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मेरी लिखी कहानी - महक मिट्टी की - याद शहर में 92.7 big fm

आजकल लिख रही हूँ कहानियाँ  नीलेश मिश्रा के याद शहर के लिए....
92.7 BIG FM में ये कहानियां पढ़ते हैं नीलेश अपनी रूहानी आवाज़ में...................
आप भी सुनिये मेरी लिखी कहानी "महक मिट्टी की "

लिंक दे रही हूँ.....पढने से ज्यादा आपको सुनने में आनंद आएगा !

https://www.youtube.com/watch?v=cvPYY9jqcmo&index=2&list=PLRknjC5MPHa29hPAM0Mg1IfFEUuFkqeBx


बेटियाँ

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दुष्यंत संग्रहालय, भोपाल में सरोकार संस्था द्वारा बेटियों पर आधारित समारोह - 


मेरी जिस कविता को सम्मान और सराहना मिली वो साझा कर रही हूँ.....


" भेदभाव "

मिट्टी नहीं करती भेदभाव
अपने भीतर दबे बीजों पर...
होते हैं सभी बीज अंकुरित
और लहलहाते हैं
फूलते हैं, खिलते हैं.... मनुष्य ऐसा नहीं है !
वो मसल देता है
उन बीजों को
जिनसे जन्मती हैं बेटियाँ ... ईश्वर ने मनुष्य को बुद्धि दी,
मनुष्य ने
स्वयं को ईश्वर बना लिया | ईश्वर के आंसुओं से भीगती हैं मिट्टी
अन्खुआते हैं बीज,
मनुष्य का मन नहीं भीगता
न आंसुओं से न रक्त से !

बेटियाँ

बेटियाँ अलग होती हैं

पहला निवाला
घी वाला
उसका नहीं होता अक्सर
मगर
उसे आता है ये भूल जाना
और तोडती है वो अपने निवाले खुद,
हर कौर उसका अपना !

उसके हिस्से आती है पुरानी यूनिफोर्म
पढ़ती है पुरानी किताबों से
फिर लिखती है नयी कहानियाँ
उसके हस्ताक्षर अब सब जानते हैं !

उसके जन्म के समय
नहीं खाए माँ ने लड्डू,
नहीं बांटी मिठाई पिता ने/दादी ने
मगर बेटियाँ नहीं याद रखतीं ये सब...
लड्डुओं की बड़ी टोकरी
पहुँचती है मायके
हर सावन
बिना नागा !

सच !! बेटियाँ अलग होती हैं !!

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