इन्होने पढ़ा है मेरा जीवन...सो अब उसका हिस्सा हैं........

Wednesday, May 9, 2012

नागफनी

आँगन में देखो
जाने कहाँ से उग आई है 
ये नागफनी....
मैंने तो बोया था 
तुम्हारी यादों का 
हरसिंगार....
और रोपे थे 
तुम्हारे स्नेह के
गुलमोहर.....
डाले थे बीज 
तुम्हारी खुशबु वाले
केवड़े के.....
कलमें लगाई थीं
तुम्हारी बातों से 
महके  मोगरे की.......


मगर तुम्हारे नेह के बदरा जो नहीं बरसे.....
बंजर हुई मैं......
नागफनी हुई मैं.....
देखो मुझ में काटें निकल आये हैं....
चुभती हूँ मैं भी.....
मानों भरा हो भीतर कोई विष .....


आओ ना ,
आलिंगन करो मेरा.....
भिगो दो मुझे,
करो स्नेह  की अमृत वर्षा...
सो अंकुर फूटें 
पनप जाऊं मैं  
और लिपट जाऊं तुमसे....
महकती ,फूलती
जूही की बेल की तरह...
आओ ना...
और मेरे तन के काँटों को
फूल कर दो.....


-अनु 




46 comments:

  1. अनुपम भाव संयो‍जन ...लिए बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत ही खुबसूरत |
      आभार |

      क्या आप भी कुछ मुफ्त में लेना चाहेगे ? तो मेरे नए ब्लॉग पर आप कुछ भी ले सकते है, वो भी बिलकुल ही मुफ्त (फ्री) में
      Free Every Stuff :
      How To Get Free Stuff Today???

      Delete
  2. बढ़िया प्रस्तुतीकरण |
    आभार |

    ReplyDelete
  3. नेह की बारिश खिला दे अंतर्मन!
    सुन्दर अभिव्यक्ति!

    ReplyDelete
  4. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    की ओर से शुभकामनाएँ।

    ReplyDelete
  5. जीवन की सच्चाई के साथ एक रोमांटिक कविता

    ReplyDelete
  6. मगर तुम्हारे नेह के बदरा जो नहीं बरसे.....
    बंजर हुई मैं......
    नागफनी हुई मैं.....
    देखो मुझ में काटें निकल आये हैं....
    चुभती हूँ मैं भी.....
    मानों भरा हो भीतर कोई विष .....

    मब के अह्सासो की भावपूर्ण सुंदर प्रस्तुति,..

    my recent post....काव्यान्जलि ...: कभी कभी.....

    ReplyDelete
  7. गज़ब गज़ब गज़ब ..बेहतरीन प्रस्तुति मनोभावों की और सच्ची भी.

    ReplyDelete
  8. वाह! बहुत खुबसूरत एहसास पिरोये है अपने......

    ReplyDelete
  9. यह रचना स्नेह से हमें भी भिगो गयी अनु जी...... क्या उपमा दी है आपने ? वाह ! मौलिक और दिलकश रचना के लिए आभार !

    ReplyDelete
  10. बेहतरीन प्रस्तुति

    ReplyDelete
  11. देखो मुझ में काटें निकल आये हैं....
    चुभती हूँ मैं भी.....
    मानों भरा हो भीतर कोई विष

    Anu ji bahut hi sundar bhaon ke sath prabhavshali rachana likhi hai apne ...saprem abhar.

    ReplyDelete
  12. नागफनी के दंश नहीं जाते ...

    ReplyDelete
  13. आओ ना...
    और मेरे तन के काँटों को
    फूल कर दो.....

    Waah.... Behtreen Khayal

    ReplyDelete
  14. नागफणी ऐसा पौधा है जो जल विहीन जगह की विशेषता लिए रहता है। नेह की बूंद बरसे तो ऐसे पौधों से छुटकारा मिले।

    ReplyDelete
  15. बढ़िया अभिव्यक्ति अनु...
    शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  16. मगर तुम्हारे नेह के बदरा जो नहीं बरसे.....
    बंजर हुई मैं......
    नागफनी हुई मैं.....

    खूबसूरती से लिखे एहसास ....

    ReplyDelete
  17. क्या बात है !!!
    इसे पढ़कर नागफनी के काँटे झड़ जाएँगे...
    जूही का सुगंध आपके जीवन में फैले अनु...
    शुभकामनाएँ !!!

    ReplyDelete
  18. Another gem of a poem from you !

    ReplyDelete
  19. वाह... बहुत खूबसूरती से मनोभावों को व्यक्त किया है... सुन्दर रचना... शुभकामनाएं

    ReplyDelete
  20. bahut sundar anu.... naagfani mein bhi fool khilte hai

    ReplyDelete
  21. विपरीत परिस्थितयों में भी फूल खिलाती है नागफनी .
    आखिर उसने भी जीना सीख लिया है .

    सुन्दर भावपूर्ण रचना .

    ReplyDelete
  22. बहुत ही प्यारी भाव पूर्ण रचना नेह की वर्षा के बिना नागफनी ही उगेगी और क्या अति सुन्दर

    ReplyDelete
  23. बढ़िया अभिव्यक्ति...
    बहुत ही बेहतरीन है .......

    ReplyDelete
  24. कैक्टस और नागफनी की खासियत है...बंजर इलाके में भी जम जाता है...यही इसकी जिजीविषा है...कैक्टस में फूल भी लगते हैं...पर शायद रात में...कोई देख नहीं पाता...

    ReplyDelete
  25. dear sister...i wanted you to give your personal email id. i personally think that you have realised the real face of life and it is to suffer. you are ready to evolve and know the things that you dont know now.and hence i wanted to share some teachings with you.

    ReplyDelete
    Replies
    1. आदरणीय बंधु
      thanks for ur concern, but u just don't worry about my "condition"...i'm having a perfect life full of happiness......these are my poems/writings which i pick from my surroundings.....
      so chill..........
      regards
      anu

      Delete
  26. बहुत ही खूबसूरत कविता |अनु जी बधाई और शुभकामनायें |

    ReplyDelete
  27. कितनी टीस भरी है हर पंक्ति में ! बहुत ही प्यारी रचना है अनु जी ! बधाई स्वीकार करें !

    ReplyDelete
  28. नेह बिना सब सूना सूना...सुंदर !

    ReplyDelete
  29. मैंने तो बोया था
    तुम्हारी यादों का
    हरसिंगार....

    अनु जी अनुपम रचना है ये

    ReplyDelete
  30. बहुत सुन्दर भाव...सुन्दर अभिव्यक्ति!....आभार!

    ReplyDelete
  31. बहुत सुंदर शब्दयोजन .....
    सुंदर रचना !

    ReplyDelete
  32. प्रेम पाकर सृष्टि भी पल्लवित होती है। प्रेमिल मन का का तो कहना ही क्या!

    ReplyDelete
  33. बिना प्रेम के कांटे है जीवन ...
    सच लिखा है ...!!

    ReplyDelete
  34. कल 012/05/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .

    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  35. बहुत..सुन्दर अहसास ..अनु..

    ReplyDelete
  36. वाह क्या कहें इस रचना की तारीफ में ...

    बहुत बहुत बहुत ही बेहतरीन अभिव्यक्ति ...

    ReplyDelete
  37. शयद वो इमानदारी न थी उनकी यादों में ... नेह की कमी थी ...
    बहुत गहरे एहसास लिए रचना ...

    ReplyDelete
  38. सुन्दर भाव.. अति सुन्दर अभिव्यक्ति ...

    ReplyDelete
  39. Bahut bahut sunder rachnayein. Aapko hardik badhai mitravar. Ishvar aapki lekhni ko yash dein...yahi kamna hai.

    ReplyDelete
  40. Sundar....har baar ki tarah.... :)

    ReplyDelete
  41. जूही की सुगंध और नागफनी के काँटे .... क्या बात !!!

    ReplyDelete

नए पुराने मौसम

मौसम अपने संक्रमण काल में है|धीरे धीरे बादलों में पानी जमा हो रहा है पर बरसने को तैयार नहीं...शायद उनकी आसमान से यारी छूट नहीं रही ! मोह...