स्मृतियाँ

माँ के ज़ेवरों की तरह
सम्हाल रखी हैं मैंने
तुम्हारी बातें,
सहेज रखा है हर महका लम्हा
रेशम की लाल पोटली में !

सम्हाला है
स्मृतियों को
एक विरासत की तरह
अगली पीढ़ी के लिए!

कभी खोल लेती हूँ वो पोटली
देखती हूँ चमकते गहने
और
आँखों में हौले से उतर आते हैं वो मोती...

ख़ालिस सोने की बनी-
सच!!
बुरे वक्त का सहारा  हैं वे स्मृतियाँ
माँ के ज़ेवरों की तरह......
~अनु~





Comments

  1. कभी खोल लेती हूँ वो पोटली
    देखती हूँ चमकते गहने
    और
    आँखों में हौले से उतर आते हैं वो मोती...
    ..वाह अनु .....वह मोती अनमोल हैं...जो ख़ुशी से छलकते हैं....

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  2. जीवन का श्रींगार स्मृतियों का गह्ना ….……भावपूर्ण।

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  3. ख़ालिस सोने की बनी-
    सच!!
    बुरे वक्त का सहारा हैं वे स्मृतियाँ
    माँ के ज़ेवरों की तरह......

    यादें भी जीने का सहारा देती हैं, बहुत ही सुंदर रचना.

    रामराम.

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  4. सच है स्मृतियाँ माँ के ज़ेवरों की तरह अनमोल होती हैं..बहुत सुन्दर..अनु..

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - शुक्रवार 30/08/2013 को
    हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः9 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra

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    Replies
    1. आपका बहुत शुक्रिया...

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  6. पोटली बांधके रखना ...गाहे बगाहे बहुत काम आती हैं स्मृतियां ...और संबल भी देती हैं ...:)

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  7. 'स्मृतियाँ' गिरवी रखने पर 'आंसू' ही मिल पते हैं बस ।

    बस इन्हें कभी 'गिरवी' न रखना पड़े ।

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  8. इस धरोहर को संभाले रखें।

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  9. बुरे वक़्त में मीठी यादें हौसला देती हैं .... बहुत सुंदर

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  10. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

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  11. सुन्दर। ह्रदय स्पर्शी।

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  12. बहुत सुन्दर भाव हमेशा की तरह

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  13. स्मृतियाँ अनमोल धरोहर है ---बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    latest postएक बार फिर आ जाओ कृष्ण।

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  14. haan di sunhari yadein hoti hi hain aisi..... komal ehsas....

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  15. अति सुंदर ...भावपूर्ण रचना

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  16. सुखद अहसास की कविता

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  17. स्मृतियों से ज्यादा अनमोल एवं सर्वउपलब्ध आभूषण सृष्टि में अन्य कोई भी नहीं है और उनमें भी माँ की स्मृतियाँ वो तो विशिष्टतम धरोहर है ... निश्चित रूप से हमारे बुरे वक्तों पर वो ही हमारा वास्तविक स्त्रीधन होती है ...

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  18. माँ की अनमोल स्मृतियाँ
    ....माँ की गोद जैसी
    बहुत सुंदर रचना

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  19. सच में जब सोच के ऊपर शून्य लगता है कभी-कभी, तो यही स्मृतियाँ होती हैं जो कुछ पुराने तार छेड़ती हैं...

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  20. माँ के ज़ेवरों की तरह
    सम्हाल रखी हैं मैंने
    तुम्हारी बातें, bahut umda

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  21. ख़ालिस सोने की बनी-
    सच!!
    बुरे वक्त का सहारा हैं वे स्मृतियाँ
    माँ के ज़ेवरों की तरह......

    लाजवाब, भावभीनी प्रस्तुति...
    और मेरे ब्लॉग पे आ उस पोस्ट की ब्लंडर मिस्टेक से अवगत कराने के लिये शक्रिया...

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  22. स्म्रतिया अनमोल होती है

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  23. माँ के ज़ेवरों की तरह
    सम्हाल रखी हैं मैंने
    तुम्हारी बातें,
    सहेज रखा है हर महका लम्हा
    रेशम की लाल पोटली में !
    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ .

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  24. माँ के ज़ेवरों की तरह
    सम्हाल रखी हैं मैंने
    तुम्हारी बातें,
    बहुत सुन्दर भाव , शुरू में ही कविता का पूरा कथ्य कह दिया ..

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  25. स्मृतियाँ बहुत खास होती है..
    बहुत ही सुन्दर रचना...
    :-)

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  26. ख़ालिस सोने की बनी-
    सच!!
    बुरे वक्त का सहारा हैं वे स्मृतियाँ
    माँ के ज़ेवरों की तरह...
    .......लाजवाब प्रस्तुति...

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  27. कल 01/09/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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    Replies
    1. शुक्रिया यशवंत.

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  28. बहुत ही प्यारे हैं आपके दिल के भाव ... :)

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  29. ☆★☆★☆


    अनु जी
    अच्छी कविता है...
    खोल लेती हूं वो पोटली
    देखती हूं चमकते गहने
    और
    आंखों में हौले से उतर आते हैं वो मोती...

    वाह !
    बुरे वक्त का सहारा हैं वे स्मृतिया !
    बुरा वक़्त आए ही क्यों ?
    :)

    हार्दिक शुभकामनाएं !
    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  30. सहेज रखा है हर महका लम्हा...
    हमेशा के लिए..
    सुखद एहसास के वो स्वर्णिम पल ..

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  31. यादों के ऐसे जेवर होना भी एक सौभाग्य है । अच्छी कविता । आपकी कहानी भी पढ ली । कथ्य अच्छा लगा । केतकी के चरित्र को कुछ और तराशा जा सकता था । फिर भी कहानी अच्छी है ।

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  32. बहुत उम्दा कविता

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  33. भावपूर्ण रचना...

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  34. बहुत सुंदर रचना...

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  35. उम्दा कविता......मीठी यादें कभी कभी जिन्दगी का सहारा बन जाती है

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  36. उम्र भर साथ रहती है ये पोटली ...
    विरासत की तरह पास ओन होती है ...

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  37. बहुत सुन्दर। यादों की पोटली को सदैव सजा के रखियेगा।

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  38. सुन्दर ,सरल और प्रभाबशाली रचना। बधाई।
    कभी यहाँ भी पधारें।

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  39. ख़ालिस सोने की बनी-
    सच!!
    बुरे वक्त का सहारा हैं वे स्मृतियाँ
    माँ के ज़ेवरों की तरह......
    बिलकुल सही कहा है अनु,
    सुन्दर रचना है !

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  40. वाकई स्मृतियाँ किसी अनमोल खजाने से कम नहीं होती क्यूंकि बुरे वक्त में कोई साथ दे या न दे स्मृतियाँ हमेशा साथ होती है अच्छे हम सफर की तरह...

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