तुम गये नहीं अब तक !!!





मोहब्बत भी अजीब शय है..........एक बार जो हो गयी सो हो गयी........किसी शख्स को जिंदगी से निकाला जा सकता है मगर एहसासों को नहीं.......वो तो दिल की दीवारों पर चिपक के रह जाते हैं...........खुरच के निकालेंगे तो जो दर्द होगा वो कहाँ सह पायेंगे........

पुराने किसी गीत को सुन कर
कहीं खो जाना...
किसी फूल के खिलने पर 
यूँ ही मुस्कुराना...
बारिश में भिगो के पलकें 
अश्कों को छिपाना...
बेमौके ही तक-तक आईना
आँखों में काजल सजाना...
किसी भीनी सी आती खुशबू पर
चौंक कर पलट जाना !
तू है तो सही अब भी
मुझ में,
मेरे आस पास....
हर सू ....
सोचती हूँ 
के तुझको भुलाऊं कैसे ?
बिना खुद मिटे, 
तेरा वजूद मिटाऊं कैसे ??
-अनु 

Comments

  1. आमंत्रित सादर करे, मित्रों चर्चा मंच |

    करे निवेदन आपसे, समय दीजिये रंच ||

    --

    शुक्रवारीय चर्चा मंच |

    ReplyDelete
    Replies
    1. शुक्रिया रविकर जी.

      Delete
  2. भुलाऊं तुझको कैसे ?
    बिना खुद मिटे,
    तेरा वजूद मिटाऊं कैसे ??
    बहुत सही ... अनुपम भाव संयोजित किए हैं आपने ...आभार

    ReplyDelete
  3. बिना खुद मिटे,
    तेरा वजूद मिटाऊं कैसे ??

    प्रेम के दर्द से भरे ...प्रेम रस में पेज ...सुंदर ...खूबसूरत एहसास ...
    बहुत सुंदर अभिव्यक्ती ...!!
    शुभकामनायें ...अनु जी ..!

    ReplyDelete
  4. हर सूं....
    भुलाऊं तुझको कैसे ?
    बिना खुद मिटे,
    तेरा वजूद मिटाऊं कैसे,,,,,,,

    बहुत सुंदर रचना,..अच्छी प्रस्तुत,,,,,,,,,

    MY RECENT POSTफुहार....: बदनसीबी,.....

    ReplyDelete
  5. भूलने के बहाने कुछ ज्यादा ही याद आती है ... सुंदर अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  6. मुझमें तू है तुझसे पार पाऊं कैसे...
    सुन्दर अभिव्यक्ति.

    ReplyDelete
  7. बस गई एक बस्ती है , स्मृतियों की इसी ह्रदय में
    नक्षत्र लोक फैला है , जैसे इस नील निलय में

    ReplyDelete
  8. सच है यादें भूलाए नहीं भूलती. है अनु..सुन्दर अभिव्यक्ति..

    ReplyDelete
  9. कुछ दिनों पहले ट्वीट भी किया था:
    मोहब्बत भी कमाल की चीज़ है..
    जिसे ना हो, उसे इसपर विश्वास ही नहीं होता..
    और जिसे हो जाए..
    उसे किसी और पर विश्वास नहीं होता.. :)

    ReplyDelete
  10. बारिश में भिगो के पलकें
    अश्कों को छिपाना...
    बेमौके ही तक-तक,आईना
    आँखों में काजल सजाना...

    bahut sundar Anu ji! Shubhkaamnayen!

    ReplyDelete
  11. मोहब्बत के हावी होने पर हम बाकी दुनिया से कट जाते हैं .कई बार ऐसा होना अच्छा लगता है !

    ReplyDelete
  12. अनु जी,
    पूर्व में हुई चर्चा के अनुसार आपके ब्लॉग से कुछ लेख को अपने दैनिक समचार पत्र भास्कर भूमि में प्रकाशित किया है। अखबार का प्रतियां आप तक भेजना चाहते है। आप अपने घर की पता भेजने की कृपा करे.......
    bhaskar.bhumi.rjn@gmail.com

    भास्कर भूमि का ई पेपर देखें......www.bhaskarbhumi.com

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया सर
      :-)

      Delete
  13. ....भुलाऊं तुझको कैसे ?
    बिना खुद मिटे,
    तेरा वजूद मिटाऊं कैसे ??

    सुन्दर अभिव्यक्ति..
    सादर

    ReplyDelete
  14. बहुत ही खूबसूरत कविता |

    ReplyDelete
  15. बिना खुद मिटे,
    तेरा वजूद मिटाऊं कैसे ??
    वाह ! बहुत खूब ।

    यादें भी जीने का सहारा होती हैं ।

    ReplyDelete
  16. बिना खुद मिटे,
    तेरा वजूद मिटाऊं कैसे ??


    बहुत खूब ... वजूद जब वजूद से रूबरू होता है तो यही होता है

    ReplyDelete
  17. कोमल भाव युक्त सुन्दर ,अति सुन्दर रचना.....
    :-)

    ReplyDelete
  18. भुलाऊं तुझको कैसे ?
    बिना खुद मिटे,
    तेरा वजूद मिटाऊं कैसे ??

    ....बहुत खूब ! कहाँ मुक्त हो पाते हैं यादों के बंधन से....

    ReplyDelete
  19. भुलाऊं तुझको कैसे ?
    बिना खुद मिटे,
    तेरा वजूद मिटाऊं कैसे .......aasan nahi hai bhulana.....

    ReplyDelete
  20. जो है उसे भुलाना कैसा !

    ReplyDelete
  21. तू है तो सही अब भी....
    मुझ में,
    मेरे आस पास....
    हर सूं....
    भुलाऊं तुझको कैसे ?
    बिना खुद मिटे,
    तेरा वजूद मिटाऊं कैसे ??

    bahut sundar abhivayakti ke sath dil ko chhune wali rachna !

    ReplyDelete
  22. वाह ! सीधे आपके दिल से निकल कर सबके दिल तक पहुँचती हुई भावनाओं के लिए शब्द भी कम पर जाते हैं..

    ReplyDelete
  23. बहुत सुन्दर ...

    ReplyDelete
  24. ...is se sundar nahi likha ja sakta..!

    ReplyDelete
  25. नहीं हो सकता ...जो हर सांस में वाबस्ता हो ...वह तो साँसों के साथ ही दूर पायेगा ....सांसें नहीं तो वह नहीं ......उससे पहले तो हर आह...हर हंसी में वह शरीक़ होगा

    ReplyDelete
  26. तेरा वजूद मिटाऊं कैसे ??
    बहुत खूब बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  27. बढ़िया अभिव्यक्ति....

    ReplyDelete
  28. खुद को खो कर ही दूसरे का वजूद मिटता है...दीवानगी का ये फलसफा बहुत खूब है...

    ReplyDelete
  29. मुझ में,
    मेरे आस पास....
    हर सूं....
    भुलाऊं तुझको कैसे ?
    बिना खुद मिटे,
    तेरा वजूद मिटाऊं कैसे ??

    Sach Kaha.....

    ReplyDelete
  30. bbaton ko jitna bhulane ki koshish karo....wo utna hi gehra asar chhod jati he....

    ReplyDelete
  31. बिना खुद मिटे,
    तेरा वजूद मिटाऊं कैसे ??bahut badhiya ....

    ReplyDelete
  32. jindagi ke aaspass ...... bahut sundar rachna !

    ReplyDelete
  33. jindagi ke aaspass ......... bahut sundar rachna !

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

प्रेमपत्र

मेरी लिखी कहानी "स्नेहा" - 92.7 big fm पर नीलेश मिश्रा की जादुई आवाज़ में................

दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में मेरी किताब "इश्क तुम्हें हो जाएगा " की समीक्षा...............