महामुक्ति

हे प्रभु! 
मुक्त करो मुझे
मेरे अहंकार से.
दे दो कष्ट अनेक
जिससे बह जाये
अहं मेरा
अश्रुओं की धार से....


मुक्ति दो मुझे
जीवन की आपधापी से
बावला कर दो मुझे
बिसरा दूँ सबको...
सूझे ना कुछ मुझे..
सिवा तेरे..


डाल दो बेडियाँ
मेरे पांव में..
कुछ अवरोध  लगे
इस  द्रुतगामी जीवन पर..
और दे दो मुझे तुम पंख...
कि मैं उड़ कर
पहुँच सकूँ तुम तक...


शांत करो ये अनबुझ क्षुधा
ये लालसा,मोह माया..
छीन लो सब
जो 'मेरा' है
आँखों को स्वप्न से रीता कर दो..
जिससे मैं भर लूँ
तुम्हें अपने नैनों में
धर लूँ ह्रदय में..


हे प्रभु!
मन चैतन्य कर दो..
मुझे अपने होने का 
बोध करा दो..
मुझे मुक्त करा दो.... 


-अनु 

Comments

  1. हे प्रभु!
    मन चैतन्य कर दो..
    मुझे अपने होने का
    बोध करा दो..
    मुझे मुक्त करा दो....
    भावमय शब्‍द संयोजन .. .बहुत बढिया

    ReplyDelete
  2. सुन्दर भावमयी अर्चना....

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  3. आज भक्तिरस ..अच्छा लगा यह भी.

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  4. हे प्रभु!
    मन चैतन्य कर दो..
    मुझे अपने होने का
    बोध करा दो..
    मुझे मुक्त करा दो....

    बहुत सुंदर प्रस्तुति,,,बेहतरीन भावपूर्ण प्रार्थना ,,,,,

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  5. ...या तो बेडियाँ मांग लो
    या फिर पंख लगवा लो...
    प्रभु को असमंजस में काहे डालती हो बालिके ...?

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    Replies
    1. बालिके को नसीहतें देने वाले -
      हे स्वामी -
      पैर से तैरना है क्या ?
      उड़ना है तो पंख से ही उड़ लेगी बालिका ||
      सादर वंदना
      महाप्रभु की ||

      Delete
  6. आंसुओं की धार से उद्धार चाहे, इक्स्प्रेषन गजब ।

    याद हरदम आपकी सुधबुध भुलाए, इक्स्प्रेषन गजब ।

    पैर में हों बेड़ियाँ अवरोध आये तेज गति में-

    दो पंख दे दो ताकि तेरे पास आयें , इक्स्प्रेषन गजब ।।

    लालसा यह मोह माया भूख सारी छीन लो

    रीते नयन में ताकि तुमको बसायें, इक्स्प्रेषन गजब।।

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    Replies
    1. शुक्रिया रविकर जी ,

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  7. मोह माया के जाल से मुक्त योगी या भुक्त भोगी--- हर काम की एक उम्र होती है .
    वर्ना सब नित्यानंद बन जायेंगे .
    रचना सुन्दर भावयुक्त है.

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  8. Nice poem and beautiful image of gateway to heaven !

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  9. --भाव व ग्यान सौन्दर्यमय काव्य...

    ------सत्य ही अहन्कार व जीवन की आपाधापी, अति-भौतिकता से मुक्त होकर ही मन चैतन्य होता है और हदय मे प्रभु का बास होपाता है....

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  10. सुंदर भाव...
    प्रभु के प्रति अगाध आस्था...
    भक्तिमय रचना अनु...बहुत पसंद आई|

    सस्नेह

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  11. aaj pahli bar aapke blog par dastak di. sachmuch ek se badhakar ek rachanayen hain...
    itna hi kahna chahunga ki sachmuch blog ka sheershak hi aapke bare me poori jankari de deta hai...
    dil ki gaharaiyon se nikali in rachanaon ko padhakar ajeeb si anubhuti hoti hai'''

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  12. कहा न -
    नहीं हो सकते मुक्त
    जब तक हो खामोश
    जीतने की प्रखरता हो
    और हो हार स्वीकार
    .... नहीं हो सकते मुक्त
    सत्य असत्य का फर्क मालूम है
    पर हों जुबां पर ताले
    नहीं हो सकते मुक्त

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  13. बहुत सुंदर !!!!!

    प्रभू से हो कोई जुगाड़ अगर
    मेरे को भी मुक्त करवाना
    पैसे की चिंता मत करना
    पचास प्रतिशत मेरे नाम
    पर खर्च कर ले जाना ।

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  14. कैसे हों मुक्त
    हमने
    खुद ही डाल रखी है
    माया - मोह की बेड़ियाँ
    करना होगा
    खुद से खुद को मुक्त

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  15. मुक्ति की राह यहीं कहीं है ..

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  16. आपका प्यारा सा चिट्ठा
    "ब्लॉगोदय"
    एग्रीगेटर मे जोड़ दिया गया है, शुभकामनाएं।।

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  17. मुक्ति के लिए इश्वर से अनोखे अंदाज में प्रार्थना प्रशंसनीय लगी . अनुपम अगोचर शुभ परात्पर इश्वर अव्यक्त है वो ., जरुर सुनेंगे

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  18. हे प्रभु!
    मन चैतन्य कर दो..
    मुझे अपने होने का
    बोध करा दो..
    मुझे मुक्त करा दो.... इस छटपटाहट से मुक्ति कहा ???????

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  19. ..आमीन।
    .सुंदर भाव हैं इस कविता में।

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  20. जीवन की ऊहापोह और मुक्त होने की आकांक्षा ...
    बहुत सुंदर भाव पिरोए आज की रचना मे ....!!

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  21. हे प्रभु!
    मुक्त करो मुझे
    मेरे अहंकार से.
    दे दो कष्ट अनेक
    जिससे बह जाये
    अहं मेरा
    अश्रुओं की धार से...

    यह अश्रु भी बहुत है अहंकार को बहाने के लिये !
    आज बिलकुल भक्ति रस में डूबी रचना लग रही है
    सुंदर रचना !

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  22. आपके ब्लॉग की चर्चा। यहाँ है, कृपया अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराएं

    शुभकामनाएं


    मिलिए सुतनुका देवदासी और देवदीन रुपदक्ष से रामगढ में

    जहाँ रचा गया महाकाव्य मेघदूत।

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  23. हे प्रभु!
    मुक्त करो मुझे
    मेरे अहंकार से.
    दे दो कष्ट अनेक
    जिससे बह जाये
    अहं मेरा
    अश्रुओं की धार से....

    awesome...

    .

    ReplyDelete
  24. हे प्रभु!
    मुक्त करो मुझे
    मेरे अहंकार से.
    दे दो कष्ट अनेक
    जिससे बह जाये
    अहं मेरा
    अश्रुओं की धार से....
    .........................
    I have no Words to say... Speechless...
    खुद के अहंकार को ख़त्म करने की अनोखी गुज़ारिश.... अक्सर मैं बिना कमेन्ट किया चला जाता हूँ लेकिन आज नहीं जा सका.... बेहतरीन....

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  25. सुंदर प्रार्थना! शुभकामनायें!

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  26. aapne bahut hi rachna likhi hai .
    par is maya -jaal se chhotkaara to tabhi milega jab prabhu chahenge.
    kyon ye jivan unhone hame jeene ke liye hi diya na ki unse bhagne ke liye----
    bahut hi badhiyapost
    badhai
    poonam

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  27. बहोत अच्छी रचना है.

    :) (:
    धन्यवाद

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  28. माया-मोह भी प्रभु की ही सृष्टि का एक अंग है, फिर उससे पलायन कैसा ?
    कविता के आध्यात्मिक भाव मन को प्रभावित करते हैं।
    इस सुंदर रचना के लिए बधाई।

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  29. स्वयं से परिचित होने और स्वयं में ही ठहर जाने की इच्छा सनातन है. बहुत सुंदर कविता.

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  30. Apki har post mujhe sochne pe majbur kar deti h....gehri rachna anu ji.....

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  31. बहुत अच्छी रचना ...आभार

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  32. भावपूर्ण प्रार्थना के लिए बधाई..

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  33. अनु जी,अलग विषय.अलग तराह. सुन्दर अनुभूति.

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  34. itna moh bhang achcha nahin..maaya me bhi reh lo praani....

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  35. कुछ कुछ ऐसी ही प्रार्थना मेरी भी है!

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