इन्होने पढ़ा है मेरा जीवन...सो अब उसका हिस्सा हैं........

Sunday, May 27, 2012

ज़िद- जीने की

कभी जब ह्रदय आहत हो....चोट खा-खा कर परास्त हो गया हो .....वेदना असह्य हो चली  हो......नियति के आगे आत्मसमर्पण कर दिया हो.....अपमानित सा जीवन जी कर अहम् हाहाकार कर रहा हो......तब अकसर एक दोराहा आता है-
या तो इहलीला समाप्त कर ली जाये ताकि कष्टों पर पूर्ण विराम लग जाये.
या फिर मन हठ कर ले जीवन जीते जाने की.....जीवन से टकराने की.......

और ऐसे में कविता जन्म लेती है.....        

साँसों का बस हो आलंबन
ह्रदय में बाकि एक स्पंदन
पीकर बेशक कड़वे आँसूं
ज़िद है बस मुस्काने की
    और जीते जाने की..........

भले ठूंठ सा हो ये जीवन
पुष्पहीन हो चाहे यौवन
कर सिंचित स्नेह से बगिया
ज़िद है फूल खिलाने की
     और जीते जाने की..........

मन वीणा के तार हों टूटे
बेसुर से कोई स्वर जो फूटें
कर के एक अनवरत साधना
ज़िद है सुर में गाने की
        और जीते जाने की.........

हो चाहे अन्धकार घनेरा
जीवन पथ भूतों का डेरा
राह करूँ रोशन ,खुद जल कर
ज़िद है मंजिल पाने की
        और जीते जाने की..........

-अनु 
"ह्रदय तारों का स्पंदन"
साहित्य प्रेमी संघ के तत्वाधान में प्रकाशित "ह्रदय तारों का स्पंदन"'का विमोचन हुआ है|मैं भी इस संकलन का हिस्सा हूँ|इसमें ३० कवियों की  कृतियाँ  शामिल है|
इस लिंक पर आकर अपना बहुमूल्य मत प्रकट कर अनुगृहित करें|
आभार.

40 comments:

  1. साँसों का बस हो आलंबन
    ह्रदय में बाकि एक स्पंदन
    पीकर बेशक कड़वे आँसूं
    ज़िद है बस मुस्काने की
    और जीते जाने की...........very nice expression ......

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  2. फूलों भरे रास्ते छिन जाएँ तो क्या जाना छोड़ देना चाहिए...
    नहीं न...उसकी यह जिद कइयों के लिए प्रेरणा साबित हो सकती है...
    यदि ऐसा हुआ तो उसकी जिद सफल है...

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  3. आशा संचार करती
    विश्वास जगाती..
    अति सुन्दर रचना.....:-)

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  4. Very nice post.....
    Aabhar!

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  5. हो चाहे अन्धकार घनेरा
    जीवन पथ भूतों का डेरा
    राह करूँ रोशन ,खुद जल कर
    ज़िद है मंजिल पाने की
    और जीते जाने की......

    आशा का यह दीप सदा रौशन रहे।
    प्रशंसनीय कविता।

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  6. bahoot khub surat Jidd hai ...........

    मलाल नहीं कुछ भी ए जिंदगी ..
    सुबह भी तू शाम भी तू जिंदगी
    रेत की तरेह फिसलती हाथों से
    फिर भी बड़ी अपनी सी तू जिंदगी ...

    क्या हुआ हलाक पल दो पल हुए ..
    उमीदों के रंगों से भरी तू जिंदगी ..
    कागज़ के टुकड़ों में भले कटे ...
    दे तो जाती है मुसकराहटे जिंदगी ...

    बंजर जमीं कभी तो कभी लहलहाती है ..
    मासूम चेहरों से गिरेह शिकन काट जाती है ..
    सुखी सांसों में भी रंगों की उमंग बांध जाती है ...
    रोज़ बहती है संग घटती मचलती यह जिंदगी ..

    दायरों में कहाँ सिमटती कहाँ मुठीओं में भिचती ..
    यह तो बहती धारा है संग तेरे संग मेरे पिघलती ......
    चलो तुम भी संग हो लो एहबाब से सूनेपन को धकेलो ..
    सांसों में जीने का रंग भर के जिंदगी के साथ जिंदगी खेलो ...............

    विनय ..... २७/०५/२०१२

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  7. जीत जानी जिद ही आपकी सबसे बड़ी जीत है...!

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  8. प्रभावशाली और सशक्त प्रस्तुति । आभार ।

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  9. इस गीत से उर्जा मिलती है। बहुत बढ़िया।

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  10. हो चाहे अन्धकार घनेरा
    जीवन पथ भूतों का डेरा
    राह करूँ रोशन ,खुद जल कर
    ज़िद है मंजिल पाने की
    और जीते जाने की..........

    ....नव विश्वास जगाती एक उत्कृष्ट प्रस्तुति...

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  11. हो कितना भी गहरा नैराश्य भाव , जिजीविषा बिखर ना पाए
    स्फुलिंग, इस विद्रूप जड़ता का , कही और प्रखर ना हो जाये

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  12. राह करूँ रोशन ,खुद जल कर
    ज़िद है मंजिल पाने की
    और जीते जाने की.........

    दृढ़ निश्चय से भरी ....
    सुंदर रचना ...!!
    बहुत सुंदर ...!!

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  13. Bahut hi sundar...
    Bar-bar man karta hai padne ko...

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  14. निराशा में आशा की किरण है यह रचना ।

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  15. जब तक जीवन है,तभी तक सब कुछ। मरने के बाद कौन जाने क्या हो।

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  16. Haalaat aandhi ki tarah hote hain...ghaans rahe to apne saath uda le jaayenge...ped hona padta hai..sakht aur saghan...bahut sundar rachna

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  17. हो चाहे अन्धकार घनेरा
    जीवन पथ भूतों का डेरा
    राह करूँ रोशन ,खुद जल कर
    ज़िद है मंजिल पाने की
    और जीते जाने की..........
    प्रेरणात्‍मक पंक्तियां ... उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति।

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  18. साँसों का बस हो आलंबन
    ह्रदय में बाकि एक स्पंदन
    पीकर बेशक कड़वे आँसूं
    ज़िद है बस मुस्काने की
    और जीते जाने की..........
    सुंदर प्रस्तुति,,,,,

    RECENT POST ,,,,, काव्यान्जलि ,,,,, ऐ हवा महक ले आ,,,,,

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  19. बेहद प्रभावित और प्रेरित करती प्रस्तुति...
    बहुत सुन्दर,

    कुँवर जी,

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  20. बहुत ही बेहतरीन लिखा है आपने और बहुत ही सुन्दर रचना.....आभार !

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  21. jeetane ki zid aur rah ko roshan karna.....jeevan ke prati sakaaratmak soch liye bahut sundar rchna ..... sarthak sandesh deti hui ....

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  22. गिर के खड़े हो जाने का हौसला जुटाना ,सौल्लास रहना लय ताल बनाए रहना बड़ी बात है और सबसे बड़ी बात है सकारात्मक रहना निगेटिव थाट जीवन को दीमक लगा देता है बेसुरा कर देता है जीवन को परिवेश को पूरे के पूरे को .. बहुत बढ़िया रचना है -
    और यहाँ भी दखल देंवें -

    सोमवार, 28 मई 2012
    क्रोनिक फटीग सिंड्रोम का नतीजा है ये ब्रेन फोगीनेसऔर

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  23. ये जिद ही तो जीत है..और हर हाल में जीतना है..

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  24. The determination expressed in the creation is quite motivating.

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  25. सन्देश देती सार्थक रचना, बधाई.

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  26. इस तरह की ज़िद और यह जज़्बा जी सफलता दिलाते हैं।

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  27. सकारात्मक सोच देती कविता ..

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  28. हो चाहे अन्धकार घनेरा
    जीवन पथ भूतों का डेरा
    राह करूँ रोशन ,खुद जल कर
    ज़िद है मंजिल पाने की
    और जीते जाने की..

    खुबसूरत चाह जहाँ विस्तार अनंत तक ........

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  29. सुंदर रचना....
    सादर।

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  30. अच्छी लगी ये कविता। बधाई संकलन का हिस्सा बनने की।

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  31. जिद है रेगिस्तान के वीराने में हरियाली उगाने की.....

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  32. वाह!!खूबसूरत!!बहुत ही पोजिटिव और इंस्पायर करने वाली कविता है!!!

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  33. जीवन के हर मोड़ पर यह ज़िद सदा यूं ही बनी रहे ...प्रेरणा देती सार्थक भाव अभिव्यक्ति...

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