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Tuesday, January 21, 2014

एक शोख़ नज़्म....

एक शोख़ नज़्म
फिसल कर मेरी कलम से
बिखर गयी
धूसर आकाश में !

भीग गया हर लफ्ज़
बादलों के हल्के स्पर्श से...
और वो बन गयी
एक सीली उदास नज़्म!

मेरी हर नज़्म
नतीजा है
मेरी लापरवाहियों का !

सिर्फ तुम्हारे प्रेम पर लिखी नज़्में
होशियारी से लिखे गए
बेमायना अल्फाज़ों का ढेर हैं !!

~अनुलता ~

39 comments:

  1. बादलों के हल्के स्पर्श से...
    और वो बन गयी
    एक सीली उदास नज़्म!

    ....कमाल कर दिया उत्कृष्ट भाव संयोजन से सजी बेहतरीन भावाभिव्यक्ति।

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  2. मेरी हर नज़्म
    नतीजा है
    मेरी लापरवाहियों का !
    ....कुछ पंक्तियों में कितना कुछ है इन लफ़्ज़ों

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  3. आपके अल्फाज़ों का ढेर हमें ढेर कर जाता है .... हमेशा की तरह सुंदर पंक्तियाँ

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  4. खूबसूरत लापरवाहियाँ....

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  5. अच्छा है , प्रेम को मायने मिले .

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  6. उदास होकर भी पार उतर गए,
    समझदार लफ्ज़मगर ... बेमानी हुए ...

    ~अनिता <3

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  7. इन लापरवाहियों पर कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा!!
    बहुत ख़ूब!!

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  8. बेमायना अल्फाज़ों से ही बन गई एक खूबसूरत नज्म.
    सुंदर अहसास !

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  9. सिर्फ तुम्हारे प्रेम पर लिखी नज़्में
    होशियारी से लिखे गए
    बेमायना अल्फाज़ों का ढेर हैं !!
    ...वाह...क्या बात है...बहुत सुन्दर...

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  10. प्यार में होशियारी नही ,गुस्ताखी हो जाती है ...जो जायज़ है :-)

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  11. यह शोख़ नज़्म वाकई शोख़ है |बहुत सुन्दर |

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  12. dil ko chhoo liya aapki is abhiwayakti ne .......

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  13. खुबसूरत भावो का सुन्दर नज्म.. बहुत खूब..

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  14. बहुत बहुत प्यारी रचना अनु,
    मन को छू गयी !
    भीग गया हर लफ्ज़
    बादलों के हल्के स्पर्श से...
    और वो बन गयी
    एक सीली उदास नज़्म!
    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ है !

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  15. बेहतरीन लापरवाही जमा कर लिखे शब्दों पर भारी पड़ी !

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  16. उदास नज़्म बेपरवाही का नतीज़ा...
    प्रेम की नज़्म ...
    सिर्फ तुम्हारे प्रेम पर लिखी नज़्में
    होशियारी से लिखे गए
    बेमायना अल्फाज़ों का ढेर हैं !!
    अब क्या कहूँ... कैसी नज़्म लिखो...
    बहुत खूब, बधाई.

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  17. वाह .. क्या बात है... सच पूछो तो असल नज़्म तो वही है अल्हड सी ... जो बिखर गई स्वतः ही आकाश में ... सीली सीली सी ...

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  18. एक सीली उदास नज़्म!
    पर बेहद खूबसूरत ....

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  19. गहन एवं सुंदर अभिव्यक्ति...

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  20. सिर्फ तुम्हारे प्रेम पर लिखी नज़्में
    होशियारी से लिखे गए
    बेमायना अल्फाज़ों का ढेर हैं !!

    Bahut sundar :-)

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  21. सुंदर ......लापरवाही से लिख डाला नज़मों में उन्मुक्त प्रेम ...!!कभी भीगा ...कभी सीला .....!!सुंदर अभिव्यक्ति अनु ...!!

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  22. This comment has been removed by the author.

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  23. बेमायना अलफ़ाज़ ?? नहीं नहीं ...हर हर्फ़ खूबसूरत है.:)

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  24. बहुत खूबसूरत नज्म .. एक एक शब्द खूबसूरत.

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  25. बहुत खूबसूरत नज्म ....!!

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  26. एक अलग सोच की कविता

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  27. बरकरार रहे शोख़ी, मायूसी तो मुफ्त मिला करती है।

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  28. बहुत खूबसूरत

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  29. वाह ... क्‍या बात है लापरवाह होकर भी लाजवाब कर जाती है कई बार जो, कुछ ऐसी ही है ये नज्‍म भी

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  30. वाह !! बहुत सुंदर
    उत्कृष्ट
    बधाई ----

    आग्रह है--
    वाह !! बसंत--------

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  31. सिर्फ तुम्हारे प्रेम पर लिखी नज़्में
    होशियारी से लिखे गए
    बेमायना अल्फाज़ों का ढेर हैं !!

    क्या बात है..अद्भुत अनुजी।।।

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  32. सीली सी ये नज़्म
    भीगे भीगे से एहसास
    लगता है आज
    तेरे प्रेम का आसमां
    खुल के बरसा है ........

    बहुत खूबसूरत रचना

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  33. बहुत खूबसूरत ....

    मेरी हर नज़्म
    नतीजा है
    मेरी लापरवाहियों का !

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