इन्होने पढ़ा है मेरा जीवन...सो अब उसका हिस्सा हैं........

Tuesday, August 21, 2012

आसान था तुझे भूल जाना......

आसान था तुझे भूल जाना....
जैसे आसान था कभी,
रह रह कर तेरा याद आना...
भुला दिया तुझे मेरे दिल ने
बड़ी जल्दी,बड़ी आसानी से....

थे जो तेरी  मोहब्बत के दस्तावेज,
वो कॉफी के कुछ बिल जलाए
और खत खुशबुओं वाले,
फाड़े और हवा में उडाये..
मुस्कुरा कर कुछ गम चोरी चोरी
अश्कों में बहाए......
बंधे थे मन्नत के धागे जो
हर मंदिर और दरगाह में
बस उन्हें भी जाकर खोल आये.....
सब  किया धरा चाँद का था,सो
उसको भी अमावस कर आये....

अब ज़रा होशियारी बरतती हूँ.....
तेरे  नाम के किसी और शख्स से भी
अंजान बनी रहती हूँ.....
अपनी चाहतें और शौक बदल डाले है मैंने...
अब न सुनती हूँ गज़ल,न शोख रंग पहनती हूँ...

ऐ मेरी हंसीं के दीवाने! अब न मैं ,उन दिनों की तरह ,खिलखिला के कभी  हँसती हूँ.....
 -अनु

88 comments:

  1. इतना आसान नहीं है मुझे भूल जाना........यशोदा

    अब ज़रा होशियारी बरतती हूँ.....
    तेरे नाम के किसी और शख्स से भी
    सुन्दर सोच..
    बेहतरीन कविता
    सादर

    ReplyDelete
  2. जब सारे गुज़ारे हुए पलों की डिटेल्स इतनी बारीकी से याद हैं तो बड़ा मुश्किल सा लगता है उन्हें भुलाना.. इंसान सोचता है ऐसा, पर शायद हो नहीं पाता..
    करोगे याद तो हर बात याद आएगी,
    गुजारते वक्त की हर मौज ठहर जायेगी!!
    /
    कविता बहुत अच्छी है, सचमुच!!

    ReplyDelete
  3. जीवन में मिले अनुभव बहुत कुछ बदल देते हैं.... गहरी अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  4. तेरे नाम के किसी और शख्स से भी
    अंजान बनी रहती हूँ...

    ए मेरी हंसी के दीवाने
    अब कहाँ उस तरह हँस पाती हूँ ...

    शब्दों ने जो लिखा उससे ज्यादा कहा ...बहुत अपना -सा लगा !

    ReplyDelete
  5. इस याद रखने और भूल जाने के बीच भी कुछ उलझा उलझा सा है.... न ही कोई किरण है किसी दीये की और न ही ओस की कोई बूँद... बस ये तो हवाएं हैं जो यादों के साथ बहती रहती हैं....

    ReplyDelete
  6. बंधे थे मन्नत के धागे जो
    हर मंदिर और दरगाह में
    बस उन्हें भी जाकर खोल आये.....
    सब किया धरा चाँद का था,सो
    उसको भी अमावस कर आये....

    अब ज़रा होशियारी बरतती हूँ.....
    तेरे नाम के किसी और शख्स से भी
    अंजान बनी रहती हूँ.....
    अपनी चाहतें और शौक बदल डाले है मैंने...
    अब न सुनती हूँ गज़ल,न शोख रंग पहनती हूँ...

    ऐ मेरी हंसीं के दीवाने! अब न मैं ,उन दिनों की तरह ,खिलखिला के कभी हँसती हूँ.....

    wow....behad khoobsoorat,,,,ye jo instances aapne diye hain....kamaal hain...:)

    ReplyDelete
  7. अच्छा लिखा है !

    ReplyDelete
  8. सब किया धरा चाँद का था,सो
    उसको भी अमावस कर आये....
    अब ज़रा होशियारी बरतती हूँ.....
    तेरे नाम के किसी और शख्स से भी
    अंजान बनी रहती हूँ.....
    अपनी चाहतें और शौक बदल डाले है मैंने...
    अब न सुनती हूँ गज़ल,न शोख रंग पहनती हूँ...

    ऐ मेरी हंसीं के दीवाने! अब न मैं ,उन दिनों की तरह ,खिलखिला के कभी हँसती हूँ.....
    आखिरी बात से हम आपकी इत्तेफाक नहीं रखेंगे ,क्योंकि रूप साम्य और नाम रूप ,समान नाम का होता है अपना एक आकर्षण और फितरतें बदला नहीं करतीं -हुजूमे गम ,मेरी फितरत बदल नहीं सकते ,मैं क्या करूँ ,मुझे आदत है मुस्कुराने की .....बढ़िया प्रस्तुति है आपकी दिल की लगी ,दिल को लगी ,न करो दिल्लगी .....

    ReplyDelete
  9. कोहरा जब छंटता है
    चीजें साफ़-साफ़
    दिखाई देने लगती है
    तजुर्बे बोलते हैं
    इतिहास की भाषा
    ..और अतीत की कहानियां
    जिन्दा होने लगती है.........

    अनुजी
    मै शायद सही कह रहा हूँ न ? ......

    ReplyDelete
  10. यह न आसान था कि तुझे भूल जाना
    वह हंसकर लजाना औ नज़रें छुपाना ...

    ReplyDelete
  11. क्यों कविताएं वियोग से ही निकलती हैं,जिसमें प्रेमिका,प्रेमी अतीत की यादों को कविता,गानों में ढाल कर बेगाने हुए उस शख्स को सदा याद करती हैं;जो एक समय का द्विप था,जिस में बहुत निर्जनता थी,न प्रेमी को और न ही प्रेमिका को एक दूसरे के अलावा उस द्विप पर कोई नज़र नहीं आता था। दोनों का संसार एक दूसरे में सिमट गया था। लेकिन समय और समाज की मार कितनी बेदर्द होती है कि जो कभी एक दूसरे से जुदा न होने के स्वप्न बुनते थे, वही अब एक दूसरे को भुला देना बहुत आसान समझते हैं...कॉफी हाउस में बिताए क्षण,बिल, उसके खुशबू में सने प्रेमपत्र सब नष्ट हो जाते हैं और अतीत गेसूओं में बहने को मजबूर होता है। जिस सपने के सच होने के लिए जिस मंदिर मस्जिद में दुआ मांगी थी...उसकी निशानियां भी मिटा डाली...और चांद जिसमें कभी हमने उसका अक्श देखा किया था,उसको भी अमावस्या की रात में डूबो देना चाहते हैं। ताकि कोई उसकी निशानी बाकी न रह जाए। और पहले जब अपने प्रेमी के नाम के किसी दूसरे शख्स को देखती थी...तो उसकी तस्वीर उभर आती थी...लेकिन अब उनसे अंजान बना रहना ही सही लगता है। हर चाहत और शौक बदल गए हैं न गाने अच्छे लगते हैं,न ग़ज़ल और शौख रंगों से भी तौबा कर ली है। और वह हंसी तो सदा के लिए खो गई है....क्यों हर बार किसी कविता कहानी का अंत एक सा होता है। क्यों दो प्यार करने वालों के सपने हकीकत बनते....???

    ReplyDelete
    Replies
    1. वाह.....
      आपका आभार मनोज जी...

      Delete
  12. ऐ मेरी हंसीं के दीवाने! अब न मैं ,उन दिनों की तरह ,खिलखिला के कभी हँसती हूँ.....
    आप कैसे कर लीं ? कठिनाईयों को कैसे झेलीं ?

    ReplyDelete
  13. बहुत ही सुन्दर कविता..
    कई -कई पंक्तिया तो इतनी
    हृदयस्पर्शी है की क्या कहू..
    बहुत सुन्दर....
    :-)

    ReplyDelete
  14. जीवन सफर मे मिले अनुभव बहुत कुछ सीखा, समझा जाते है... अपनी सी बात लगी..बहुत सुन्दर अनु..

    ReplyDelete
  15. na likhna asan hai na bhulna....sab yaad hai tabhi tho likha hai.....bahut accha laga padh kar di......

    ReplyDelete
  16. अच्छा लिखा है ! गहरी अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  17. वाह ... बेहतरीन ...आभार

    ReplyDelete
  18. अब ज़रा होशियारी बरतती हूँ.....
    तेरे नाम के किसी और शख्स से भी
    अंजान बनी रहती हूँ.....
    अपनी चाहतें और शौक बदल डाले है मैंने...
    अब न सुनती हूँ गज़ल,न शोख रंग पहनती हूँ...बहुत बढ़िया

    ReplyDelete
  19. मुझे सुलाने के खातिर रोज रात आती है,
    हम सो नही पाते,रात खुद सो जाती है,
    पूछने पर दिल से ये आवाज आती है,
    कि आज उन्हें याद कर ले,रात तो रोज आती है,,,,,

    RECENT POST ...: जिला अनुपपुर अपना,,,

    ReplyDelete
  20. न भुलाते हुवे भी भूल जाने का एहसास ... बाखूबी शब्दों का जामा पहनाया है ... लाजवाब ...

    ReplyDelete
  21. अब ज़रा होशियारी बरतती हूँ.....
    तेरे नाम के किसी और शख्स से भी
    अंजान बनी रहती हूँ.....
    ......Waha...kya baat hai. Congratulations!!

    ReplyDelete
  22. कितना आसां है कहना भूल जाना कितना मुश्किल है पर भूल जाना....

    ReplyDelete
  23. लाजवाब कविता.....गागर में सागर जैसा |

    "जितने तारे,उतने फोटो"

    ReplyDelete
  24. बहुत सुंदर अच्छी कविता

    ReplyDelete
  25. तुम्हे भूल जाना है...कह-कह कर सिर्फ तुम्हे ही याद करती हूँ:)
    भावपूर्ण रचना है !!
    सस्नेह

    ReplyDelete
  26. कल्पना में ऐसे भाव लाना सचमुच एक कला है .
    अति सुन्दर .

    ReplyDelete
  27. ऐ मेरी हंसीं के दीवाने! अब न मैं ,उन दिनों की तरह ,खिलखिला के कभी हँसती हूँ.....sab sach kahti ye panktiya..... khubsurat...

    ReplyDelete
  28. ...कितना कुछ कह दिया ,कुछ नहीं करने का हवाला देकर |

    ReplyDelete
  29. कविता बहुत अच्छी है
    खूब लिखते रहना
    पर हंसते भी रहना
    उसे क्यों बंद करना !

    ReplyDelete
  30. उन्हें भूल जाना भी,
    याद करने का इक बहाना है ....
    शुभकामनायें !
    खुश रहें!

    ReplyDelete
  31. बहुत सुंदर अनुजी !

    अच्छा लिखा है …
    भाव सुंदर हों तो कविता सुंदर होती है …
    मंगलकामनाएं …

    ReplyDelete
  32. अब ज़रा होशियारी बरतती हूँ.....
    तेरे नाम के किसी और शख्स से भी
    अंजान बनी रहती हूँ.....
    अपनी चाहतें और शौक बदल डाले है मैंने...
    अब न सुनती हूँ गज़ल,न शोख रंग पहनती हूँ...

    ऐ मेरी हंसीं के दीवाने! अब न मैं ,उन दिनों की तरह ,खिलखिला के कभी हँसती हूँ.....

    वाह...वाह....बहुत खूबसूरत....!!

    ReplyDelete
  33. uff,,,it took my heart...awsome..salute for the last 3 lines..woww

    ReplyDelete
  34. आखिरी पंक्ति जबरन भुलाने की कोशिश का दर्द बयां कर गयी...बहुत खूब...भुलाने की जिद ठीक नहीं...याद रखना चाहिए हर तजुर्बे को...

    ReplyDelete
  35. बंधे थे मन्नत के धागे जो
    हर मंदिर और दरगाह में
    बस उन्हें भी जाकर खोल आये.....
    सब किया धरा चाँद का था,सो
    उसको भी अमावस कर आये....

    बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ ...भूलने की नाकाम सी कोशिश ...

    ReplyDelete
  36. bhulaane kee koshish mein yaad to dil mein bas jaatee hai ,ek tees de jatee hai

    ReplyDelete
  37. " तेरे नाम के किसी और शख्स से भी अंजान बनी रहती हूँ....."
    बहुत सुन्दर भाव ..बड़ी सच बात है यह |

    ReplyDelete
  38. अनु जी, बहुत करुण---

    ReplyDelete
  39. Bahoot sundar bhav Anu Ma'am.
    Lekin bhulna jitna aasan hota hai
    yaad aana v utna hi aasan hota hai

    ReplyDelete
  40. 'laughter therapy' ke immediate baad 'ऐ मेरी हंसीं के दीवाने! अब न मैं ,उन दिनों की तरह ,खिलखिला के कभी हँसती हूँ.....'?:):)
    ..on a serious note an absolutely profound poem, Anu!

    ReplyDelete
  41. भुलाने को तो मै सबको भुलाकर के ही आया था ,
    मगर जाने क्यूँ लगता है किसी की याद है बाकि.
    बहुत अच्छी प्रस्तुती.

    ReplyDelete
  42. very nice ....... thanks for sharing

    ReplyDelete
  43. संयोग वियोग में उपालंभ , कविता की आत्मा होती है . आपने बखूबी इसे उकेरा है .सुदर

    ReplyDelete
  44. दिल को छू गए कविता के भाव ---बहुत अच्छी प्रस्तुति

    ReplyDelete
  45. अब ज़रा होशियारी बरतती हूँ.....
    तेरे नाम के किसी और शख्स से भी
    अंजान बनी रहती हूँ.....
    अपनी चाहतें और शौक बदल डाले है मैंने...
    अब न सुनती हूँ गज़ल,न शोख रंग पहनती हूँ...
    ऐ मेरी हंसीं के दीवाने! अब न मैं ,
    उन दिनों की तरह ,खिलखिला के कभी हँसती हूँ...
    अनु जी, बहुत खूबसूरती के साथ बुना गया शब्दजाल है...
    बधाई स्वीकार करें

    ReplyDelete
  46. Painfully beautiful, last two lines are painful and profound. Love has a lasting impact on us.

    ReplyDelete
  47. man ko bhigo gayi aapki kavita ! shabd nahi hai iske liye . facebook par share kar rha hoon . shukriya

    ReplyDelete
  48. बूंद-बूंद इतिहास पर मेरी नई पोस्ट नई कविता की प्रवृत्तियां पर आप सादर आमंत्रित हैं।

    -मनोज भारती

    ReplyDelete
  49. very good thoughts.....
    मेरे ब्लॉग

    जीवन विचार
    पर आपका हार्दिक स्वागत है।

    ReplyDelete
  50. अनु जी.
    सुंदर रचना
    आंच पर आपकी कहानी की समीक्षा पढ़ी
    बधाई आपको, वहाँ मेरी टिप्पणी दिखाई नहीं दी
    इसलिए यहाँ दे रही हूँ सुंदर कहानी ...

    ReplyDelete
  51. thumbs up for such a wonderful & interesting post

    visit : www.SwapnilsWorldOfWords.blogspot.com

    ReplyDelete
  52. बहुत सुंदर !:) एक गीत की पंक्तियाँ याद आ गयीं...

    "कभी मिलेंगे जो रास्ते में..तो मुँह फिरा के पलट पड़ेंगे..,
    कभी सुनेंगे..जो नाम तेरा...
    तो चुप रहेंगे...नज़र झुकाए...." :-)

    ReplyDelete
  53. सब किया धरा चाँद का था,सो
    उसको भी अमावस कर आये....
    bahut lajawab kavita hai anu ji!

    ReplyDelete
  54. वाह अनुजी झकझोर के रख दिया आपकी रचना ने ...मुझे ख़ुशी है मैं वह बदनसीब नहीं हूँ .....!

    ReplyDelete
  55. भुलाने की नाकाम कोशिश करती हुई ...यादों मे लिपटी ..बहुत सुंदर भावपूर्ण कविता ...


    ReplyDelete
  56. बहुत अच्छी प्रस्तुति..

    ReplyDelete
  57. अनुलता जी नमस्कार...
    आपके ब्लॉग 'my derams n expressions' कविता भास्कर भूमि में प्रकाशित किए जा रहे है। आज 24 अगस्त को 'असान था तुझे भूल जाना...' शीर्षक के कविता को प्रकाशित किया गया है। इसे पढऩे के लिए bhaskarbhumi.com में जाकर ई पेपर में पेज नं. 8 ब्लॉगरी में देख सकते है।
    धन्यवाद
    फीचर प्रभारी
    नीति श्रीवास्तव

    ReplyDelete
  58. काश, किसी को भूलना इतना सहज होता जितना सहज होता है याद करना... बेहद भावपूर्ण, शुभकामनाएँ.

    ReplyDelete
  59. बहुत अच्छी पोस्ट। मरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है। आभार।

    ReplyDelete
  60. यादों का सफर यूँ ही खूबसूरती से चलता रहे ....

    ReplyDelete
  61. आपकी किसी पुरानी बेहतरीन प्रविष्टि की चर्चा मंगलवार २८/८/१२ को चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा चर्चामंच पर की जायेगी मंगल वार को चर्चा मंच पर जरूर आइयेगा |धन्यवाद

    ReplyDelete
  62. bahut sare naye shabdon ka pryog bahut hi sunder tareeke se kiya hai.
    jaise -
    वो कॉफी के कुछ बिल जलाए
    और खत खुशबुओं वाले,
    फाड़े और हवा में उडाये..
    मुस्कुरा कर कुछ गम चोरी चोरी
    अश्कों में बहाए......
    बंधे थे मन्नत के धागे जो
    हर मंदिर और दरगाह में
    बस उन्हें भी जाकर खोल आये.....
    सब किया धरा चाँद का था,सो
    उसको भी अमावस कर आये....

    kahna kitna aasan hai lekin is asaan ko sach me aasaan naam dena hi kitna mushkil hai.

    ek gane k bol apki rachna padh kar yaad aa gaye...

    kitna aasaan hai kahna bhool jao...
    kitna mushkil hai magar bhool jaana.

    ReplyDelete
  63. क्या बात है, हर पंक्ति दिल को छू लेने वाली । पर ये सब इतना आसाँ कहाँ होता है ।

    ReplyDelete
  64. jab bhi aap likhti hai, mujhe aisa lagta hai aapne mere man ki baat keh di. bhot jald main apna pehle post likhungi.

    Itna aasan nahin hai kisi ko bhul jana

    Udta panchhi.

    ReplyDelete
  65. Jab bhi aap likhte hai, aisa lagta hai aapne mere maan ki baat kavita me piro di. Maine abhi likhana shuru nahin kiya, par bhot jalad likhne wali hu.

    Uddta Panchhi.

    ReplyDelete
  66. It's not easy to forget someone...

    ReplyDelete
  67. यादें, चाहे याद रहें या भूल जाएं, जिंदगी का एक अहम हिस्सा होती हैं।
    सुंदर कविता।

    ReplyDelete
  68. सुन्दर कविता

    ReplyDelete
  69. काश कि इतना ही आसान होता भुला पाना..!! न दर्द कम होता है.. न सुकून आता है..
    बहरहाल, कविता बहुत अच्छी है अनु दी.
    सादर
    मधुरेश

    ReplyDelete
  70. बहुत ही भाव-प्रवण कविता। मेरे ब्लॉग " प्रेम सरोवर" के नवीनतम पोस्ट पर आपका स्वागत है।

    ReplyDelete
    Replies
    1. waah anu ji bahut sundar ............aapki abhivyakti me aaj ek lag hi anubhuti hui .........badhai aapko ऐ मेरी हंसीं के दीवाने! अब न मैं ,उन दिनों की तरह ,खिलखिला के कभी हँसती हूँ.....yah panktiyaan dil ko chu gayi yah ato mujhe apni si lagi jis hansi ko ab mai dhoondh rahi hoon

      Delete
  71. सबसे पहले मेरे ब्लॉग उद्गम पर निरंतर नज़र रखने के लिए एवं अनमोल, प्रेरित करती सराहना के लिए आभार एवं धन्यवाद |

    हमेशा की तरह आपकी कविता बौछार की तरह निर्मल और सौम्य लगी, निम्न पंक्तियों ने दिल छू लिया..बस युही लिखते रहिये...|

    थे जो तेरी मोहब्बत के दस्तावेज,
    वो कॉफी के कुछ बिल जलाए
    ..
    ..
    सब किया धरा चाँद का था,सो
    उसको भी अमावस कर आये...
    ..
    ..
    ऐ मेरी हंसीं के दीवाने! अब न मैं ,उन दिनों की तरह ,खिलखिला के कभी हँसती हूँ.

    ReplyDelete
  72. post published.

    Udaari Dosti di
    Flight of Friendship.


    ReplyDelete
  73. बहुत सुंदर, बेहतरीन.............बहुत दिनों बाद इतनी सुंदर रचना पढ़ी, आभार...

    ReplyDelete
  74. काफी भावपूर्ण कविता...मन की टीस को व्यक्त करती..
    यादें कभी ज़हन का दामन नहीं छोड़ती.....

    ReplyDelete
  75. yah kya likh daala anu dear tumne .behtreen ..sach hai ..par khilkhila ke hansne par samjhouta ???

    ReplyDelete
  76. bahut sundar abhivyakti....dard jab had se gujar jaata hai..to panno pe ubhar aata hai...

    ReplyDelete
  77. bahut sundar abhivyakti...dard jab had se gujar jaata hai to panno mei syahi ban ke ubhar aata hai!!

    ReplyDelete
  78. अब ज़रा होशियारी बरतती हूँ.....
    तेरे नाम के किसी और शख्स से भी
    .
    बढ़िया पंक्तियाँ |

    सादर

    ReplyDelete

नए पुराने मौसम

मौसम अपने संक्रमण काल में है|धीरे धीरे बादलों में पानी जमा हो रहा है पर बरसने को तैयार नहीं...शायद उनकी आसमान से यारी छूट नहीं रही ! मोह...