तुम्हारे और मेरे बीच......

तुम्हारे और मेरे बीच अगर कुछ होगा
तो वो सिर्फ प्रेम होगा

हमारी हथेलियों पर
हर पल अंकुरित होता प्रेम
स्पर्श की ऊष्मा से....

और हमारे इर्द गिर्द फ़ैली हों
बेचैनियाँ,
हमें एक दूसरे की ओर धकेलती हुई !

किसी और को
करीब आने की नहीं होगी इजाज़त
बस एक दो जुगनू और कुछ तितलियाँ
सच मानो
बड़ी ज़िद्द की है उन्होंने....

हाँ! एक महीन अदृश्य पर्दा होगा
तुम्हारे और मेरे बीच,
कि छिपे रहें मेरे गम
कि तुम्हारी खुशियों को नज़र न लगे उनकी |

तो फिर ये तय हुआ कि
हमारे बीच अगर कुछ होगा
तो वो सिर्फ प्रेम होगा
या होगा एक पागलपन
या फिर दर्द
प्रेम के न होने का !
(तुमने क्या तय किया कहो न ?? )

~अनुलता ~

Comments

  1. लौट जाती है उधर को भी नज़र क्या कीजे
    अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजे!
    और भी दुख हैं ज़माने में मुहब्बत के सिवा
    राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा

    फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

    ReplyDelete
  2. ऐसे में प्रेम के अलावा और कुछ हो भी कैसे सकता है...क्यूंकि दूरियाँ भी तो प्रेम को ही बढ़ा देती है। तो प्रेम का होना तो तय है चाहे दूर रहें या पास ...जैस हम तुम...कहो है की नहीं :-)

    ReplyDelete
  3. "या प्रेम होगा या पागलपन या फिर दर्द
    प्रेम के न होने का "
    वाह ...बहुत सुंदर

    ReplyDelete
  4. प्यारे प्यारे एहसास और ये शब्द ... अब क्या कहेगा कोई :)

    ReplyDelete
  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज मंगलवार (03-12-2013) की 1450वीं में मंगलवारीय चर्चा --१४५० -घर की इज्जत बेंच,किसी के घर का पानी भरते हैं में "मयंक का कोना" पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
    Replies
    1. आभार शास्त्री जी.

      Delete
  6. किसी और को
    करीब आने की नहीं होगी इजाज़त
    बस एक दो जुगनू और कुछ तितलियाँ
    सच मानो
    बड़ी ज़िद्द की है उन्होंने....

    कोमल मनमोहक भाव बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  7. या प्रेम होगा नहीं तो नहीं होने का दर्द !
    याद आ रहा है कि जब किसी को भुलाया तो कैसे भुलाया , याद था जो , उसे ही तो !

    ReplyDelete
  8. एक महीन अदृश्य पर्दा होगा
    तुम्हारे और मेरे बीच,
    कि छिपे रहें मेरे गम
    कि तुम्हारी खुशियों को नज़र न लगे उनकी |.. बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति ..

    ReplyDelete
  9. गहन अभिव्यक्ति …। प्रेम है तभी तो दर्द है ,दर्द भी तो प्रेम का एक स्वरुप है …। सुंदर शब्द …सुन्दर भाव

    ReplyDelete
  10. दोनों में से कोई भी रहे .... रिश्ता तो बना रहेगा ....

    ReplyDelete
  11. di aaj apki is kavita ney rula diya .....luved to read

    ReplyDelete
  12. पर प्रेम के बीच तय रास्ते तुम्हारे !
    तो क्या किया तय - मैं तो प्रतीक्षित प्रतीक्षा हूँ

    ReplyDelete
  13. Khoobsoorat prem...
    esa prem sabko nasib ho :)

    ReplyDelete
  14. तो फिर ये तय हुआ कि
    हमारे बीच अगर कुछ होगा
    तो वो सिर्फ प्रेम होगा
    या होगा एक पागलपन
    या फिर दर्द
    प्रेम के न होने का

    बहुत ही सशक्त अभिव्यक्ति, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    ReplyDelete
  15. Just like unconditional and eternal love:)

    ReplyDelete
  16. महीन भावों को सुंदरता से उकेरा है..

    ReplyDelete
  17. महीन भावों को सुंदरता से उकेरा है..

    ReplyDelete
  18. प्रेम का अनुबंध .. जो सिर्फ दर्द का होगा ... उसके न होने से ...
    बहुत ही गहराई से शब्दों को अर्थ में पिरोया है ...

    ReplyDelete
  19. बहुत सुंदर उत्कृष्ट रचना ....!
    ==================
    नई पोस्ट-: चुनाव आया...

    ReplyDelete
  20. The way you express emotions in your poetry is simply mesmerizing.. In fact makes the love more lovable and sublime...<3
    .
    But one thing... When the love and pure love sprouts between them, then why the condition of TUMHARI KHUSHIYON KO MERE GHAM KI NAZAR NA LAG JAYE.. Now the GHM m KHUSHI are to be shared by both.. Even otherwise a PAAGAL or PREMI can't differentiate between Khushi n Gham!! Hai na??

    ReplyDelete
    Replies
    1. सच है दादा कि प्रेमी गम और खुशियाँ दोनों बांटते हैं मगर यहाँ एक तरफ़ा मत है न ....गम देना नहीं चाहता प्रेमी :-) thanks for the sweet comment !!

      Delete
  21. सुन्दर रचना

    ReplyDelete
  22. अनूठापन है इस रचना में !! मंगलकामनाएं !!

    ReplyDelete
  23. हाँ! एक महीन अदृश्य पर्दा होगा
    तुम्हारे और मेरे बीच....
    yahi sach hai..

    ReplyDelete
  24. दोनों तरफ से तय है - बस प्रेम ही प्रेम. बहुत प्यारी रचना, बधाई.

    ReplyDelete

  25. बहुत सुन्दर रचना अनु, !

    ReplyDelete
  26. एक महीन अदृश्य पर्दा होगा
    तुम्हारे और मेरे बीच,
    कि छिपे रहें मेरे गम
    कि तुम्हारी खुशियों को नज़र न लगे उनकी |............ बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  27. amazingly impressive .............extraordinarily wonderful blog ....plz do visit my new post : http://swapniljewels.blogspot.in/2013/12/blog-post.html

    ReplyDelete
  28. प्यारे से अहसास लिए बहुत ही सुन्दर प्यारी रचना..
    :-)

    ReplyDelete
  29. mind blowing...superb as always :)

    ReplyDelete
  30. सुखद अहसास लिए बहुत ही प्यारी रचना..अनु..

    ReplyDelete
  31. तो फिर ये तय हुआ कि
    हमारे बीच अगर कुछ होगा
    तो वो सिर्फ प्रेम होगा
    या होगा एक पागलपन
    या फिर दर्द
    प्रेम के न होने का !
    (तुमने क्या तय किया कहो न ?? )


    शाश्वत प्रश्न....बहुत सुन्दर संवेदनशील रचना ...

    ReplyDelete
  32. जी हमने तो पागलपन तय किया है :):) बहुत सुंदर रचना ....... प्रेमपगी

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपसे यही उम्मीद थी दी :-)

      Delete
  33. वाह... उम्दा भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

    ReplyDelete
  34. तो फिर ये तय हुआ कि
    हमारे बीच अगर कुछ होगा
    तो वो सिर्फ प्रेम होगा
    या होगा एक पागलपन
    या फिर दर्द
    प्रेम के न होने का !
    बहुत सुंदर.

    ReplyDelete
  35. हाँ! एक महीन अदृश्य पर्दा होगा
    तुम्हारे और मेरे बीच,
    कि छिपे रहें मेरे गम
    कि तुम्हारी खुशियों को नज़र न लगे उनकी

    अनु जी.. खूबसूरत रचना.. :)

    सिर्फ प्रेम ही शाश्वत है.. बाक़ी सब निरर्थक.. ये पंक्तियाँ दिल छू गयीं...

    ReplyDelete
  36. तो फिर ये तय हुआ कि
    हमारे बीच अगर कुछ होगा
    तो वो सिर्फ प्रेम होगा
    या होगा एक पागलपन
    या फिर दर्द
    प्रेम के न होने का !
    ....वाह! बहुत ख़ूबसूरत और भावपूर्ण प्रस्तुति....

    ReplyDelete
  37. बेहद खूबसूरत ........ हर शब्द प्रेम में भीगा हुआ

    ReplyDelete
  38. बेहद खूबसूरत ....

    ReplyDelete
  39. सुन्दर प्रस्तुति...

    ReplyDelete
  40. anu ji apka koi jabab nahi ........behad shaktishali rachana ...abhar

    ReplyDelete


  41. ☆★☆★☆


    तो फिर ये तय हुआ कि
    हमारे बीच अगर कुछ होगा
    तो वो सिर्फ प्रेम होगा
    या होगा एक पागलपन
    या फिर दर्द
    प्रेम के न होने का !

    वाह…!
    (तुमने क्या तय किया कहो न ?? )

    बहुत सुंदर अनुलता जी
    आपकी कविताएं भीतर कहीं छूती अवश्य हैं ...
    शायद इसलिए कि आप डूब कर लिखती हैं !
    :)
    सुंदर श्रेष्ठ सृजन हेतु
    हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !

    -राजेन्द्र स्वर्णकार

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

प्रेमपत्र

मेरी लिखी कहानी "स्नेहा" - 92.7 big fm पर नीलेश मिश्रा की जादुई आवाज़ में................

दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में मेरी किताब "इश्क तुम्हें हो जाएगा " की समीक्षा...............