इन्होने पढ़ा है मेरा जीवन...सो अब उसका हिस्सा हैं........

Monday, May 14, 2012

चुगलखोर पन्ने

डायरियां बड़ी चुगलखोर होतीं हैं................
जब आप लिखते हैं तो भावनाओं का ज्वार उठा होता है........और आप लिख डालते हैं वो सब कुछ जो शायद आप किसी से कह नहीं सकते......बस कलम चलती जाती हैं और दिल का खाका खिचता जाता है कोरे कागज़ पर.......
बड़ा आनंद आता है किसी पुरानी डायरी को पढ़ने में........फिर चाहे वो हमारी अपनी हो या हमारे किसी अपने की या फिर किसी अनजाने की/किसी पराये की.........
जैसे कि आप पढते हैं मेरी डायरी के पन्ने.......जबकि जानते  नहीं मुझे.....पहचानते भी नहीं.......और शायद जानना चाहते भी नहीं....मगर पढ़ तो लेते ही हैं.......मैंने भी पढ़ी हैं डायरियां चोरी से........जब जिसकी हाथ लगी........बड़े राज़ खोलते है ये पन्ने.....
कोई पराया शायद चाहता हो आपको दिलो जान से........या आपका कोई करीबी आपकी सूरत भी ना देखना चाहता हो......बड़ा रिस्क है डायरी पढ़ने में.


डायरियां समेटे रहतीं  हैं 
प्यार के पल/तकरार के पल...
पहली मुलाक़ात
या जुदाई की रात....
मोहब्ब्त के रंग 
और नफरत के ढंग....
इनमे होता है 
मनुहार/इकरार
करार/इंकार
या कभी 
स्वीकार और अंगीकार.....
या फिर कुछ नहीं.....
सब फरार........
डायरी होती है 
गिरगिट की तरह.....
रंग बदलती...
स्वांग रचती....
कभी ख्वाब बुनती
कभी किरचें चुनती.......
हर सफहा 
होता है दिल का आईना....
हर लफ्ज़ 
रूह की फरियाद..........


-अनु 


नोट- कभी किसी चाहने वाले की डायरी न पढ़ना......क्या पता कोई भरम ही  टूट  जाये.

47 comments:

  1. डायरी अर्थात् मन की तस्वीर....
    वह सहेजती है सब कुछ...
    तोड़ती कुछ भ्रम भी...

    बहुत सुंदर प्रस्तुति अनु जी
    सप्रेम

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  2. aekdam shi lokha hae aapne .bdhai.

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  3. ये अंत में बड़ी प्यारी सलाह दे गयी आपकी नोट:)
    कुछ भ्रम बने रहे यही अच्छा होता है!

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  4. डायरी होती है,सच्चा आइना !

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  5. नोट- कभी किसी चाहने वाले की डायरी न पढ़ना......क्या पता कोई भरम ही टूट जाये.

    शायद इसीलिए शिष्ठाचार वश कहते होंगे किसी की डायरी नहीं पढना !
    अच्छी लगी रचना !

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  6. हर लफ्ज़
    रूह की फरियाद.........
    बिल्‍कुल सच

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  7. हम्म डायरी मित्र भी है और चुगलखोर भी :).
    सुन्दर अभिव्यक्ति.

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  8. हर सफहा
    होता है दिल का आईना....
    हर लफ्ज़
    रूह की फरियाद..........

    ....बहुत ख़ूबसूरत पंक्तियां ....बेहतरीन रचना...

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  9. इसीलिए मैंने डायरी लिखना बन्द कर दिया ...

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  10. kyaa baat hai Anu...kitna kuchh kah dala hai aapne in chand lines mein...'reference' ne to bas kamaal hi kar diya...

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  11. बढ़िया पन्ने-
    बधाई ||

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  12. बहुत सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति, बेहतरीन रचना.
    कभी किसी चाहने वाले की डायरी न पढ़ना.........बिल्‍कुल सच

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  13. Diary is the best way to express our self... bohot aacha topic post kia...loved it...

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  14. मेरी डायरी ...किसी के हाँथ पड़ गई थी ...सब कह दिया उसने बस तबसे लिखा ही नहीं

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  15. हर सफहा
    होता है दिल का आईना....
    हर लफ्ज़
    रूह की फरियाद..........

    डायरी मन का पन्ना होती है,
    अति सुंदर भाव पुर्ण अभिव्यक्ति ,...

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  16. अब तो ब्लॉग को ही डायरी बना डाला है हमने....Smiles...

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  17. अगर किसी के हाथ न लगे तो डायरी से अच्छा मित्र कोई नहीं।
    बहुत बढि़या कविता।

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  18. डायरी तो आईना है ..
    यथारूप दिखाने की आदत है इसको शायद

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  19. चुगलखोर डायरी किसी को रिझाती है तो किसी को खिझाती है . आपकी सलाह एकदम खरे सोने की तरह .

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  20. बहुत बढ़िया । मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा ।धन्यवाद ।

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  21. सुन्दर प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

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  22. bhaut hi khubsurat alfaazo me apne dayari ki baat kah di....

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  23. बहुत रिस्की है डायरी .....:)
    सुंदर प्रस्तुति ....!!
    शुभकामनायें .

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  24. हर सफहा होता है दिल का आईना,
    हर लफ्ज़ रूह की फरियाद!
    चुगलखोर कहाँ? सखी है वो, सबसे ख़ास... जिसे सबकुछ बता सकते हैं :)
    बहुत सुन्दर अनु जी,
    सादर|

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  25. डायरियों को पढ़ने का अपना ही आनंद होता है

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  26. कभी ख्वाब बुनती
    कभी किरचें चुनती.......

    वाह कितनी खूबसूरत बात कही है अनुजी ........जब दूसरे के मन का सच उजागर होता है ......तो कुछ ऐसा ही अहसास होता है ....!!!!!

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  27. लेकिन फिर भी डायरियां सच बोलती हैं....

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  28. बेहतरीन कविता और अंत मे आपने अच्छा सुझाव दिया है।

    सादर

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  29. सचमुच डायरी दिल का दस्तावेज होती है । बहुत सुन्दर कविता ।

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  30. डायरी लेखन एक कला है |अच्छी रचना |
    आशा

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  31. सुन्दर प्रस्तुति

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  32. अनकहे,अज्ञात के प्रति मनुष्य सदा से जिज्ञासु रहा है। औरों की डायरी के प्रति आकर्षण इसी का सहज परिणाम है। मैं इसीलिए लिखता ही नहीं। जानते रहो!

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  33. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
    :-)

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  34. डायरी होती है
    गिरगिट की तरह.....
    रंग बदलती...
    स्वांग रचती....
    कभी ख्वाब बुनती
    कभी किरचें चुनती.......
    हर सफहा
    होता है दिल का आईना....
    हर लफ्ज़
    रूह की फरियाद..........

    एकदम सच बात कही....

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  35. न जाने कितनी बार लिख के काटा था ,मिटाया था नाम उनका ,डायरी पे | नाम लिखते थे ,फिर उनपे उंगलियाँ फेरते थे | नाम से भी प्यार सा हो गया था ,उनके | एक बार डायरी लग गई उन्हीं के हाथ ,पर अफ़सोस वो उन कटे नामों को पढ़ न सके और मेरी ज़िन्दगी की डायरी में वो नाम कटा ही रह गया |

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    1. वाह अमित जी............
      क्या एहसास हैं...........बहुत सुंदर और कोमल...
      सादर

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  36. डायरी का फायदा ये है...कि कभी भविष्य में आत्मकथा लिखने में मदद मिल जाएगी...हर जिंदगी की अपनी अलग कहानी है...

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  37. इस चुगलखोर से कभी नाता नहीं जोड़ा .... हाँ किसी की डायरी पढ़ी ज़रूर थी .... सच ही जीवन के अनछुए पहलू खोल देती है डायरी ....


    नोट- कभी किसी चाहने वाले की डायरी न पढ़ना......क्या पता कोई भरम ही टूट जाये.

    यह सलाह गांठ बांध ली है :):) वैसे अब भ्रम को बचा ही क्या है :):)

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  38. एक सच्ची धरोहर 'डायरी'............

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  39. राज राज ही रहे...
    सुंदर रचना... सचेत भी करती हुई....
    सादर।

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  40. Beautifully written ode to diary. The note loads the poem with further meaning, nearly insidious in intent!

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  41. सबसे गूढ़ बात तो आपने आखिरी में बताई...कभी किसी चाहने वाले की डायरी न पढ़ना......क्या पता कोई भरम ही टूट जाये..

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  42. Kuch mithaas aur kuch ahsaas :)

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  43. बड़ी प्यारी पोस्ट. दूसरे की डायरी पढना अच्छी बात नहीं है.

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  44. आपके लिखने का अंदाज़ मुझे अच्छा लगा
    और लिखिए हम और पढेंगे आपकी open diary को

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