इन्होने पढ़ा है मेरा जीवन...सो अब उसका हिस्सा हैं........

Thursday, September 5, 2013

रोटी

भूख जगा देती है नींद से,
बेसुध कर देती है सपनों  को
फिर
उनमें आग लगा कर
जलते ख़्वाबों पर
सेकती है रोटियां ....

एक आधी रोटी का टुकड़ा
ढांक लेता है आकांक्षाओं और
उम्मीदों के बीज को,
सड़ा देता है उसे भीतर ही भीतर 
अंकुरण के पहले ही....

भूखा नहीं देखता इन्द्रधनुषी सपने
भूखे को नहीं दिखती रोटी पर लगी नीली हरी फफूंद
उसको नहीं दिखते रंग
उसकी आँख नहीं होती
भूखे के पास  होता है सिर्फ एक पेट...

~अनु ~

42 comments:

  1. बढ़िया प्रस्तुति-
    आदि गुरु को सादर प्रणाम-

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  2. भूखे की वेदना सिर्फ़ रोटी ही मिटा सकती है. भूखा व्यक्ति रोटी की क्वालीटी नही देखता, बहुत सटीक और यथार्थ मय रचना.

    रामराम.

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  3. भूख न जाने सूखी रोटी ..नींद न जाने टूटी खाट....जीवन की बेसिक ज़रूरतें पूरी होना भी जहाँ एक सुखद स्वप्न सा है ....वहाँ कैसी चॉईस .....बस यही सच है ...एक कठोर सच .....!!!!

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  4. "Roti" The basic necessity of every being. let's see what this food security Bill does to the population that sleeps hungry.

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  5. बहुत बढ़िया..अनु..

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  6. lovely touching and impact poem

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  7. बिलकुल सच भूखे को कोई रंग नहीं दीखता ......दीखता है एक रोटी ...

    latest post: सब्सिडी बनाम टैक्स कन्सेसन !

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  8. भूख के पास होता है सिर्फ एक पेट !!
    जरुरतमंदों को देख कर यही लगता है वर्ना तो अंधे कुंवे ज्यादा नजर आते हैं !

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  9. भूख का यही चित्र है... कितना मार्मिक!

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  10. भूखे पेट जो न पड़े रोटी
    तो सभी बातें हो जाएँ खोटी .....

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  11. "भूखे के पास होता है सिर्फ एक पेट..."...

    बहुत मर्मस्पर्शी ....

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  12. aur duoble roti(bread) ke bare men kya khyaal hai ??:)
    jocks apart
    ekdam sach kaha hai. jahan mool bhoot jaruraten poori nahi hoti vahan kuchh or nahi najar aata
    marmsparshi rachna hai.

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  13. maarmik .. katu satya ... bhuk na jane jaat paat desh kal ..bhuk to bas bhuk hai ..
    pet me aag lagi ho to kuchh or nhi dikhta ..

    भूखा नहीं देखता इन्द्रधनुषी सपने
    भूखे को नहीं दिखती रोटी पर लगी नीली हरी फफूंद
    उसको नहीं दिखते रंग
    उसकी आँख नहीं होती
    भूखे के पास होता है सिर्फ एक पेट...
    naman :)

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  14. Wah Anuji. Athi sundar pharmaish.
    Trust you are keeping well & fine.
    Best Wishes Ram

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  15. सच एकदम सच अनु ....भूखे के पास सपने नहीं होते, न ही आँखें होती है, केवल एक पेट होता है। बेहतरीन भावभिव्यक्ति।

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  16. भूखे भजन न होई गोपाला |
    भूखे कों तो पेट भरने के आलावा कुछ नही सूझता |
    अत्यन्त मार्मिक रचना |
    नई पोस्ट-
    “शीश दिये जों गुरू मिले ,तो भी कम ही जान !”

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  17. मर्मस्पर्शी कविता...

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  18. बहुत सुंदर
    सार्थक अभिव्यक्ति
    शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

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  19. कड़वी सच्चाई ,मार्मिक अभिव्यक्ति

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  20. बेहद सामान्य-सरल से शब्दों में इतनी गहरी बात सिर्फ आपकी कविता ही कह सकती है...लाजवाब।।।

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  21. बढ़िया प्रस्तुति-

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  22. मार्मिक एवं सच्ची अभिव्यक्ति

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  23. सचमुच भूख से बढ़कर कुछ भी नहीं....बहुत ही मर्मस्पर्शी रचना

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  24. भूखे को नहीं दिखती रोटी पर लगी नीली हरी फफूंद
    उसको नहीं दिखते रंग
    उसकी आँख नहीं होती
    भूखे के पास होता है सिर्फ एक पेट...

    ..........बेहद मार्मिक

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  25. उसकी आँख नहीं होती
    भूखे के पास होता है सिर्फ एक पेट...
    - बहुत सुंदर प्रस्तुति

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  26. भूख का मार्मिक चित्रण ...

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  27. कटु सत्य एवं मार्मिक.

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  28. when hunger takes over..
    nothing else matters.

    very very poignant post

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  29. बिल्कुल सही कहा आपने

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  30. जलते ख़्वाबों पर
    सेकती है रोटियां ....

    बेहतरीन भाव सम्प्रेषण..

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  31. अनु जी --भूखा ही देखता इन्द्रधनुषी सपने। …

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  32. भूख जला देती है सभी ख्वाब ... सभी रंग ... बस रह जाती है तो इक आग ...
    सटीक रचना ...

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  33. भूखे को नहीं दिखती रोटी पर लगी नीली हरी फफूंद
    उसको नहीं दिखते रंग
    उसकी आँख नहीं होती
    भूखे के पास होता है सिर्फ एक पेट...
    बहुत ही हृदयस्पर्शी रचना।

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  34. सब कुछ इस पापी पेट का ही सवाल है..
    न जाने क्या क्या करवाता है..
    छूने वाली कविता.

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  35. "भूखे के पास होता है सिर्फ एक पेट..."...
    सबसे बड़ा सच .....

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  36. marmik.....उसको नहीं दिखते रंग
    उसकी आँख नहीं होती
    भूखे के पास होता है सिर्फ एक पेट....

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