDelete
  42. बहुत ठीक किया है ,
    सीने का दर्द छिपाया है ,
    उनके लिए जिन्हें चाक करते
    देर न लगी ....

    ReplyDelete
  43. बहुत निजी.

    ReplyDelete
  44. I loved it Anu..very,very beautiful:) beyond words indeed!

    ReplyDelete
  45. Wada poora zaroor karna, very nice :)

    ReplyDelete
  46. gr8,.i read it many times and each time i felt the pain. beautifully said

    ReplyDelete
  47. touched my heart...........really very nice :) :)

    ReplyDelete
  48. पहला पैराग्राफ बहुत सुन्दर है |

    सादर

    ReplyDelete

नए पुराने मौसम

मौसम अपने संक्रमण काल में है|धीरे धीरे बादलों में पानी जमा हो रहा है पर बरसने को तैयार नहीं...शायद उनकी आसमान से यारी छूट नहीं रही ! मोह...