इन्होने पढ़ा है मेरा जीवन...सो अब उसका हिस्सा हैं........

Saturday, April 19, 2014

चिड़िया

बीती रात ख्वाब में
मैं एक चिड़िया थी........
चिडे ने
चिड़िया से
मांगे पंख,
प्रेम के एवज में.
और
पकड़ा दिया प्यार
चिड़िया की चोंच में !
चिड़िया चहचहाना  चाहती थी
उड़ना चाहती थी...
मगर मजबूर थी,
मौन रहना उसकी मजबूरी थी
या शर्त थी चिडे की,
पता नहीं....

नींद टूटी,
ख्वाब टूटा,
सुबह हुई......

मैं एक चिड़िया हूँ
सुबह भी
अब भी....

~अनु ~

74 comments:

  1. एक प्यारा सा बिम्ब और गहरी बात ..... अनगिनत हैं प्रेम के लिए पंख दे देने वालीं ......

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  2. प्रेम तो खुद पंखों की तरह है.. जिसे लगाकर कोई सपनों की दुनिया में भी परवाज़ लगा सकता है, लगा लेता है...
    बहुत ही मासूम सी कविता!!

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  3. चिड़िया की चोंच में टंगे हुए प्रेम ने चिड़िया को चहचहाने नहीं दिया .......फ़्रेजाइल जो था .

    चिड़िया के भीतर गूंजता रहा अनहद नाद,

    कविता चिड़िया है ...या चिड़िया कविता ....बहरहाल बिन पंखों के भी पाठक तक पहुँचती है .

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    1. कविता पर टिप्पणी है या कविता पर कविता :-)

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  4. चिड़िया पंख देकर प्यार का सौदा नहीं करती मगर हाय! ख्वाब भी कितने डरावने आते हैं!

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  5. मैं एक चिड़िया हूँ
    सुबह भी
    अब भी....
    ----------
    behtareen

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  6. कितनी खूबसूरती से सारी हक़ीकत बयाँ कर दी
    कहा कुछ भी नहीं, और अह्सासे बेकराँ को जुबां दे दी

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  7. प्यार को चोंच में दाबी हुई चिड़िया बहुत प्यारी लगती है...इसलिए आप भी बहुत प्यारी हैं अनु...मौन रहना भी कभी कभी सुकून देता है|
    सस्नेह

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  8. बेहतरीन भावाभिव्यक्ति

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  9. behad khoobsurat......
    http://boseaparna.blogspot.in/

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  10. बहुत ही प्यारी दुलारी सी कविता |

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  11. सब की एक जैसी कहानी क्यूँ होती .....
    ये कहानी मेरी लगती
    हार्दिक शुभकामनायें

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  12. गहनता लिए अनुपम भाव संयोजित किये हैं आपने ...
    आभार

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  13. सब की एक जैसी कहानी क्यूँ होती .....
    ये कहानी मेरी लगती
    हार्दिक शुभकामनायें

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  14. प्यार में सौदा नहीं ....उड़ना तो चिड़िया का स्वाभाविक गुण है .......हाँ उड़ान छोटी या लंबी हो सकती है ...अच्छा हुआ बुरा ख्वाब बीत गया ....अब तो चिड़िया उड़ रही है न ...?

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  15. प्रेम में अनकहे और अनचाहे न जाने कितनी बन्दिशें हो जाती हैं ..... खूबसूरत बिम्ब से कह डाली इतनी गहरी बात .... सुंदर प्रस्तुति

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  16. बहुत गहरी बात कहती उम्दा प्रस्तुति !!!

    Recent post: तुम्हारा चेहरा ,

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  17. itni gahri baat, itni saralta se abhivyakt kar di aapne..........! jaise ye aapka hi nahi sabka (mahilaon ka) sach hai!!

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  18. मैं एक चिड़िया हूँ
    सुबह भी
    अब भी....

    हकीकत बयाँ कर दी

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  19. खूबसूरत अभिव्यक्ति

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  20. ओह , प्यार के बदले यह कीमत चुकाती है हमारे समाज की चिड़िया.
    मर्मस्पर्शी रचना.

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  21. मौन ही जाने मौन की भाषा
    मैं एक चिड़िया हूँ
    हमेशा रहूंगी...

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  22. इंसानी प्रेम की कीमत चुकानी ही पड़ती है..इसे रूहानी बनाये बिना पंख वापस नहीं मिलते...

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  23. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (28-04-2013) के चर्चा मंच 1228 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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    Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया अरुण जी.

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  24. 'प्यार' की कीमत तो हमेशा ही चुकानी पड़ी है .....क्या चिड़िया और क्या भौंरा !!!

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  25. आज की ब्लॉग बुलेटिन १०१ नॉट आउट - जोहरा सहगल - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  26. चिड़िया चहचहाना चाहती थी
    उड़ना चाहती थी...
    मगर मजबूर थी,
    मौन रहना उसकी मजबूरी थी........bahut badhiya .......majbooriyon se samna ho hi jata hai ......

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  27. बहुत खूबसूरत और सार्थक.....कीमत तो चुकानी ही पड़ेगी पर सिर्फ चिड़िया को ही क्यों?
    अनकहा भी जो रह गया है बहुत कुछ कह रहा है.....!!!!!!

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  28. बहुत सुन्दर ...........

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  29. खूबसूरत बिम्ब लिए सुंदर अभिव्यक्ति ।

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  30. चिड़िया दो घूँट प्यार से तृप्त हो गयी और ..........चिड़िया रात को भी चिड़िया रहती हैं और दिन में भी


    बहुत ही खूबसूरती से अपनी बात कहती ......कविता ..

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  31. sundar avivyakti .....
    man ka panchhi
    chhuna chahe gagan
    swrn pijara

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  32. बहुत सुंदर प्यारी चिड़िया की प्यार भरी कहानी.... आभार.

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  33. बहुत ही खुबसूरत अंदाज अनु जी अहसास मन में होता है और उड़ान भी मन ही भरता है जिसका दायरा असीमित रहता है |

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  34. वो पंख भी प्यार ही होंगे .... बहुत प्यारा लिखा है ....सस्नेह :)

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  35. बहुत सुन्दर | प्रेम में ह्रदय को पंख लग जाना स्वाभाविक है ....


    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  36. वाह, बहुत ही प्यारा बिंब लिया आपने अपनी कविता में, बहुत ही प्रभावी.

    रामराम.

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  37. बहुत प्रभावी तरीके से आपने अभिव्यक्त किया है

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  38. सुन्दर कविता ,
    लेकिन हर चिड़ा चिड़िया के पंख नहीं मांगता ,कुछ अपने पंख देते भी हैं चिड़िया को .........निश्चलता से ,
    ये निर्भर करता है की किसका प्रेम और समर्पण ज्यादा है , है ना ?

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  39. अनु जी :प्रेम से अधिक शोषण शायद ही किसी और रिश्ते में होता है....बहुत ताज़ा उपमान... अभिनंदन.

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  40. अनु जी :प्रेम से अधिक शोषण शायद ही किसी और रिश्ते में होता है....बहुत ताज़ा उपमान... अभिनंदन.

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  41. शायद इसी को गागर में सागर कहते हैं ... कुछ ही शब्दों में आपने हकीक़त को इस तरह बयां किया की दिल को छू गयी .... बहुत बढ़िया !

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  42. कविता मन को प्रभावित करने में सक्षम है।

    प्रेम में न तो लेन-देन होता है और न मजबूरियां !

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  43. प्रेम के एवज में प्यार मिलता रहे और क्या आकांक्षा हो सकती है.

    सुंदर कविता.

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  44. नारी मन को लिखा है ... आज के सच को लिखा है ...
    ये प्रेम तो नहीं ... उसकी एवज में अंधेरा दिया है ... जो नारी की किस्मत बन गया है ... गहरा अर्र्थ लिए लाजवाब रचना ...

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  45. कितनी सच्ची .... कितनी अपनी .... दिल को छू गयी .

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  46. अनु जी
    आप बहुत अच्छा लिखती हैं



    सुनिधि

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  47. बहुत अच्छी संकेतात्मक कविता...चिड़िया के मर्म को छूती हुई...बधाई!

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  48. बहुत ही प्यारी चिड़िया...

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  49. प्रेम को समझना भी अपने आप में एक अनुभूति है
    आपने जिस सहजता से चिड़िया के माध्यम से प्रेम को व्यक्त किया
    कमाल कर दिया
    प्रेम का सुंदर स्वरुप
    बधाई

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  50. बहुत बढ़िया... बेहद सार्थक!

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  51. सच्चा प्रेम तो बस एक चिड़िये की तरह ही मासूम होता है, निश्छल
    और प्रेम में कभी कभी चुप्पी भी कुछ ख़ास हो बहुत कुछ कह जाती है
    सादर!

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  52. there's a lil bird in each one of us

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  53. बहुत ही खुबसूरती है आपकी रचना में और दर्द भी .....क्यूँ प्रेम ही हमे छलता है ....

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  54. बहुत सुन्दर..

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  55. बहुत कुछ कहती एक सुन्दर रचना...

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  56. अनु दी नमस्ते

    आप तो वो चिड़िया हो जो चेचाहती अच्छी लगती है !! और ऐसी प्यारी चिड़िया से कोई भला कैसे प्यार नहीं करेगा

    हो सके तो इस छोटी सी पंछी की उड़ान को आशीष दीजियेगा

    नई पोस्ट
    तेरे मेरे प्यार का अपना आशियाना !!

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  57. बहुत सुन्दर मर्मस्पर्शी प्रस्तुति

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  58. प्यार दिया आज़ादी छिनी... चिड़ी की यही कहानी. ह्रदयस्पर्शी रचना, बधाई.

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  59. न जाने क्यू समझ नही आता आखिर इस प्रेम में ये शर्ते होती क्यू हैं....!!!

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  60. जो सोया है सो चिड़ा है
    जो जागा है सो चिढ़ा है

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  61. बहुत ही सुन्दर |
    एक मूवी ये लाइन सुनी थी -
    "शब् को हर रोज जगा देता है , ऐसी ख्वाब सजा देता है ,
    मुझको बंद कमरे में कैद करके , क्यूँ तू पंख लगा देता है |"

    सादर

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  62. Bahut pyari kavita.Man ko choo liya aapne chidiya banke...love u Anulata ji...:)

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  63. आपकी इस अभिव्यक्ति की चर्चा कल रविवार (20-04-2014) को ''शब्दों के बहाव में'' (चर्चा मंच-1588) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर

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  64. मौन रहना उसकी मजबूरी थी
    या शर्त थी चिडे की,
    पता नहीं....

    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति आदरणीया अनु जी

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  65. प्रेम का बंधन सही है
    पर प्रेम में शर्ते प्रेम की सीमा में नहीं होती है

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  66. चाहे शर्त हो या मजबूरी, प्रेम को यूँ पकड़ के तो नही रख सकते! उसे तो बस घुल जाना होता है, दो अस्तित्वों के समागम में! सुन्दर, गहन!

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