फेनिल नदी में
कंपकंपाते
चाँद का प्रतिबिम्ब
बिंम्ब जो
ठहरा हुआ है वहीं
बहता नहीं लहरों के साथ,
बिंम्ब जो
ठहरा हुआ है वहीं
बहता नहीं लहरों के साथ,
और उस पर झुकी वो
अमलतास की
डाली,
जिसने उतार फेंके थे
जिसने उतार फेंके थे
अपने सभी स्वर्ण आभूषण और
हरे रेशमी वस्त्र भी
लहरों संग बह जाने को...
लहरों संग बह जाने को...
कि प्रेम में जोगन बन जाना
सुहाता है
इसे पंखुड़ियों और पत्तों का
झड़ना मत कहो
ये प्रेम है,विशुद्ध
प्रेम....
ठूंठ हुई डाली अपना सर्वस्व तजना चाहती है
ठूंठ हुई डाली अपना सर्वस्व तजना चाहती है
प्रेम के लिए स्थान बनाने को.
संसार के आवागमन से परे
मन समर्पित हो जाना चाहता है !
संसार के आवागमन से परे
मन समर्पित हो जाना चाहता है !

