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Showing posts from February, 2014
ओक में भर लिया था
तुम्हारा प्रेम
मैंने,
रिसता रहा बूँद-बूँद
उँगलियों की दरारों के बीच से |
बह ही जाना था उसे
प्रेम जो था !

रह गयी है नमी सी
हथेलियों पर
और एक भीनी
जानी पहचानी महक
प्रेम की |

ढांपती हूँ जब  कभी
हथेलियों से
अपना उदास चेहरा,
मुस्कुरा उठती हैं तुम्हारी स्मृतियाँ
और मैं भी !

कि लगता है
वक्त के साथ
रिस जाती हैं धीरे धीरे  
मन की दरारों से
पनीली उदासियाँ भी |
~अनुलता ~

~बातों बातों में प्यार हो जाएगा ~

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टीना मुनीम अम्बानी कभी मेरी पसंदीदा अभिनेत्री नहीं रहीं | मगर उन पर एक आलेख लिखा | बस एक अनचाहा assignment मान कर उनके बारे में पढना शुरू किया तो लगा कि एक ठीक-ठाक सी अभिनेत्री होने के अलावा उन में कई खूबियाँ हैं .......आलेख के पूरा होते होते मुझे पसंद आने लगीं "टीना" :-) पढ़िए "आधी आबादी" पत्रिका में प्रकाशित मेरा आलेख !

~बातों बातों में प्यार हो जाएगा ~ 

मैं एक गृहणी हूँ, अस्पताल चलाती हूँ, और बहुत सारे सामाजिक कार्य करती हूँ...मेरा रिलायंस ADA ग्रुप से कोई सम्बन्ध नहीं, आप कभी आयें और देखिये कि हम कितने सारे सामाजिक दायित्वों को निभाते हैं| ये शब्द थे टीना मुनीम अम्बानी के,जब उन्हें 2G स्कैम के बाद अदालत में पेश किया गया और इसमें हैरानी की कोई बात नहीं कि माननीय अदालत ने उन्हें बिना किसी और पूछताछ के, बल्कि एक मुस्कराहट के साथ जाने की इजाज़त दे दी | उनके खूबसूरत व्यक्तित्व के आकर्षण से आखिर कोई भी अछूता कैसे रह सकता है |
आज आपको मिलवाती हूँ फिल्म इंडस्ट्री की बेहद खूबसूरत और आत्मविश्वासी नायिका से जिन्होंने अभिनय से इतर भी जीवन में कई मकाम हासिल किये और एक बेहद सा…
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तुम्हारी याद का
हल्दी चन्दन
माथे पर लगाए
जोगन बन जाना
मेरे लिए
आसान नहीं....

कि सीले मौसम में
जब नदियाँ बदहवासी में
दौड़ रही होती हैं
समंदर की ओर,
प्रकृति उकेरती है
लुभावने चित्र,
और
बूंदें
हटा कर धूल की चादर,
निर्वस्त्र कर देतीं हैं पत्तों को......

भीगा होता बहिर् और अंतस !
तभी  
कहीं भीतर से
रिस आता है ललाट पर
वो अभ्रक वाला
लाल सिंदूर
और उसी क्षण
खंडित हो जाता है
मेरा जोग !
भंग हो जाती है
मेरी सारी तपस्या !

~अनुलता ~

वसंत

कच्ची हल्दी से रंगा तन,
लगा कर पांव में महावार
नव ब्याहता सी
आयी वासंती पवन !
शरमाती सकुचाती
झिझकती
आखिर हो ही गयी
आलिंगनबद्ध !!
(खुशियों के बड़े गहरे रहस्य थोड़ी न होते हैं.....)
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टेसू का खिलना
भौरों का गुनना
फूलती अमराइयाँ
कलियों की अंगडाइयाँ
कौन कहता है ये वसंत की दस्तक है ?
मेरे घर आता है वसंत
तुम्हारे तन से लिपटा हुआ
तुम्हारे मन में छिप कर!!
(प्रेम से प्यारा मौसम कोई न हुआ अब तक...)

~अनुलता ~

अमृता शेरगिल - अपने कैनवस के रंगों सी....

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