इन्होने पढ़ा है मेरा जीवन...सो अब उसका हिस्सा हैं........

Tuesday, February 26, 2013

प्रेम का रसायन......

जंगली फूलों सी लड़की
मुझे तेरी खुशबू बेहद पसंद है
उसने कहा था...

"मुझे तेरा कोलोन ज़रा नहीं भाता"
बनावटी खुशबु वाले उस लड़के से
मोहब्बत करती
लडकी ने मन ही मन सोचा....

(इश्क के नाकाम होने की क्या यही वजह होगी ??)


लड़का प्रेम में था
उस महुए के फूल जैसी लडकी के.
वो उसे पी जाना चाहता था शराब की तरह
लडकी को इनकार था  खुद के सड़ जाने से....

लड़का उसे चुन कर
हथेली में समेट लेना चाहता था
हुंह.....वो छुअन !
लड़की सहेजना चाहती थी
अपने चम्पई रंग को.

लड़का मुस्कुराता उसकी हर बात पर,
लड़की खोजती रही
एक वजह-
उसके यूँ बेवजह मुस्कुराने की....


(इश्क के नाकाम होने की वजहें बड़ी बेवजह सी होतीं हैं.....)

अनु





Saturday, February 23, 2013

my dreams 'n' expressions

आज मेरा ये ब्लॉग एक साल का हो गया.....
घुटनों घुटनों सरकते आज अपने पैरों पर चल रहा है...डगमगाते क़दमों से ही सही :-)

ब्लॉग की पहली पोस्ट की पहली पंक्तियाँ यूँ थीं-

आपके सामने है मेरे दिल का एक पन्ना ....
धीरे धीरे सारी किताब पढ़  लेंगे...तब जान भी जायेंगे मुझे....कभी  चाहेगे...कभी नकारेंगे... यही तो जिंदगी है...


ख़ुशी इस बात की है कि आप सभी ने मुझे बेहद स्नेह दिया और दिल से स्वीकार किया.
इस एक बरस में मैंने अपनी नयी पुरानी सभी रचनाएं पाठकों के सुपुर्द कर दीं.सभी ने सराहा तो आत्मविश्वास और बढ़ा.
अभी एक रोज़ मैंने रश्मि प्रभा जी से कहा कि अपनी कविताओं में मेरा विश्वास आपकी वजह से ही है दी....तब उनका जवाब था अनु -
कविता व्यक्ति विशेष का एक अस्तित्व है ... उसे हम आशीष देते हैं,पर यदि वह सीखता भी है तो यह उसके ही व्यक्तित्व का कमाल है.
आभारी हूँ रश्मि दी का , जिन्होंने सदा मेरा आत्मविश्वास बढ़ाया.

यहाँ मैनें अपने दिल की बातें लिखीं,कुछ इसका उसका कहा भी लिख डाला,कभी प्रेम लिखा कभी आँसू....कभी वसंत कभी पतझर.छंद लिखे,छंद मुक्त लिखा....कभी नज़्म लिखी,कोई शेर कहा...यहाँ तक की कहानियाँ भी लिख डालीं.
एक कहानी "केतकी" की समीक्षा के लिए मनोज जी और सलिल दादा की आभारी हूँ.

मेरा ब्लॉग 331 पाठक/रचनाकार फोलो करते हैं ,जिनके द्वारा की गयी टिप्पणियां मुझे ख़ास होने का एहसास कराती हैं.अब तक 5840 टिप्पणियां हैं.जिनमे स्नेह है,मार्ग दर्शन है,सीख है.
अब तक 122 रचनाएं पब्लिश कर चुकी हूँ,और 33,875 से ज्यादा विज़िटर्स blog देख चुके हैं.अलेक्सा रैंक पहुंची 47039 तक,इंडी रैंक हुई 82....
ये सारे डाटा मुझे बच्चों को सफलता पर मिलने वाली चॉकलेट की तरह लगते हैं :-) क्या करूँ...उम्र बढ़ती है मगर नादानियां जाती नहीं.
जब पहली बार नयी पुरानी हलचल में मेरी रचना को स्थान मिला था तो मैंने जाने किन किन लोगों को फोन करके बताया था.वैसे ही आभारी हूँ चर्चा मंच,blogवार्ता,ब्लॉग बुलेटिन,वटवृक्ष की भी.

ये सब एक सपने सा लगता है.....मेरा मानना है कि मैं कितना भी अच्छा लिखती मगर सुधि पाठकों का प्रतिसाद न मिलता तो कभी प्रसन्नता और संतुष्टि नहीं मिलती.
आभारी हूँ सभी पाठकों का.
जिनसे आशीर्वाद और मार्गदर्शन मिला-(ये उम्र में बड़े हो ये ज़रूरी नहीं :-)
आदरणीय संगीता स्वरुप दी,सलिल वर्मा जी,महेश्वरी कनेरी जी,मनोज जी,ऋता जी,अनुपमा त्रिपाठी जी,संतोष त्रिवेदी जी,रूपचन्द्र शास्त्री जी,रविकर जी,संध्या शर्मा जी,मोनिका जी,डॉक्टर दराल,विभा जी,गिरिजा कुलश्रेष्ठ जी,कविता रावत जी,दिगंबर नसवा जी,सरस दरबारी जी,कैलाश शर्मा जी,धीरेन्द्र जी,अर्चना दी,सतीश सक्सेना जी,सुमन जी,जयकृष्ण राय तुषार जी,ओंकार जी,अमित अग्रवाल(अमित आग),महेंद्र श्रीवास्तव जी, अशोक सलूजा जी,साधना जी,जेन्नी जी,राजेश कुमारी जी,

और जिनसे  मित्रवत स्नेह और मान पाया  उनकी भी आभारी हूँ.
यशवंत माथुर,सदा(सीमा सिंघल)आशीष जी,अरुण,देवेन्द्र पाण्डेय,अमित और निवेदिता,शिखा वार्ष्णेय,रश्मि रविजा,सोनल रस्तोगी,वंदना गुप्ता,पारुल,माहि,यशोदा,निहार रंजन,मदनमोहन सक्सेना जी,दीपिका रानी,नीलिमा शर्मा,आराधना (मुक्ति),मीनाक्षी मिश्रा,संध्या जैन.रोहितास,राहुल-दिल से,सुषमा-आहुति,रीना मौर्य,शेखर सुमन,मधुरेश,मोनाली,आकाश मिश्रा,शालिनी,रेवा, अंजू चौधरी,रचना दिक्षित जी, अमृता तन्मय जी,अनिता आनिया,काजल कुमार,दिलबाग विर्क जी,राधारमण जी,निशा महाराणा,पूनम,राजू पटेल जी,शशि पुरवार.शिवम मिश्र,अंकुर जैन.

हो सकता है किसी  नाम का ज़िक्र  मुझसे छूट गया हो तो माफ़ करें......ज़िक्र न होना, मोहब्बत में कमी हो ऐसा तो नहीं कहता :-)
इनके अलावा मेरे माता पिता और परिवार जनों का सदा प्रोत्साहन रहा.जिनमें पल्लवी,डॉ.अर्चना आर्य ,नीलम वर्मा,रश्मि कौशल बवेजा बाकायदा अपनी उपस्थिति भी दर्ज कराते रहे.
ब्लॉग लिखने की वजह से मुझे संपादकों के संपर्क में आने का मौका मिला और 3 कविता संग्रहों में मेरी कवितायें छपीं
१- ह्रदय तारों का स्पंदन (सत्यम शिवम् )
2-खामोश ख़ामोशी और हम (रश्मि प्रभा जी.)
3-शब्दों के अरण्य में (रश्मि प्रभा जी/हिन्द युग्म)
इसके अलावा पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित होती रही हैं.

आशा है आप सभी का स्नेह और मार्गदर्शन मुझे सदा मिलता रहेगा.......आपके बिना मेरे भीतर के रचनाकार का अस्तित्व अधूरा है.
ह्रदय से आभार.
आपकी अनु
(अनुलता राज नायर)

Tuesday, February 19, 2013

प्रेम में होने का अर्थ.....

मैं प्रेम में हूँ
इसका सीधा अर्थ है
मैं नहीं हूँ
कहीं और.

प्रेम स्वार्थी होता है
ये दीवारें खड़ी करता है
प्रेमियों और शेष दुनिया के बीच
और जब ये नहीं होता है
तब ये दीवार गिरती नहीं
बस,सरक कर
आ जाती है
दोनों प्रेमियों के बीच.


मैं प्रेम में हूँ
इसका अर्थ है
मैं उड़ रहा हूँ...

प्रेम पंख देता है
प्रेमी पतंग हो जाते हैं.
और जब ये नहीं रहता
तब लड़ जातें हैं पेंच...
कट जाती हैं पतंगें
आपस में ही उलझ कर.

मैं प्रेम में हूँ .....इसके कई अर्थ है.....और सभी निरर्थक.....
अनु


Tuesday, February 12, 2013

मेरा अधिकार.....

हे सृष्टिकर्ता !
तुम दाता हो
जो तुमने है दिया मुझको 
वो मेरा है
कोई कैसे छीन  सकता है मुझसे
जो मेरा है..........

कर दे वो मुझको बेघर ,बेशक
छीन ले मेरे सर से छत
पर जगमग तारों से भरा वो
आसमान तो मेरा है ......

न मिलें मुझे वो गहने
वो हीरे-पन्ने 
जो औरों ने पहने..
मगर सुबह-सुबह जो झरा वो
हरसिंगार तो मेरा है......

हो रोशन 
मेरे घर का कोई कमरा
काल कोठरी सा हो बेशक जीना..
मगर हों सूरज की किरणें जहाँ पसरी
वो उजला कोना तो मेरा है.....

कर दे वो महरूम मुझे 
हर रंग से
हर इत्र और कीमती ढंग से
पर गुलमोहर से लदी वो सुर्ख टहनी
वो रजनीगंधा तो मेरा है....

कर सकता है वो मुझे 
मजबूर सदा चुप रहने को
न किसी की सुनने को 
न खुद कहने को...
मगर मेरे मन से मेरा
संवाद तो मेरा अपना है...

हे प्रभु !
तुम सुनो मेरी
मैं सुनु तुम्हें 
ये अधिकार तो मेरा है
ये सौभाग्य तो मेरा है.....
अनु

[एक नारी मन,मेरी अपरिपक्व कलम से ]





Tuesday, February 5, 2013

अनचाहा कोई एक ख़याल......

कितना सोचते हो तुम ? आखिर कितनी मोहब्बतें मुक्कमल मकाम पाती हैं आजकल ? क्यूँ उसका ख़याल अब तक संजो रखा है तुमने? कुछ तो कहो....यूँ घुटते न रहो...मेरा कहा मानो ,भूल जाओ उसे...इक वही तो नहीं इस सारे जहां में??? उसके ख़याल से बाहर निकलो तो क्या पता कोई करीब ही दिख जाए जो तुमसे न जाने कब से इकतरफा इश्क किये जा रहा हो !!!
जानते नहीं ये दुनिया इमोशनल फूल्स से भरी हुई है !

तेरे माथे की
सलवटों पर
करवटें बदलता कोई ख़याल....
जानती हूँ,
मचाता कोलाहल/रात भर सोता नहीं
कंपकपाते होंठ/ कुछ कहते नहीं
आँखें तकती हैं
शून्य में कहीं/बहती नहीं
चेहरे पर घूमता
ख़याल
धीरे से उतर कर
दफ़न हो जाता है 
तेरे दिल में कहीं
और तुझे 
यूँ ही दिए जाता है
बे-करारियाँ ...

 
सुनो!!बुरे ख़याल बड़े ज़िद्दी और ढीठ होते हैं.बिना भाड़ा दिए डटे रहने वाले किरायदारों की तरह....याने दिलो दिमाग तुम्हारा और कब्ज़ा उनका......उनसे थोड़ी सख्ती करो मेरे यार,कि और कोई घर कर पाए  तेरे दिल में.
(मेरी डायरी का एक पन्ना,कभी उसकी सूरत देखते हुए ही लिखा था..........काश कि उसने पढ़ा होता )

अनु