इन्होने पढ़ा है मेरा जीवन...सो अब उसका हिस्सा हैं........

Tuesday, June 19, 2012

गुड़ सी जिंदगी !!!

जिंदगी अच्छी हो या बुरी...छोटी हो या बड़ी......जीते सब हैं.....किसी तरह गुज़ार भी देते हैं.....कोई हँसते हँसते ,कोई रोते बिसूरते....
अब जिंदगी से शिकायत कैसे न हो....तरह तरह के खेल जो खेलती हैं......
काश कि जिंदगी 
हरसिंगार/प्यार,
चाँद/तारा,
हरी घांस/नदी,
खुशबु/गीत,
पंछी/आकाश,
इन्द्रधनुष/गुलमोहर,
हंसी/खुशी .................................यानि एक कविता की तरह होती......बहती एक प्रवाह में...लयबद्ध......
आखिर है क्या जिन्दगी????

यूँ  कभी तितली सी मिलती है जिंदगी
दामन में ढेरों तारे,सिलती है जिंदगी.


दे दी जो ज़माने ने,कड़वाहट गर हमें
तब जुबां पे गुड़ सी घुलती है जिंदगी.


जो कर चले इस पर,भूले से हम यकीं
धूप में बारिश सा छलती है जिंदगी.


साथ हो अगर कोई,प्यारा सा हमसफ़र
थम जाती और रुक-रुक चलती है जिंदगी.


हर दिन नया सवेरा,नयी राह है यहाँ
कभी दौड़ती,गिरती,सम्हालती है जिंदगी.


शतरंज की बिसात पर बिछे  तुम और हम
जब चाहे शह और मात देती है जिंदगी.

काँच का खिलौना होता है दिल सनम
गर टूटा तो बच्चे सा मचलती है जिंदगी.

(so handle with care...its your life.)
-अनु 



58 comments:

  1. waah bahut sundar anu ji anand se man bhar gaya pyari si rachna
    शतरंज की बिसात पर बिछे तुम और हम
    जब चाहे शय और मात देती है जिंदगी.

    काँच का खिलौना होता है दिल सनम
    गर टूटा तो बच्चे सा मचलती है जिंदगी.............bahut sundar har sher badiya , bahut acchi lagi aapki rachna .badhai

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  2. काँच का खिलौना होता है दिल सनम
    गर टूटा तो बच्चे सा मचलती है जिंदगी.
    वाह ... बहुत खूब .. आभार

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  3. jabardast..zindagi ki jabardast paribhasha :)...jaane kitne tukde hain is zindagi ke..jo chubhte hain ab aankhon men....

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  4. काँच का खिलौना होता है दिल सनम
    गर टूटा तो बच्चे सा मचलती है जिंदगी.

    वाह ,,,, बहुत खूबशूरत सुंदर गजल, के लिये बधाई,,,,

    RECENT POST ,,,,फुहार....: न जाने क्यों,

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  5. जिन्दगी का सुंदर फलसफ़ा......

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  6. ...बिना दर्द के न कोई कविता है और न ज़िन्दगी !

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  7. गुड ! वेरी गुड !!
    गुड़ सी मीठी कविता !

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  8. शतरंज की बिसात पर बिछे तुम और हम
    जब चाहे शय और मात देती है जिंदगी.

    बेहतरीन पंक्तियाँ।

    सादर

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  9. रचे जिंदगी पर खरे, सुन्दर सुन्दर शेर |
    अनुकृति हर इक शेर है, आँखें रहे तरेर |
    आँखें रहे तरेर, बड़े बब्बर है सारे |
    दिखलाते सौ रंग, जिन्दगी सही सँवारे |
    बाधाएं भी ढेर, प्यार से करो बंदगी |
    गुड़ बारिश शतरंज, प्रेम ही रचे जिंदगी |

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  10. बहुत खूब .....

    ज़िंदगी मय का जाम है
    जो कुछ पल
    छलक कर
    खाली हो जाता है
    ****
    ज़िंदगी
    दिन का शोर है
    जो
    रात की खामोशी में
    डूब जाता है
    *******

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  11. फिर से चर्चा मंच पर, रविकर का उत्साह |

    साजे सुन्दर लिंक सब, बैठ ताकता राह ||

    --

    बुधवारीय चर्चा मंच

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    1. शुक्रिया रविकर जी...और आभार सुन्दर टिप्पणी के लिए.

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  12. कल 20/06/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


    बहुत मुश्किल सा दौर है ये

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    1. शुक्रिया सदा.

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  13. Handle with care..indeed. Sadly, sometimes, life doesnt give a second chance.

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  14. सुंदर ....हर रोज़ नया रंग दिखाती है ज़िंदगी ....!!

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  15. अच्छी परिभाषा है जिंदगी की..एक गीत आया ..१०० ग्राम जिंदगी है संभाल कर खर्चनी है.

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  16. sach me aisa hi hona chahiye .....par jaisa bhi ho use jeena hi to jindgi hai....

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  17. बहुत अच्छी रचना ... शुभकामनाएँ ...

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  18. कमाल की रचना

    कितने ही धूप छाँव
    दिखाती जाती है जिन्दगी
    पास रहकर भी
    पकड़ में आती नहीं है जिन्दगी

    मैंने भी ठीक लिखा नः)

    सस्नेह

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    Replies
    1. बहुत सुन्दर ऋता जी...
      शुक्रिया

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  19. कमाल का लिखती हैं आप।
    बहुत ही ताज़े बिम्बों से सजाया है आपने ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव को। गुड़ सी घुलती है -- बिम्ब मुझे बेहद पसंद आया। और बस इतना कहना है
    जीवन एक नाटक है। यदि हम इसके कथानक को समझ लें तो सदैव प्रसन्‍न रह सकते हैं।

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  20. शेर अच्छे हैं.... अच्छी रचना

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  21. (so handle with care...its your life.)
    -ये बड़ा स्वीट सा लगा!! :)

    बाकी सभी शेर तो शानदार है..नो वर्ड्स!! :)

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  22. यूँ कभी तितली सी मिलती है जिंदगी
    दामन में ढेरों तारे,सिलती है जिंदगी.
    तब जुबां पे गुड़ सी घुलती है जिंदगी.

    Yes it must be handled with care.
    रेत सी है जिंदगी
    फिसलती जा रही है,
    मीठी है
    पर कुल्फी पिघलती जा रही है।

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  23. हर दिन नया सवेरा, नई राह है यहाँ
    कभी दौड़ती,गिरती,सम्हालती है जिंदगी ,

    कभी धूप है तो कभी छाँव है यहाँ
    मत पकड़ो हाथ से फिसल जाती है जिंदगी !
    बहुत सुंदर जीवन दर्शन है अनु आपकी रचना में,

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  24. शतरंज की बिसात पर बिछे तुम और हम
    जब चाहे शय और मात देती है जिंदगी.. फिर अगली बिसात बिछाते हैं हम

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  25. मनोज जी सहमत , जिंदगी के रंग , आपकी लेखनी के सँग.. और अब एक गुस्ताखी - मुझे लगता है शह और मात होता है , तो शायद सुधार की गुजाइश है .

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    1. आशीष जी....गुंजाइश हमेशा रहती है सुधार की.
      शुक्रिया ध्यान दिलाने के लिए :-)

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    2. हा हा , सही कहा आपने . अभी अभी किनारे खड़े होकर देखा मैंने की आपके शहर की जीवन धारा बड़ा ताल सूख रहा है . इश्वर से प्रार्थना है की वो भी सुधार पर ध्यान दे .

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  26. ग़ज़ल के बोल मतला ही नहीं मक्ता और शेष सभी शैर भी काबिले दाद हैं .विरोधाभास अलंकार से सज्जित है पूरी ग़ज़ल धूप में बारिश सा छलती है ज़िन्दगी शह और मात का खेल रोज़ -ब- रोज़ खेलती है ज़िन्दगी . अच्छी प्रस्तुति .कृपया यहाँ भी पधारें -


    बुधवार, 20 जून 2012
    क्या गड़बड़ है साहब चीनी में
    क्या गड़बड़ है साहब चीनी में
    http://veerubhai1947.blogspot.in/

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  27. सच है जिन्दगी हर रोज मात और शय का खेल खेलती. है..क्या खूब कहा अनु..बहुत सुन्दर..

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  28. बेहतरीन प्रस्तुति...सच में ज़िंदगी एक शतरंज का खेल ही है...

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  29. यूँ कभी तितली सी मिलती है जिंदगी
    दामन में ढेरों तारे, सिलती है जिंदगी.

    सलमे सितारे जड़ने का आपका शौक माशा अल्लाह!

    साथ हो अगर कोई,प्यारा सा हमसफ़र
    थम जाती और रुक-रुक चलती है जिंदगी.

    सच्चा चलना सही तो हैं जो किसी के इंतज़ार को मोहलतें दे।

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  30. अनु जी!
    इजाजत हो तो आपके दो शेर कुछ ऐसे पढ़ डालूं

    हर दिन नया सवेरा, नयी राह है यहां,
    दौड़ती गिरती कभी संभलती जिन्दगी।

    शतरंज की बिसात में हम तुम बिछे हुए,
    शह मात को जब चाहती,बदलती जिन्दगी।

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    Replies
    1. बहुत खूब....

      शुक्रिया.

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    2. डा0 रामकुमार जी का संशोधन अच्छा लगा।

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  31. अंजुरी में भरे तर्पण के जल सी है ये जिंदगी
    जो रिसता है बूंद बूंद नीचे कि ओर बहुत सुन्दर रचना

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  32. जिंदगी के अलग अलग आयामों कों लिखा है हर शेर में ...
    पर जैसी भी है जिंदगी खूबसूरत है ...

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  33. हर दिन नया सवेरा,नयी राह है यहाँ
    कभी दौड़ती,गिरती,सम्हालती है जिंदगी.


    शतरंज की बिसात पर बिछे तुम और हम
    जब चाहे शह और मात देती है जिंदगी.

    जिंदगी का सही वर्णन । बहुत सुंदर रचना ।

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  34. शतरंज की बिसात पर बिछे तुम और हम
    जब चाहे शह और मात देती है जिंदगी.

    जिंदगी की अनिश्चितता कुछ भी करने में सक्षम है....

    सुंदर प्रस्तुति.

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  35. Life is beautifully defined in this soft n subtle creation...

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  36. एक मधुर अहसास में डूबी हुई रचना मन को छू रही है .

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  37. सुलझी नहीं है ज़िंदगी,परिभाषा से कभी
    सुख-दुख को जो संभाले,उसी की जिंदगी

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  38. बहुत सुन्दर
    शानदार रचना...
    :-)

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  39. कांच का खिलौना होता है, दिल सनम !
    गर टूटा तो बच्चे सी मचलती है जिंदगी !

    प्रभावशाली रचना ...
    बधाई !

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  40. वाह अनुजी ......सच कहा ....बहुत सहेज के रखेंगे इसे .....

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  41. बेहद खूबसूरत ग़ज़ल अनुजी!
    बहुत शुभकामनाएं
    p.s.
    Dr. Ramkumar ji ki tarz par meri bhi iccha hui kuchh kehne ki.. agya chahta hun..

    लाख आयें आंधी तूफ़ान यहाँ पे,
    हर हाल में सजती-संवरती है ज़िन्दगी! :)

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  42. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    पर भी पधारेँ।

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  43. शतरंज की बिसात पर बिछे तुम और हम
    जब चाहे शह और मात देती है जिंदगी......!!बहुत बढ़िया अनुजी.बहुत बढ़िया.....

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  44. जिन्दगी के कई मायने देखे थे, कुछ अपने कुछ गैरों के....
    एक आपका भी देखा...... अच्छा लगा....
    यूँ ही शब्दों का प्रवाह जारी रखिये....
    शुभकामनाएँ....... :)

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  45. बेहतरीन। ज़िंदगी की पेचीदगियों को करीब से महसूस किया है आपने अपनी ग़ज़ल में।

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  46. बहुत सुंदर अनु ! ज़िंदगी के अनेकों रूप हैं.... बहुत खूबसूरत चित्रण किया तुमने ! :)
    ~कभी सातवें आसमान पर खिलखिलाती...
    कभी किसी गढ़े में सहमी सी मिलती है ज़िंदगी...~
    <3

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  47. दे दी जो ज़माने ने,कड़वाहट गर हमें
    तब जुबां पे गुड़ सी घुलती है जिंदगी.....बेहद खुबसूरत जिंदगी....

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  48. जिन्दगी का इतना सुन्दर चित्रण कि आँसू आ गए , सच है ....
    शतरंज की बिसात पर बिछे तुम और हम ..... बहुत सुन्दर रचना ।

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  49. जिन्दगी का इतना सुन्दर चित्रण कि आँसू आ गए , सच है ....
    शतरंज की बिसात पर बिछे तुम और हम ..... बहुत सुन्दर रचना ।

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