राग-विराग

मेरे आँगन में
पसरा एक वृक्ष
वृक्ष तुम्हारे प्रेम का
आलिंगन सा करतीं शाखें
नेह बरसाते
देह सहलाते
संदली गंध से महकाते पुष्प
कानों में घुलता सरसराते पत्तों का संगीत,
जड़ें इतनी गहरी
मानों पाताल तक जा पहुंची हों
सम्हाल रखा हो घर को अपने कांधों पर.

मगर ये तब की बात थी.....

अब आँगन में बिखरे हैं सूखे पत्ते
जिनकी चरमराहट ही एकमात्र संवाद है मेरा वृक्ष से
तने खोखले हैं
खुरदुरा स्पर्श ...
जड़ों ने दीवारों में दरार कर दी है

ऐसा नहीं कि प्रेम के अभाव में जीवन नहीं
मगर
बड़ा त्रासद है
प्रेम का होना और फिर न होना ....
~अनु ~


Comments

  1. दुआ चंदन
    बस रहे पावन
    जहाँ भी रहे !

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  2. बंजारे को ख्वाब दिखाते , महलों और मेहराबों के !
    बरगद तले, बसेरा काफी,मदद न लें इन प्यारों की !

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  3. बड़ा त्रासद है
    प्रेम का होना और फिर न होना ....
    जिस पर गुजरता है
    वही समझ सकता है
    अभिभूत हूँ

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  4. इस त्रासदी के लिए शब्द भी कम पड़ जाते हैं..

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  5. बिलकुल सही, बिन प्रेम जीवन एकदम नीरस

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  6. ऐसा नहीं कि प्रेम के अभाव में जीवन नहीं
    मगर
    बड़ा त्रासद है
    प्रेम का होना और फिर न होना ....just awesome.. :)

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  7. This comment has been removed by the author.

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  8. बहुत सुन्दर.बहुत बढ़िया लिखा है .शुभकामनायें आपको .

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  9. शायद प्रेम भी बसंत के आने और चले जाने वाली अवस्था है, पर यह सतत प्रक्रिया है, बहुत ही सुंदर रचना, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  10. behatareen, अब आँगन में बिखरे हैं सूखे पत्ते
    जिनकी चरमराहट ही एकमात्र संवाद है मेरा वृक्ष से
    तने खोखले हैं
    खुरदुरा स्पर्श ...
    जड़ों ने दीवारों में दरार कर दी है

    ReplyDelete
  11. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन यात्रा रुकेगी नहीं ... मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    Replies
    1. शुक्रिया रश्मि दी.

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  12. प्रेम जीवन का सबकुछ तो नहीं लेकिन महत्तपूर्णपार्ट है और बिखर जाये तो तकलीफ तो होती ही है ...

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  13. बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुती,आभार.

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  14. मौसम बदलता है .प्यार का मौसम भी बदलता है
    ,-सुन्दर रचना
    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    latest post: प्रेम- पहेली
    LATEST POST जन्म ,मृत्यु और मोक्ष !

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  15. pyar ke ahsas ko sabd dena koi aapse seekhe

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  16. प्रेम का होना फिर न होना ...वही जाने जिसपर बीता हो ..अद्भुत .

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  17. bahut sundar rachna ...prem ke rang hain yah

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  18. बहुत खूब ...उम्दा

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  19. खूबशूरत अहसाह ,बेहतरीन प्रस्तुति ,बहुत सुन्दर रचना

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  20. प्रेम के होने और न होने के बीच की यादें बहुत दिल दुखाती हैं ...
    गहरी अनुभूति से उपजी रचना ...

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  21. बहुत सुन्दर.बहुत बढ़िया लिखा है

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  22. बेहद सुन्दर प्रस्तुति ....!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (11-06-2013) के अनवरत चलती यह यात्रा बारिश के रंगों में .......! चर्चा मंच अंक-1273 पर भी होगी!
    सादर...!
    शशि पुरवार

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    Replies
    1. शुक्रिया शशि....

      Delete
  23. बहुत सुन्दर.बहुत बढ़िया लिखा है

    ReplyDelete
  24. बहुत सुन्दर.बहुत बढ़िया लिखा है

    ReplyDelete
  25. बड़ा त्रासद है
    प्रेम का होना और फिर न होना ....

    गहन वेदना दर्शाती सुन्दर प्रस्तुति अनु ....!!

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  26. वाह ! सुहानी चांदनी रातें , सोने नहीं देती।

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  27. ऐसा नहीं कि प्रेम के अभाव में जीवन नहीं
    मगर
    बड़ा त्रासद है
    प्रेम का होना और फिर न होना ....100% sahmat .....

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  28. ऐसा नहीं कि प्रेम के अभाव में जीवन नहीं
    मगर
    बड़ा त्रासद है
    प्रेम का होना और फिर न होना .

    बेहद सुन्दर याद
    बेहद सुन्दर रचना

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  29. bahut hi gahanta sy yukt rachna...........

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  30. beautiful expressions :)
    loved the concluding lines...
    I read somewhere..
    it is better to be loved and then lost
    than not being loved at all

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  31. ऐसा नहीं कि प्रेम के अभाव में जीवन नहीं
    मगर
    बड़ा त्रासद है
    प्रेम का होना और फिर न होना ....

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  32. बहुत सुंदर रचना
    आपकी मौलिक सोच आपकी बहुत बड़ी संम्पत्ति है।
    बहुत सुंदर

    मीडिया के भीतर की बुराई जाननी है, फिर तो जरूर पढिए ये लेख ।
    हमारे दूसरे ब्लाग TV स्टेशन पर। " ABP न्यूज : ये कैसा ब्रेकिंग न्यूज ! "
    http://tvstationlive.blogspot.in/2013/06/abp.html

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  33. प्रेम ही तो जीवन है..कोमल अहसास !

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  34. मन को कहीं गहरे छूकर...उथल पुथल मचा देता है ..भावनाओं कि गहराई लिए लेखन आपका .

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  35. तब और अब में आ जाता है अंतर परिस्थितियों का ..... गहन भाव लिए सुंदर रचना

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  36. अनु जी : वृक्षों के विश्व की आप प्रचार अधिकारी है. वृक्षों में जीवन होता है यह विज्ञान है और जीवन में वृक्ष का होना यह कविता है -- बहुत सुंदर रचना अपने अवसाद की सरसराहट का असह्य संगीत लिए.

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  37. बहुत खूबसूरत ...बहुत दर्दनाक
    पर जीवन का चक्र है ...युब ही चलता है
    .....मर्मस्पर्शी रचना

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  38. यह क्या कम है कि प्रेम कभी जीवन में आया तो था , मैं मानती हूँ कि प्रेम की सुखद स्मृतियाँ चिरस्थायी होती है , जीवन भर ख़ुशी देती हैं :)

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  39. ये जो होने का बाद न होना है…!
    क्या बात है!
    ढ़
    --
    थर्टीन ट्रैवल स्टोरीज़!!!

    ReplyDelete
  40. ये जो होने का बाद न होना है…!
    क्या बात है!
    ढ़
    --
    थर्टीन ट्रैवल स्टोरीज़!!!

    ReplyDelete
  41. सचमुच बहुत त्रासद होता है ये होकर ना होना...मर्मस्पर्शी रचना... शुभकामनायें

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  42. जीवन में प्रेम ना हो तो जीवन कितना नीरस हो जाता है ..
    भावपूर्ण रचना ...
    साभार !

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  43. भवनात्मक रचना |
    सब कुछ है फिर भी कुछ नहीं |

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  44. ऐसा नहीं कि प्रेम के अभाव में जीवन नहीं
    मगर
    बड़ा त्रासद है
    प्रेम का होना और फिर न होना ....---

    जीवन और जीवन के प्रेम राग को सार्थकता से व्यक्त करती अदभुत रचना
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    सादर

    आग्रह है- पापा ---------

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  45. यह रचना जीवन की सच्चाई को बयां कर रही है !
    लेकिन स्नेह का खाद पानी डाले बिना हम और क्या कर सकते है ?
    सुन्दर लगी रचना !

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  46. प्रेम का वृक्ष जब तक रहता है तब हर मौसम बसंत बहार है पर जब ये वृक्ष टूटता है तो पतझड़ जैसे जाता ही नहीं...
    बहुत भावनात्मक अभिव्यक्ति..

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  47. मगर
    बड़ा त्रासद है
    प्रेम का होना और फिर न होना ....

    उफ़ ये खोखली होती जडें ....!!

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  48. आप अच्‍छा लि‍खती हैं

    ReplyDelete
  49. प्रेम भी जीवन का अभिन्न अंग है. इसका होना या ना होना बहुत असर डालता जीवन में.

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  50. ऐसा नहीं कि प्रेम के अभाव में जीवन नहीं
    मगर
    बड़ा त्रासद है
    प्रेम का होना और फिर न होना ....

    ....बहुत मर्मस्पर्शी रचना...

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  51. बड़ा त्रासद है
    प्रेम का होना और फिर न होना ....

    कहीं कुछ भीतर उतरता सा...... बहुत सुंदर

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  52. मगर
    बड़ा त्रासद है
    प्रेम का होना और फिर न होना .

    मर्मस्पर्शी

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  53. What a beautiful metaphor and poem. :)

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  54. ऐसा नहीं कि प्रेम के अभाव में जीवन नहीं
    मगर
    बड़ा त्रासद है
    प्रेम का होना और फिर न होना....

    बहुत सुंदर...

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  55. सटीक सुंदर अभिव्यक्ति , शुभकामनाये ,
    यहाँ भी पधारे ,,,http://shoryamalik.blogspot.in/

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  56. "बड़ा त्रासद है
    प्रेम का होना और फिर न होना ...." says it all!
    An absolutely wonderful creation!!

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  57. बड़ा त्रासद है
    प्रेम का होना और फिर न होना

    मार्मिक रचना
    अनु जी

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  58. ऐसा नहीं कि प्रेम के अभाव में जीवन नहीं
    मगर
    बड़ा त्रासद है
    प्रेम का होना और फिर न होना ....

    ............. मर्मस्पर्शी रचना...

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  59. ऐसा नहीं कि प्रेम के अभाव में जीवन नहीं
    मगर
    बड़ा त्रासद है

    आह...! वाह...!!! सहजता से प्रकट हुआ यह सत्य कितना मार्मिक है!

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