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Showing posts from February, 2013

प्रेम का रसायन......

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जंगली फूलों सी लड़की
मुझे तेरी खुशबू बेहद पसंद है
उसने कहा था...

"मुझे तेरा कोलोन ज़रा नहीं भाता"
बनावटी खुशबु वाले उस लड़के से
मोहब्बत करती
लडकी ने मन ही मन सोचा....

(इश्क के नाकाम होने की क्या यही वजह होगी ??)


लड़का प्रेम में था
उस महुए के फूल जैसी लडकी के.
वो उसे पी जाना चाहता था शराब की तरह
लडकी को इनकार था  खुद के सड़ जाने से....

लड़का उसे चुन कर
हथेली में समेट लेना चाहता था
हुंह.....वो छुअन !
लड़की सहेजना चाहती थी
अपने चम्पई रंग को.

लड़का मुस्कुराता उसकी हर बात पर,
लड़की खोजती रही
एक वजह-
उसके यूँ बेवजह मुस्कुराने की....


(इश्क के नाकाम होने की वजहें बड़ी बेवजह सी होतीं हैं.....)

अनु





my dreams 'n' expressions

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आज मेरा ये ब्लॉग एक साल का हो गया.....
घुटनों घुटनों सरकते आज अपने पैरों पर चल रहा है...डगमगाते क़दमों से ही सही :-)

ब्लॉग की पहली पोस्ट की पहली पंक्तियाँ यूँ थीं-

आपके सामने है मेरे दिल का एक पन्ना ....
धीरे धीरे सारी किताब पढ़  लेंगे...तब जान भी जायेंगे मुझे....कभी  चाहेगे...कभी नकारेंगे... यही तो जिंदगी है...


ख़ुशी इस बात की है कि आप सभी ने मुझे बेहद स्नेह दिया और दिल से स्वीकार किया.
इस एक बरस में मैंने अपनी नयी पुरानी सभी रचनाएं पाठकों के सुपुर्द कर दीं.सभी ने सराहा तो आत्मविश्वास और बढ़ा.
अभी एक रोज़ मैंने रश्मि प्रभा जी से कहा कि अपनी कविताओं में मेरा विश्वास आपकी वजह से ही है दी....तब उनका जवाब था अनु -
कविता व्यक्ति विशेष का एक अस्तित्व है ... उसे हम आशीष देते हैं,पर यदि वह सीखता भी है तो यह उसके ही व्यक्तित्व का कमाल है.
आभारी हूँ रश्मि दी का , जिन्होंने सदा मेरा आत्मविश्वास बढ़ाया.

यहाँ मैनें अपने दिल की बातें लिखीं,कुछ इसका उसका कहा भी लिख डाला,कभी प्रेम लिखा कभी आँसू....कभी वसंत कभी पतझर.छंद लिखे,छंद मुक्त लिखा....कभी नज़्म लिखी,कोई शेर कहा...यहाँ तक की कहानियाँ भी लिख डालीं.
एक कहानी …

प्रेम में होने का अर्थ.....

मैं प्रेम में हूँ
इसका सीधा अर्थ है
मैं नहीं हूँ
कहीं और.

प्रेम स्वार्थी होता है
ये दीवारें खड़ी करता है
प्रेमियों और शेष दुनिया के बीच
और जब ये नहीं होता है
तब ये दीवार गिरती नहीं
बस,सरक कर
आ जाती है
दोनों प्रेमियों के बीच.


मैं प्रेम में हूँ
इसका अर्थ है
मैं उड़ रहा हूँ...

प्रेम पंख देता है
प्रेमी पतंग हो जाते हैं.
और जब ये नहीं रहता
तब लड़ जातें हैं पेंच...
कट जाती हैं पतंगें
आपस में ही उलझ कर.

मैं प्रेम में हूँ .....इसके कई अर्थ है.....और सभी निरर्थक.....
अनु


मेरा अधिकार.....

हे सृष्टिकर्ता !
तुम दाता हो जो तुमने है दिया मुझको  वो मेरा है कोई कैसे छीन  सकता है मुझसे जो मेरा है..........
कर दे वो मुझको बेघर ,बेशक छीन ले मेरे सर से छत पर जगमग तारों से भरा वो आसमान तो मेरा है ......
न मिलें मुझे वो गहने वो हीरे-पन्ने 
जो औरों ने पहने.. मगर सुबह-सुबह जो झरा वो हरसिंगार तो मेरा है......
न हो रोशन 
मेरे घर का कोई कमरा काल कोठरी सा हो बेशक जीना.. मगर हों सूरज की किरणें जहाँ पसरी वो उजला कोना तो मेरा है.....
कर दे वो महरूम मुझे 
हर रंग से हर इत्र और कीमती ढंग से पर गुलमोहर से लदी वो सुर्ख टहनी वो रजनीगंधा तो मेरा है....
कर सकता है वो मुझे
मजबूर सदा चुप रहने को न किसी की सुनने को 
न खुद कहने को... मगर मेरे मन से मेरा संवाद तो मेरा अपना है...
हे प्रभु ! तुम सुनो मेरी मैं सुनु तुम्हें 
ये अधिकार तो मेरा है ये सौभाग्य तो मेरा है.....
अनु
[एक नारी मन,मेरी अपरिपक्व कलम से ]





अनचाहा कोई एक ख़याल......

कितना सोचते हो तुम ? आखिर कितनी मोहब्बतें मुक्कमल मकाम पाती हैं आजकल ? क्यूँ उसका ख़याल अब तक संजो रखा है तुमने? कुछ तो कहो....यूँ घुटते न रहो...मेरा कहा मानो ,भूल जाओ उसे...इक वही तो नहीं इस सारे जहां में??? उसके ख़याल से बाहर निकलो तो क्या पता कोई करीब ही दिख जाए जो तुमसे न जाने कब से इकतरफा इश्क किये जा रहा हो !!!
जानते नहीं ये दुनिया इमोशनल फूल्स से भरी हुई है !

तेरे माथे की
सलवटों पर
करवटें बदलता कोई ख़याल....
जानती हूँ,
मचाता कोलाहल/रात भर सोता नहीं
कंपकपाते होंठ/ कुछ कहते नहीं
आँखें तकती हैं
शून्य में कहीं/बहती नहीं
चेहरे पर घूमता
ख़याल
धीरे से उतर कर
दफ़न हो जाता है 
तेरे दिल में कहीं
और तुझे 
यूँ ही दिए जाता है
बे-करारियाँ ...


सुनो!!बुरे ख़याल बड़े ज़िद्दी और ढीठ होते हैं.बिना भाड़ा दिए डटे रहने वाले किरायदारों की तरह....याने दिलो दिमाग तुम्हारा और कब्ज़ा उनका......उनसे थोड़ी सख्ती करो मेरे यार,कि और कोई घर कर पाए  तेरे दिल में.
(मेरी डायरी का एक पन्ना,कभी उसकी सूरत देखते हुए ही लिखा था..........काश कि उसने पढ़ा होता )

अनु