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Showing posts from July, 2012

मेरी पहली कहानी.....

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ये मेरी पहली कहानी है इसलिए कमियां लाज़मी हैं......कृपया पढ़ें और बेबाक टिप्पणियां दें.

महामुक्ति भटक रही थी वो रूह,उस भव्य शामियाने के ऊपर,जहाँ सभी के चेहरे गमज़दा थे औरसबने उजले कपडे पहन रखे थे.एक शानदार मंच सजा था जिस पर उसकी एक बड़ी सीतस्वीर,और तस्वीर पर ताज़े गुलाबों की माला थी और उसके आगे दीपक जल रहा था . अनायास हंस पड़ी ललिता की रूह.....जीते जी वो कभी एक फूल या गजरा न सजा पायी अपनेबालों में.जाने कितने तीज-त्यौहार यूँ ही निकल गए,कोरे....बिना साज सिंगारकिये.शायद ये सब उसे मौत के बाद ही नसीब होना था. आज ललिता की आत्मा की शांति के लिए पूजा-पाठ का आयोजन किया गयाहै,जिसमे उसके परिवार- जनों के अलावा साहित्य मण्डली के लोग भी शरीक हैं.सभीबारी बारी मंच पर आकर उसके गुणों का बखान कर रहे हैं और उसका असमय जाना साहित्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व  क्षति बता रहे हैं. हैरान है वो अपनी ही उपलब्धियां सुन कर.जिसने सारी उम्र  नर्म स्वरमें कहा गया एक वाक्य न सुना हो उसके लिए तो ये अजूबा ही है.उसकी प्रशंसामें कसीदे पढ़े जाने वालों की होड सी लगी  है.....जाने कहाँ थे ये लोग जब वो जिंदा थी.हमारे समाज की यही तो खासिय…

निम्बोली

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याद  मुझे वो सावन आया
आई  याद वो पुरवाई..
याद मुझे है अब भी-

गाँव की भीगी  अमराई

उस बूढ़े पेड़ की कोटर में 

चिड़िया का बच्चा...

और याद मुझे वो कोयल आई.......

नंगे पाँव-

वो लुका छुपी का खेल

दरख्तों के पीछे

चोरी-चोरी,तेरे-मेरे

सपनो का मेल...

याद  मुझे है

बचपन से यौवन तक

पगडण्डी पर दौड़ना,

आषाढ़ से सावन तक

my various short stories published in dainik bhaskar DB star

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1-Found a rose in my diary...
flower was now dry,lost its smell and colour...
but the thorn hurts even more.




2-Cutting onions,reading sad stories,
watching tragic movies,pretending stomach ache.... thats how i hide my tears these days.



3-I travelled and wandered all my life...
every day,every night,
waiting sun to be brighter and to see a shooting star....
then realized that 
my eyes were closed throughout the journey.








4-She was crying...she cried the whole night..
the morning dew on the green grass was salty.



And these are awaiting publication... :-)

5-I wanted soft teddy bear,heart shaped pillow,bunch of red balloons......He said,why don't you grow up? And i grew up and grew old without his love.

6-As sky holding moon in its arm,he held me lightly......and i saw stars twinkling,clouds whispering and moon blushing.

7-I was wandering in search of happiness..in search of colour...then found you...and found a rainbow too. Anu

मनमोहना

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भास्कर  भूमि में प्रकाशित http://bhaskarbhumi.com/epaper/index.php?d=2012-07-26&id=8&city=Rajnandgaon#

प्यार  जितना ज़रूरी है ,इज़हार भी उतना ही ज़रूरी है......अगर कह न सके तो प्यार करना ही क्यूँ ???? कहे बिना समझने का तकल्लुफ मोहब्बत में बिलावजह घुसपैठ किये बैठा है.......
आँखों की भाषा समझें.........मौन को पढ़ें.........साँसों की खुशबू से पहचानें..........
अरे मगर क्यूँ ???? कहने में क्या हर्ज है भला??? कह के तो देखिये.......
मोहब्बत दुगुनी हो जायेगी......चाहे सीधे कहें ,घुमा कर कहें,लिख कर कहें या गा कर कहें....कहना ज़रूरी है.......सो अपनी बात का खुद पालन करते हुए हमने भी कह डाला......पूरी गज़ल ही कह दी......उसने पढ़ ली :-) अब आप भी पढ़ें...

तेरी आँखों में चेहरा देख लिया  अब तुम ही हो मेरे दर्पण पिया.
तेरी ही खुशबु से महके रहे तुम ही तो मेरे चन्दन पिया.
तुम संग खिलूँ,हो जाऊं हरी तुम ही तो मेरे सावन पिया.
तुमसे ही जीवन ये गुलज़ार है तुम ही तो मेरे मधुबन पिया.
मेरे तुम हुए, मैं हुई बावरी तुमको दिया मैंने तनमन पिया.
तेरे प्रेम में, मैं तो मीरा हुई तुम ही मेरे मनमोहन पिया. -अनु

मौत

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भास्कर भूमि में प्रकशित २३/७/१२ http://bhaskarbhumi.com/epaper/index.php?d=2012-07-23&id=8&city=Rajnandgaon

मौत कितनी आसान होती
अगर हम जिस्म के साथ
दफ़न कर पाते
यादों को भी....
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मौत कुदरत का तोहफा है
ये मिटा देती है
सभी दर्द...
उसके, जो मरा है...
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मौत अकसर भ्रमित होती है.
आती है उनके पास
जो जीना चाहते हैं...
और उन्हें पहचानती नहीं
जो जी रहे हैं मुर्दों की तरह.
.................................................

मौत जब किसी
पाक रूह को ले जाती है...
तब ज़रूर उसे
जी कर देखती होगी....
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मौत से मुझे
डर नहीं लगता
उसे लगता है डर
मेरी मौत से...
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मौत  का दुःख
अकसर एक सा नहीं होता...
कौन मरा ?
कैसे मरा?
कब मरा?
पहले सब हिसाब किया जाता है....
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-अनु


सपनों का सौदागर

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~~~~~~~~~ टैटू ~~~~~~~~

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कितना अच्छा  किया था जो उस दिन मैंने अपने हाथ में तुम्हारी जगह अपने  ही नाम का टैटू गुदवा लिया था.....तुम चाहते थे मैं तुम्हारा नाम लिखवाऊं....और कायदा  भी वही है न.......मगर मैं भी तो अजीब हूँ ही......तुमने कहा मुझे पता है तुम क्या लिखवाओगी..मैंने पूछा अच्छा बताओ तो???? तुमने प्यार भरी आवाज़ में मुस्कुरा कर कहा,नहीं बताऊंगा...वो  जो मेरे दिल में है......बस मैंने भी अपना ही नाम लिखवा लिया....कि मैं ही तो हूँ तुम्हारे दिल में :-) [तुम्हारी वो सूरत अब भी याद है मुझे,तुम्हारी उस सूरत का टैटू मेरे ज़हन में बन गया था उस रोज.. ] अच्छा सोचो,उस रोज गर तुम्हारा नाम गुदवा लेती तो आज तुम्हारे न होने पर वो नाम मैं कहाँ छुपाती.......तुम्हारे दिए हज़ारों ज़ख्मों की तरह उसको हटाने को क्या एक और ज़ख्म बनाती.......?????? यूँ भी कितनी चीज़ें हैं जो तुम्हारे न होने का एहसास कराती हैं.....या तुम कभी थे इसकी याद दिलाती हैं.....जब मोहब्बत नहीं तो मोहब्बत की ये निशानियाँ किस काम की...... सच्ची , तुम तो बेवफाई में अव्वल निकले थे.....मुझे यूँ निकाला अपनी ज़िन्दगी से जैसे अपनी मूंछ के सफ़ेद बाल उखाड फेंकते थे.....वो बाल…

ख्वाब नहीं ख्वाहिश है......

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क्यूँ आसमां में एक ही चाँद ? होते कई काश... एक तेरा, एक मेरा..... जितने तारे, उतने चाँद !! टिमटिमाते तारे, मुस्काते चाँद. कभी कोई चाँद पूरा कोई अधूरा... तीजा चौथ का चौथा ईद का... कोई चाँद तुम सा, कोई तुम कहो मुझ सा.... तकते रहें हम रात भर, खोजें चाँद  अपना अपना. कभी  धरती पर उतरे कोई चाँद एक तुम मेरे बालों में खोंसो... एक मैं छुपा लूँ मुट्ठी में.. गर बिखरे होते चाँद यहाँ वहाँ ... जब चलते हम-तुम संग संग तब पीछे चलता तारों का नहीं, चाँद का कारवां..... काश.... आसमां में होते  ढेरों चाँद... एक  तेरा  एक मेरा ये ख्वाब नहीं... ख्वाहिश है मेरी.

-अनु

यकीन

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बड़ा आसान है मेरे लिए यकीं कर लेना....जो कहीं है उस पर और जो नहीं है उस पर भी...मुझे यकीन  है हर एहसास पर जो किसी के दिल में पलता है..यकीन  है मुस्कराहट पर जो होंठों पर खेलती है...यकीन है धडकन पर जो जिंदा रखती है मुझे/तुम्हें...... जीना बड़ा आसान हो जाता है गर मन में विश्वास हो....आस्था हो.
मुझे यकीन है हाथों की लकीरों पर बरगद तले बैठे बूढ़े फकीरों पर....          -जो कहते हैं कि सब ठीक होगा एक दिन.
मुझे यकीन है हर अच्छे -बुरे इंसान पर  जिसे देखा नहीं उस भगवान पर....          -जो मुझे बनने नहीं देता बुरा कभी.
मुझे यकीन है जगमगाते तारों पर  जितने हैं आस्मां में,उन सारों पर....           -कि कोई एक टूटेगा ज़रूर और मुराद पूरी होगी मेरी.
मुझे यकीन है तुम्हारे इरादों पर  अब तक किये सभी वादों पर....            -क्यूंकि उम्मीद पर ही तो दुनिया टिकी है.