इन दिनों,
सांझ ढले,आसमान से
परिंदों का जाना
और तारों का आना
अच्छा नहीं लगता
गति से स्थिर हो जाना सा
अच्छा नहीं लगता.....
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
इन दिनों,
कुछ दिनों में
बीत गए कितने दिन
मानों
ढलें हो
कई कई सूरज
हर एक शाम...
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
इन दिनों
दहका पलाश
दर्द देता है.
भरमाता है
इसका चटकीला रंग
जीवन की झूठी तसल्ली देता सा....
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
इन दिनों,
तितलियाँ नहीं करतीं
इधर का रुख...
न रंग है न महक है
इधर इन दिनों...
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
इन दिनों,
ज़िन्दगी के हर्फ़
उल्टे दिखाई देते हैं
तकदीर आइना दिखा गयी है
ज़िन्दगी को इन दिनों !!
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
इन दिनों ,
चुन रही हूँ कांटे
जो चुभे थे तलवों पर
तुम तक आते आते...
तुम्हारे ख़याल से परे
रख रही हूँ अपना ख़याल
इन दिनों...
~अनु ~
सांझ ढले,आसमान से
परिंदों का जाना
और तारों का आना
अच्छा नहीं लगता
गति से स्थिर हो जाना सा
अच्छा नहीं लगता.....
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इन दिनों,
कुछ दिनों में
बीत गए कितने दिन
मानों
ढलें हो
कई कई सूरज
हर एक शाम...
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इन दिनों
दहका पलाश
दर्द देता है.
भरमाता है
इसका चटकीला रंग
जीवन की झूठी तसल्ली देता सा....
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इन दिनों,
तितलियाँ नहीं करतीं
इधर का रुख...
न रंग है न महक है
इधर इन दिनों...
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इन दिनों,
ज़िन्दगी के हर्फ़
उल्टे दिखाई देते हैं
तकदीर आइना दिखा गयी है
ज़िन्दगी को इन दिनों !!
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इन दिनों ,
चुन रही हूँ कांटे
जो चुभे थे तलवों पर
तुम तक आते आते...
तुम्हारे ख़याल से परे
रख रही हूँ अपना ख़याल
इन दिनों...
~अनु ~
