इन्होने पढ़ा है मेरा जीवन...सो अब उसका हिस्सा हैं........

Thursday, June 20, 2013

उदासी

उदासियाँ घर कर लेती हैं मन के कोनों में बिना शोर शराबे के..
उदासियों की आमद होती है बड़े चुपके से,क्यूंकि इनके पैरों की आहट नहीं होती.
उदासियाँ अपने पैरों पर चिपका लेती हैं मोहब्बत के पंख,मोहब्बत के मर जाने के बाद.....
अपने नर्म पंजों के भीतर छिपाए रखती हैं कई दंश,ये उदासियाँ.....
उदासियों को आदत होती है बिन बुलाये आने की और अनाधिकृत कब्ज़ा जमाने की.....एक बार आने के बाद ये पैर पसारती हैं और फैल जाती हैं हर जगह...दीवारों पर टंगी सुन्दर तस्वीरों में,बारिश की बूंदों में,बिस्तर की सलवटों पर,संगीत की धुनों पर और डायरियों के पन्नों पर भी....
उदासी छा जाती है आसमान पर कुहासा बन कर....चेहरे पर झुर्रियाँ बन कर....रिश्तों की दरारों में भर जाती हैं उदासियाँ......
तन्हाई और उदासियों में बड़ी यारियां हैं...
उदासियाँ बात नहीं करतीं.....उदासियाँ अपने साथ लाती हैं खामोशियाँ !!!

उदासियाँ बन जाती हैं , कुछ न लिख पाने की वजह और कभी अनवरत लिखते जाने की...................
~अनु ~

Tuesday, June 11, 2013

राग-विराग

मेरे आँगन में
पसरा एक वृक्ष
वृक्ष तुम्हारे प्रेम का
आलिंगन सा करतीं शाखें
नेह बरसाते
देह सहलाते
संदली गंध से महकाते पुष्प
कानों में घुलता सरसराते पत्तों का संगीत,
जड़ें इतनी गहरी
मानों पाताल तक जा पहुंची हों
सम्हाल रखा हो घर को अपने कांधों पर.

मगर ये तब की बात थी.....

अब आँगन में बिखरे हैं सूखे पत्ते
जिनकी चरमराहट ही एकमात्र संवाद है मेरा वृक्ष से
तने खोखले हैं
खुरदुरा स्पर्श ...
जड़ों ने दीवारों में दरार कर दी है

ऐसा नहीं कि प्रेम के अभाव में जीवन नहीं
मगर
बड़ा त्रासद है
प्रेम का होना और फिर न होना ....
~अनु ~


Wednesday, June 5, 2013

कि व्यर्थ न जाए एक भी आहुति......(विश्व पर्यावरण दिवस )

एक आकाशवाणी
और बीज अंकुरित हुआ
गर्भ धारण किया माँ ने
नेह सिंचित उस बीज की
पौध हूँ मैं!
मेरी नसों की नीलाई पर
तुम्हारा अधिकार है माँ
मेरे ह्रदय का हर एक  स्पंदन
तुम्हारे व्रत और अनुष्ठानों का प्रतिफल है.
तुम्हारे ओज से ही
मेरा अस्तित्व है
घने अन्धकार भरे इस संसार में...
माँ !
आभारी हूँ तुम्हारी
इस जीवन को पाकर
कृतज्ञ हूँ
वचनबद्ध हूँ सदा के लिए
कि व्यर्थ न जाए तुम्हारी एक भी आहुति ....
करबद्ध हूँ
कर्तव्यों के निर्वाह के लिए,
प्रसन्न रहने के लिए,
जीते रहने के लिए,
कि अब तुम्हारे जीवनदीप की बाती का तेल
मैं हूँ !!!

[सृष्टिकर्ता ने हमें ये हरी भरी पृथ्वी सौंपी जैसे पिता बच्चों के सुपुर्द कर जाते हैं उनकी माँ....जिससे वे चुका सकें सभी ऋण.....]
~अनु ~

Thursday, May 30, 2013

"आत्म""हत्या !!!!

कूद पड़ी वो
नीचे
चौथे माले से
(और ऊपर जाना शायद वश में न रहा होगा...)
लहुलुहान पड़ी काया से लिपट कर
रो पड़ा हत्यारा पिता
जानता था
उसकी महत्त्वाकांक्षाओं ने ही
धक्का दिया है उसे.
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
पिता ने सम्बन्ध तोड़ लिए पुत्र से
नहीं चाहता कि मुखाग्नि भी दे बेटा
कि बेटा नालायक,निकम्मा, नाकारा है
कहा नहीं मानता....

गाँव के कूएं में
लाश मिली बेटे की
बेटा नहीं चाहता
कि मुखाग्नि दे पिता को
बेटा मानता है कहा !!
~अनु ~

माता-पिता की उम्मीदों पर खरा न उतर पाने का दुःख बच्चों को होता ही है,उस पर उलाहने देकर उनकी हत्या क्यूँ करते हैं वो....एक सवाल है पालकों से....स्वयं से भी !!!

Saturday, May 25, 2013

नदी

नदी
मांग रही है  मुझ से
मेरे आँसू
कि वो समंदर होना चाहती है
बिना समंदर से मिले.
नदी एक स्त्री है
हर स्त्री की तरह घायल
अपने जख्म खुद चाटती हुई...
जानती है जुटा लेगी
पर्याप्त खारापन
कई और स्त्रियों के साथ मिल कर,
जो बहा रहीं हैं अपने स्वेद और अश्रु

बाहरी आवरण के भीतर
सब की सब स्त्रियाँ खारी हैं
कि सबके दुःख और दर्द एक से है !!

निष्कंप बहती रही नदी
जब स्त्रियाँ डूबी नदी में,
और तट पर लगे वृक्ष कांप उठे
पुष्प वर्षा हुई!!

~अनु ~

Wednesday, May 22, 2013

नाकाम इश्क

एक तूफ़ान की तरह आया था तेरा इश्क
अपनी सारी हदें लांघता हुआ
डुबो डाला था मेरा सारा वजूद.
नामंजूर था मुझे खुद को खो देना
नामंजूर था मुझे तेरा नमक!
सो लौटा दिया मैंने वो तूफ़ान वापस समंदर को
बस रह गए कुछ मोती, अटके मेरी पलकों पर
जो लुढ़क आये गालों तक...

कि नाकाम इश्क की निशानियाँ भी कहीं सहेजी जाती हैं !!

~अनु ~


Saturday, May 18, 2013

हैंडल विथ केयर

मैंने पहुंचाया था प्रेम तुम तक,
सम्हाल कर ,
एहतियात से पैक करके..
सभी आवश्यक निर्देशों के साथ
कि -
ये हिस्सा ऊपर (दिस साइड अप)
हैंडल विथ केयर
ब्रेकेबल
डु नॉट रोल और फोल्ड!!
मगर देखो न
आज छिन्न भिन्न है हमारा प्रेम...
बिखर गया कतरा कतरा
तुम्हारी लापरवाही से.

आज समझी कि
प्रेम के दिए जाने में कोई गलती नहीं
न ही प्रेम के किये जाने में है....
प्रेम को सही तरीके से स्वीकारा जाना,
इसे स्नेह से सहेजना भी ज़रूरी है.

रिश्तों के टूटने की जवाबदेही सिर्फ एक की नहीं...
सिर्फ मेरी नहीं...कतई नहीं !!!
~अनु ~



नए पुराने मौसम

मौसम अपने संक्रमण काल में है|धीरे धीरे बादलों में पानी जमा हो रहा है पर बरसने को तैयार नहीं...शायद उनकी आसमान से यारी छूट नहीं रही ! मोह...