इश्क

कल रात
चाँद यूँ ठहरा
मेरे पहलु  में आकर
जैसे आया हो
कभी न जाने के लिए...

मैं
चाँद
और मोहब्बत...
बंद कर लिए किवाड़ हमने
कभी न खोलने के लिए....

कसमें खायीं
चाँद ने मेरी,
मैंने चाँद की
मोहब्बत ने
मेरी और  चाँद की भी.
कसमें..
कभी न तोड़ने के लिए...

आखिर दिल क्या चाहता है ?
सच्चा  इश्क ? ?
याने-

चाँद रात
नर्म  लहजा
जज़्बात
करीबियां
और  चंद झूठी कसमें !!

-अनु



Comments

  1. चाँद रात
    नर्म लहजा
    जज़्बात
    करीबियां
    और चंद झूठी कसमें......
    ताकि भ्रांति बनी रहे ..
    वाह सुन्दर !

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  2. तुम्हारी तमन्ना को पूरी कर देता ये चाँद ,
    पर उसने जो वादा अमावस से कर रखा था !

    बेतरीन भावपूर्ण रचना!

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  3. चाँद रात
    नर्म लहजा
    जज़्बात
    करीबियां
    और चंद झूठी कसमें.
    वाह ... बहुत खूब।

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  4. Hmmm.. chand jhoonthi kasamein bhi behad zaruri.. muhabbat ki khuraak sa kaam deti hain

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  5. अगर कसमें झूठी हैं, तो प्यार सच्चा कैसे हो गया?... :)

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    1. This comment has been removed by the author.

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    2. दिल भरमाया रहता है गायत्री जी.क्या सच क्या झूठ ,कौन जाने..

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  6. झूठी कसमें क्यों ? वैसे ज़िंदगी भ्रम में ही गुज़र जाती है ...

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  7. dil ko kitna behlate hai ham... behatreen :-)

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  8. और चंद झूठी कसमें......
    आन्नद तो उसमें भी है ....
    कौन सब कसमें सच्चे ही होते हैं ...........

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  9. बेचारा चाँद ..किस किसको संभाले, धरती पर देखे या चांदनी को निहारे :).
    बहुत सुन्दर कविता है.

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  10. बहुत अद्भुत अहसास...सुन्दर प्रस्तुति .

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  11. झूठा चंदा खा रहा, जहाँ व्यर्थ सी कौल ।

    वहीँ चांदनी दे जमा, वहीँ पीठ पर धौल ।

    वहीँ पीठ पर धौल, छला था नारि गौतमी ।

    कभी नहीं बन सका, शकल से सही आदमी ।

    छुपते छुपे छुपाय, छकाये छली अनूठा ।

    धीरे शकल दिखाय, बनाए बातें झूठा ।।

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    Replies
    1. बहुत सुन्दर रविकर जी...
      आभार आपका.

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  12. उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  13. मैं
    चाँद
    और मोहब्बत...
    बंद कर लिए किवाड़ हमने
    कभी न खोलने के लिए....
    yah khyaal hi rumani hai ....bhrm hai zindagi fir bhi jeena hai bahut behtreen

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  14. चाँद रात
    नर्म लहजा
    जज़्बात
    करीबियां
    और चंद झूठी कसमें
    Bahut hi sundar Anu di... <3

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  15. बहुत ही सुन्दर और भावपूर्ण कविता पढ़ने को मिली |आभार

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  16. बहुत प्यारी रचना...
    चाँद,चाँदनी, जज्बात असली है
    वादे तो झूठे ही अच्छे होते हैं|
    सस्नेह

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  17. हर दिन बदलने वाले चाँद की कसमों का भी क्या भरोसा.. इसीलिये हमारे यहाँ अटूट रिश्तों के लिए ध्रुव-तारे को साक्षी बनाया जाता है!!
    कविता के भाव बहुत अच्छे हैं, अनु बहन!!

    ReplyDelete
  18. मोहब्बत कसमों की मोहताज़ नहीं
    ग़र सच्चा इश्क है तुझे मुझसे
    थोडा ऐतबार रख
    यूँ बेएतबार ना कर
    बहुत सुन्दर...

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  19. झूठी क़समें खाने से जिस वातावरण का सृजन इस कविता में किया गया है उसमें चार चांद लग गए हैं।

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  20. आखिर दिल क्या चाहता है ?
    सच्चा इश्क ? ?
    ha yahi to chahta hai dil.....nadan jo thahra ...par sacche dil se chahi gai tammana puri bhi to hoti hai ....bahut accha likha hai anu jee ...

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  21. ये चाँद भी ना . कल कमरे में भी था और खीर के कटोरे में भी था , बड़ा छलिया है.:)

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  22. आखिर दिल क्या चाहता है ?
    सच्चा इश्क ? ?
    याने-

    चाँद रात
    नर्म लहजा
    जज़्बात
    करीबियां
    और चंद झूठी कसमें !!

    बहुत अच्छी और प्यारी सी पोस्ट है। पढ़ कर बहुत ही अच्छा लगा.

    ~~Rohit~~

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  23. झूठी कसमें खाना ,फिर उन्हें तोडना , फिर उलाहना मिलना , आधी हंसी , आधे आंसू और यह सब भी चाँद रात में 'चाँद' के साथ !! क्या दृश्य पिरोया है आपने , मन मुग्ध हो गया | लाजवाब |

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  24. क्या खूबसूरत कविता है मोनिका जी..पर एक बात है मोनिका जी ये चांद भी गजब है न...बचपन में मामा बनता है..बड़े होते हैं तो मोहब्बत का गवाह...मगर मौन....पर निरपेक्ष भी....हम कसम खाते हैं..वो भी देख लेता है...हम कह देते हैं कि चांदनी जला रही है वो भी चांद चुपचाप मान लेता है....मगर शिकायत नहीं करता...पर हम उसे साक्षी बनाकर भी शिकायत कितना करते हैं मोहब्बत में...नहीं क्या?

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    Replies
    1. कौन मोनिका ???

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    2. अपने कान पकड़ कर सॉरी कह रहा हूं अनू जी..

      Delete
  25. कल रात
    चाँद यूँ ठहरा
    मेरे पहलु में आकर
    जैसे आया हो
    कभी न जाने के लिए...
    खुबसूरत रचना.....................

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  26. प्यार को कसम का सहारा....बिलकुल नहीं !

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  27. चाँद रात
    नर्म लहजा
    जज़्बात
    करीबियां
    और चंद झूठी कसमें !!

    दिल को छू गया आपका ये खूबसूरत अहसास....

    ReplyDelete

  28. चाँद रात
    नर्म लहजा
    जज़्बात
    करीबियां
    और चंद झूठी कसमें !!
    दिल को छू गया आपका ये खूबसूरत अहसास ...

    ReplyDelete
  29. चाँद रात
    नर्म लहजा
    जज़्बात
    करीबियां
    और चंद झूठी कसमें !!

    बस और क्या.....!!

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  30. आखिर में 'चंद झूठी कसमें' लिखने के दो असर हुए -
    १. पूरी कविता का रुख ही बदल गया
    २. कविता और खूबसूरत हो गयी |

    रात को चादर में
    मैं और चाँद साथ थे ,
    न जाने कब आँख लगी ,
    न जाने कब सहर हुई ,
    मैं सोता रहा ,
    वो उठकर चला गया |

    सादर
    -आकाश

    ReplyDelete
  31. आखिर दिल क्या चाहता है ?
    सच्चा इश्क ? ?
    याने-

    चाँद रात
    नर्म लहजा
    जज़्बात
    करीबियां
    और चंद झूठी कसमें !!...सच सी बात

    ReplyDelete
  32. चाँद रात
    नर्म  लहजा
    जज़्बात
    करीबियां
    और  चंद झूठी कसमें !!
    Issi pe to duniya chal rahi hai Mini aunty... :)

    Bahut sundar kavita <3 <3

    ReplyDelete
  33. Kyaa baat hai "करीबियां
    और चंद झूठी कसमें !!" ...loved it !!

    ReplyDelete

  34. चाँद रात
    नर्म लहजा
    जज़्बात
    करीबियां
    और चंद झूठी कसमें !!

    ये जानते हुए भी कि कसमें झूठी हैं....पर दिल चाहता जरूर है।।:)
    ख़ूबसूरत कविता

    ReplyDelete
  35. जीवन के अनुभव....धूप छाँव ...अच्छे अच्छों को कठोर बना देते हैं ...या यूँ कहो की मज़बूत बनाते हैं.....:))))))

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  36. झूठी नहीं ...सच्ची कसमें ...:)))))

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  37. क्षमाप्रार्थी हूं अनू जी .... जबरदस्त गलती हो गई थी..पर सुधार नहीं पाया था....एप्रूवल वाली प्राब्लम के कारण.....होनी नहीं चाहिए थी..आज तक नहीं हुई थी....उम्मीद करता हूं गलती क्षमा कर देंगी।

    ReplyDelete
    Replies
    1. अरे रोहिताश जी....ये कोई गलती नहीं..हम सभी से होती हैं ऐसी गडबडी..
      आप परेशान न हों...
      :-)

      शुभकामनाएं.

      Delete
  38. आखिर दिल क्या चाहता है ?
    सच्चा इश्क ? ?
    याने-

    चाँद रात
    नर्म लहजा
    जज़्बात
    करीबियां
    और चंद झूठी कसमें !.......... speechless

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  39. और चंद झूठी कसमें...इश्क की ये ही रवायत तो सारी नेमतों पर भारी है...

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  40. khamosh bs khamosh,sab hadon se guzar gyee,bahut khoob

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  41. बहुत नर्म से अहसासात हैं इस डूबकर लिखी गई इस नज़्म में । एक चांद प्रेमी है, एक नायिका और उनका प्रेम। और फिर वही अफसाना जो दीवानावार जगाता है रातों को, जिसकी बुनियाद में कोई बेवफाई कोई झूठ और फरेब होता है शायद। बहुत खूबसूरती से लिखी गई रचना के लिए बधाई।

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  42. कोमल एहसासों से सजी सुंदर रचना |

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  43. चंद झूठी कसमें..

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  44. कल रात
    चाँद यूँ ठहरा
    मेरे पहलु में आकर
    जैसे आया हो
    कभी न जाने के लिए...
    bahut khubsurat rachna....gahare jajbaat liye hue

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  45. सुन्दर एहसास

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  46. कसमें तो पहले सभी सच्ची ही खाते हैं पर झूठी कब हो जाती है पता ही नहीं चलता..शुभकामनाएं अनु...बहुत सुन्दर अहसास

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  47. कल रात
    चाँद यूँ ठहरा
    मेरे पहलु में आकर
    जैसे आया हो
    कभी न जाने के लिए...

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